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Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Poems in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultures. They...Read More


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  • में और मेरे अहसास - 158

    सूनापन    सूनेपन को समेटना सीख लो l अकेलापन धकेलना सीख लो ll   जो...

  • प्रेमाक्षर - भाग 2

    तुझ्यासाठी लिहिलेली कविताडायरीच्या एका कोपऱ्यात शांत,फक्त तुझ्यासाठी एक कविता नि...

  • शब्द और सत्य - भाग 15

    43.मैं एक कुत्ता हूँ, इंसान नहीं.सुनो ओ दो पैरों वाले,तुम क्यों खुद को श्रेष्ठ ब...

બન - ફુલ - 3 By Rushil Dodiya

તૃતિય સર્ગ"યમુનાના જળ કરે છલ-છલ,કલકલ ગાઈને પ્રેમનું ગાન.રાત્રિના આંચળમાં ઢળીને ઝૂમે,ચંદ્ર ખોલીને હૃદય-પ્રાણ!વહે છે મલય પવન ફૂલોને સ્પર્શીને,નમી-નમી પડે છે ફૂલોનો જથ્થો!ધીમે ધીમે ધી...

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ویرانی By Dr Darshita Babubhai Shah

تنہائی   خالی پن کو گلے لگانا سیکھیں۔ تنہائی کو دور کرنا سیکھیں۔   آپ کے پاس جو کچھ ہے اسے تبدیل کرنے کے بارے میں سوچئے۔ دکھوں کو منتشر کرنا سیکھیں۔   اپنی خوشی کی خ...

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नियती पुन्हा हाक देईपर्यंत.. - 8 By Bhuma Shende

Chapter 8 – अनपेक्षित क्षणदिवस नेहमीसारखाच सुरू झाला होता.ऑफिसमध्ये कामाचा नेहमीचा गोंधळ होता. कुणाचे फोन सुरू होते, कुणी ई-मेल्समध्ये व्यस्त होतं, तर कुणी deadline पूर्ण करण्यासाठ...

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अल्हड़ - सी ... मैं अनमनी By उषा जरवाल

लोग अक्सर ऐसा क्यों चाहते हैं कि हम उनके मन के मुताबिक ही चलें । जो उन्हें अच्छा लगे वही करें, वही पहनें, वही कहें । कभी ये रंग तुम पर जांचता नहीं है, मत पहना करो । कभी तुम्हारे मा...

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HAPPINESS - 146 By Dr Darshita Babubhai Shah

Emptiness   Learn to embrace the emptiness, Learn to cast aside the loneliness.   Think of changing what currently is, Learn to scatter away the sorrow.   For the sa...

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में और मेरे अहसास - 158 By Dr Darshita Babubhai Shah

सूनापन    सूनेपन को समेटना सीख लो l अकेलापन धकेलना सीख लो ll   जो है वो बदलने का सोचो l ग़म को बिखेरना सीख लो ll   खुद की खुशी की ख़ातिर तो l लम्हों को लिपेटना...

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मराठी रसामृत (कवितांचे रसग्रहण) By Mandar Milind Kulkarni

नमस्कार, मी मंदार मिलींद कुळकर्णी घेऊन आलो आहे माझ्या आवडत्या कवितांचे रसग्रहण! मराठी भाषेला अनेक सुंदर कवितांनी समृद्ध केले आहे. त्या महान कवींच्या काव्य विश्वाची झलक देण्याचा हा...

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प्रेमाक्षर - भाग 2 By Shivraj Bhokare

तुझ्यासाठी लिहिलेली कविताडायरीच्या एका कोपऱ्यात शांत,फक्त तुझ्यासाठी एक कविता निजलीये.तुझ्या एका संवादाच्या प्रतीक्षेत,ती शब्दाशब्दाने आतून भिजलीये.तिला नाही आवडत गर्दी जगाची,ती फक...

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فرصت کے لمحات By Dr Darshita Babubhai Shah

کہاں جا رہے ہو؟ کیا آپ کو سکون مل رہا ہے؟   کس کی یاد میں؟ کیا آپ گانا گا رہے ہیں؟   پہلی نظر میں،   آپ دل کو خوش کرتے ہیں۔   ٹھنڈا، نشہ آور، خوبصورت۔   آپ...

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બન - ફૂલ - 1 By Rushil Dodiya

બન - ફૂલ( જંગલનું ફૂલ )લેખક : રવિન્દ્રનાથ ટાગોરકાવ્યોપન્યાસ​"અનાઘ્રાતં પુષ્પં કિસલયમલૂનં કરરુહૈઃ"​અનુવાદ :"નથી સૂંઘાયું જે કદી, એવું નવતર પુષ્પ;નથી સ્પર્શાયું નખથી, એવું કોમળ કૂંપળ...

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माहि रखा क्या है By Dr Mahendra pawar

" तुम फूल हो भूल गये हो क्या    महको हवाओं को महसूस करो   किसी प्रेमी के हाथों में टूट जाओ   या नफरत के पैरों से कुचल जाओ   या भगवान केलिए माला बन जाओ   आखिरी एक दिन बिखर ही जाना ह...

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दो शिखर कवि , दो भिन्न दिशाएँ By Vivek Ranjan Shrivastava

लेख हिंदी के दो शिखर कवि , दो भिन्न दिशाएँविवेक रंजन श्रीवास्तव आधुनिक हिंदी कविता के विराट परिदृश्य में नागार्जुन और मुक्तिबोध दो ऐसे शिखर हैं, जिन्होंने कविता को सामाजिक सरोकार औ...

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सावन के गीत By Vandna Sharma

आया जन्मदिन आया,  सबने लड्डू खाया  नंद लाला का जन्मदिन आया  झूम रही है मथुरा, झूम रहा वृंदावन  गा रही है गोकुल नगरी  बरसाना नृत्य करे होकर मगन  मेरे कान्हा का जन्मदिन आया  मुरलीवाल...

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कृषि शायरी बुक By Shivam Varshney

Welcome all Shayri's Shivam Varshney                  इकतरफा मोहब्बत का इजहार             कुछ शायरी के अंदाज़ मै और कुछ दर्द आज भी तेरी हर बात कानों में घुसती हैआज भी तेरी हर मु...

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ગઝલ - એ - ઇશ્ક - 12 By Nency R. Solanki

નમસ્કાર આપ સૌને! ઘણા સમય બાદ લાગણી વિભોર થઈ લખી રહી છું આશા રાખું છું કે આપ સૌને વાંચવું ગમશે. મારા તમામ વાચકોનો ખુબ ખુબ આભાર જેઓ આજ સુધી અકબંધ રહ્યા છે આપને ક્યારેય નિરાશા નહીં મળ...

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शब्द और सत्य - भाग 15 By Shivraj Bhokare

43.मैं एक कुत्ता हूँ, इंसान नहीं.सुनो ओ दो पैरों वाले,तुम क्यों खुद को श्रेष्ठ बताते हो?अहंकार की भारी गठरी लेकर,दिन-रात व्यर्थ मंडराते हो। हाँ, मैं एक कुत्ता हूँ, इंसान नहीं,तुम्ह...

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मन के भीतर (कुछ सूक्ष्म पल…) By Shilpy Aggarwal

लेखक की कलम से…कहानियाँ सहज ही मन से जुड़ जाया करती हैं। पढ़ते-पढ़ते किरदार अपने से लगने लगते हैं। मगर कविताएँ पहली नज़र में अपने रहस्य नहीं खोलती। वो पाठक से ठहराव माँगती है। धीरे...

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शायद उसी दिन मैं मर गया By Kishan Didani

शायद उसी दिन मैं मर गयालगता है जैसे मेरा सपना मुकम्मल हो गया,मरना था जिस दिन... शायद उसी दिन मैं मर गया। बस छह महीने की कहानी थी, मगर उम्र-सी लगती थी,हर सुबह तेरी आवाज़ से मेरी दुन...

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زندگی کی صلیب By Dr Darshita Babubhai Shah

حالات خدا کی حوصلہ افزائی سے، میں نے اپنے حالات بدل لیے ہیں۔   حالات کی وجہ سے لگنے والی ضربوں نے میری زندگی بدل دی ہے۔   اچھے اعمال ہمیشہ میٹھے ہوتے ہیں۔   اس کی رح...

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હું અને મારા અહસાસ - 138 By Dr Darshita Babubhai Shah

સહારા પારકા હોત તો પહોંચી વળું, અહીં બધા મારા છે, કોઈના માં ખામી નથી, અહીં બધા સારા છે.   આમ તો દુનિયા માં, કોઈ કોઈનું નથી તો,  મન થી માની લે તો, અહીં બધા તારા છે.  ...

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तेरा एहसास By Himani Dave

कि गुजरते हुए हर लम्हे मुझे फुरसत के लगते हैं यादों के सुनहरे धागे मुझे तेरे संग ओर खूबसूरत लगते हैं रुकी सी मेरी जिंदगानी के पल मुझे तेरे आने से ओर भी खुशनसीब लगते हैं , हवाओं का...

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કવિની કથા - 4 By Rushil Dodiya

ચતુર્થ સર્ગ​"તો આ માત્ર એક સ્વપ્ન હતું, પરપોટાની જેમફરી પાછું વિલીન થઈ ગયું નિદ્રાના સમુદ્રમાં!આખી રાત મેં નિદ્રાની આરાધના કરી—જો આ થાકેલી આંખોમાં ઊંઘ આવી પણ ખરી,તો મૃગજળ બતાવીને ત...

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कविताओं का संग्रह- भाग 3 By prachi Gurjar

                कविताओं का संग्रह : भाग 3                                                      लेखिका                               प्राची गुर्जर लेखिका की ओर सेकुछ भाव कहे नहीं जा...

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पत्नी क्यों पराई By Vandna Sharma

सूना-सूना घर का आँगन  सूना-सूना घर का आँगन  कर रही कबसे इंतजार  चौबारे पर बैठी माँ  आयेगा मेरा बेटा  भर लेगा बाँहों में  पूछेगा कैसी हो माँ  राह निहारे बूढ़ी माँ  सोच रही कैसे रहता...

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بے شمار منزلیں By Dr Darshita Babubhai Shah

میں بلاشبہ بدنام ہوں۔ ظاہر ہے میں عاشق ہوں اس لیے بلاشبہ بدنام ہوں۔ میں کائنات کے رسم و رواج سے بے خبر ہوں۔   مجھے بے پناہ محبت سے نوازا گیا ہے۔ میں خوبصورت جوان دل کی آرزو ہو...

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मानसून नाराज है By Vandna Sharma

एक बूंद बादलों की गोद में बैठी सोच रही थी। नीचे कितनी गर्मी है, अगर मैं बाहर गई तो गर्मी में भाप बन जाऊंगी। मनुष्य कितना स्वार्थी हो गया है। जंगल काटकर शहर बसाए जा रहा है। ओजोन लेय...

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कर लो बात By Vandna Sharma

मन की बात और सुनो'मैं सड़क हूँ' ने कहा था - "मैं सबकी हूँ, पर मेरी कोई नहीं।"  ठीक वैसे ही हास्य है।  हँसी सबकी है, पर हँसी की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता।  लोग कहते हैं - "अर...

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खिचड़ी की राम कथा By Vandna Sharma

काव्य संग्रह : 'खिचड़ी' की राम कथा खिचड़ी केवल भोजन नहीं, संस्कृति है। यूपी की मिट्टी की सौंधी खुशबू है। अमीर-गरीब, बच्चे-बूढ़े, स्वस्थ-बीमार - सबको भाने वाली। झट से बनने व...

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चारपाई की व्यथा By Vandna Sharma

नया काव्य संग्रह -चरपाई की व्यथा *- डॉ वंदना शर्मा*कविता लिखना मेरे लिए शब्दों का खेल नहीं, एक जिम्मेदारी है। आज जब मैं चारों ओर देखती हूँ तो पाती हूँ कि हम बहुत तेजी से भाग रहे है...

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صبح ہو گئی چچا By Dr Darshita Babubhai Shah

خفیہ میں نے اپنے دل میں کیا راز چھپا رکھا ہے؟ میں نے تعلق کو شدت سے نبھایا ہے۔   میرے دل میں پیاس اٹھی اور   آنکھیں آنسو بہاتی ہیں۔   محبت کی سردی کو ٹھنڈا کرنے کے ل...

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My Shayari Book - 3 By Roshan baiplawat

कहानी 1धीरे-धीरे दूर होती है......सब कुछ ठीक चल रहा था…कम से कम मुझे तो यही लगता था।हम दोनों के बीच बातें होती थीं, हँसी होती थी, और एक अजीब सा सुकून था… जैसे सब कुछ सही दिशा में ज...

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सबसे मुश्किल सवाल-काव्य संग्रह By Vandna Sharma

जय महाकाल मैं मानती हूँ कि कविता का धर्म सिर्फ सौंदर्य रचना नहीं है। उसका काम है दीवार पर उँगली रखकर पूछना - "यहाँ दरार क्यों है?" उसका काम है उस अँधेरे को नाम देना जिससे हम सब आँख...

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બન - ફુલ - 3 By Rushil Dodiya

તૃતિય સર્ગ"યમુનાના જળ કરે છલ-છલ,કલકલ ગાઈને પ્રેમનું ગાન.રાત્રિના આંચળમાં ઢળીને ઝૂમે,ચંદ્ર ખોલીને હૃદય-પ્રાણ!વહે છે મલય પવન ફૂલોને સ્પર્શીને,નમી-નમી પડે છે ફૂલોનો જથ્થો!ધીમે ધીમે ધી...

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ویرانی By Dr Darshita Babubhai Shah

تنہائی   خالی پن کو گلے لگانا سیکھیں۔ تنہائی کو دور کرنا سیکھیں۔   آپ کے پاس جو کچھ ہے اسے تبدیل کرنے کے بارے میں سوچئے۔ دکھوں کو منتشر کرنا سیکھیں۔   اپنی خوشی کی خ...

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नियती पुन्हा हाक देईपर्यंत.. - 8 By Bhuma Shende

Chapter 8 – अनपेक्षित क्षणदिवस नेहमीसारखाच सुरू झाला होता.ऑफिसमध्ये कामाचा नेहमीचा गोंधळ होता. कुणाचे फोन सुरू होते, कुणी ई-मेल्समध्ये व्यस्त होतं, तर कुणी deadline पूर्ण करण्यासाठ...

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अल्हड़ - सी ... मैं अनमनी By उषा जरवाल

लोग अक्सर ऐसा क्यों चाहते हैं कि हम उनके मन के मुताबिक ही चलें । जो उन्हें अच्छा लगे वही करें, वही पहनें, वही कहें । कभी ये रंग तुम पर जांचता नहीं है, मत पहना करो । कभी तुम्हारे मा...

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HAPPINESS - 146 By Dr Darshita Babubhai Shah

Emptiness   Learn to embrace the emptiness, Learn to cast aside the loneliness.   Think of changing what currently is, Learn to scatter away the sorrow.   For the sa...

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में और मेरे अहसास - 158 By Dr Darshita Babubhai Shah

सूनापन    सूनेपन को समेटना सीख लो l अकेलापन धकेलना सीख लो ll   जो है वो बदलने का सोचो l ग़म को बिखेरना सीख लो ll   खुद की खुशी की ख़ातिर तो l लम्हों को लिपेटना...

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मराठी रसामृत (कवितांचे रसग्रहण) By Mandar Milind Kulkarni

नमस्कार, मी मंदार मिलींद कुळकर्णी घेऊन आलो आहे माझ्या आवडत्या कवितांचे रसग्रहण! मराठी भाषेला अनेक सुंदर कवितांनी समृद्ध केले आहे. त्या महान कवींच्या काव्य विश्वाची झलक देण्याचा हा...

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प्रेमाक्षर - भाग 2 By Shivraj Bhokare

तुझ्यासाठी लिहिलेली कविताडायरीच्या एका कोपऱ्यात शांत,फक्त तुझ्यासाठी एक कविता निजलीये.तुझ्या एका संवादाच्या प्रतीक्षेत,ती शब्दाशब्दाने आतून भिजलीये.तिला नाही आवडत गर्दी जगाची,ती फक...

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فرصت کے لمحات By Dr Darshita Babubhai Shah

کہاں جا رہے ہو؟ کیا آپ کو سکون مل رہا ہے؟   کس کی یاد میں؟ کیا آپ گانا گا رہے ہیں؟   پہلی نظر میں،   آپ دل کو خوش کرتے ہیں۔   ٹھنڈا، نشہ آور، خوبصورت۔   آپ...

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બન - ફૂલ - 1 By Rushil Dodiya

બન - ફૂલ( જંગલનું ફૂલ )લેખક : રવિન્દ્રનાથ ટાગોરકાવ્યોપન્યાસ​"અનાઘ્રાતં પુષ્પં કિસલયમલૂનં કરરુહૈઃ"​અનુવાદ :"નથી સૂંઘાયું જે કદી, એવું નવતર પુષ્પ;નથી સ્પર્શાયું નખથી, એવું કોમળ કૂંપળ...

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माहि रखा क्या है By Dr Mahendra pawar

" तुम फूल हो भूल गये हो क्या    महको हवाओं को महसूस करो   किसी प्रेमी के हाथों में टूट जाओ   या नफरत के पैरों से कुचल जाओ   या भगवान केलिए माला बन जाओ   आखिरी एक दिन बिखर ही जाना ह...

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दो शिखर कवि , दो भिन्न दिशाएँ By Vivek Ranjan Shrivastava

लेख हिंदी के दो शिखर कवि , दो भिन्न दिशाएँविवेक रंजन श्रीवास्तव आधुनिक हिंदी कविता के विराट परिदृश्य में नागार्जुन और मुक्तिबोध दो ऐसे शिखर हैं, जिन्होंने कविता को सामाजिक सरोकार औ...

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सावन के गीत By Vandna Sharma

आया जन्मदिन आया,  सबने लड्डू खाया  नंद लाला का जन्मदिन आया  झूम रही है मथुरा, झूम रहा वृंदावन  गा रही है गोकुल नगरी  बरसाना नृत्य करे होकर मगन  मेरे कान्हा का जन्मदिन आया  मुरलीवाल...

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कृषि शायरी बुक By Shivam Varshney

Welcome all Shayri's Shivam Varshney                  इकतरफा मोहब्बत का इजहार             कुछ शायरी के अंदाज़ मै और कुछ दर्द आज भी तेरी हर बात कानों में घुसती हैआज भी तेरी हर मु...

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ગઝલ - એ - ઇશ્ક - 12 By Nency R. Solanki

નમસ્કાર આપ સૌને! ઘણા સમય બાદ લાગણી વિભોર થઈ લખી રહી છું આશા રાખું છું કે આપ સૌને વાંચવું ગમશે. મારા તમામ વાચકોનો ખુબ ખુબ આભાર જેઓ આજ સુધી અકબંધ રહ્યા છે આપને ક્યારેય નિરાશા નહીં મળ...

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शब्द और सत्य - भाग 15 By Shivraj Bhokare

43.मैं एक कुत्ता हूँ, इंसान नहीं.सुनो ओ दो पैरों वाले,तुम क्यों खुद को श्रेष्ठ बताते हो?अहंकार की भारी गठरी लेकर,दिन-रात व्यर्थ मंडराते हो। हाँ, मैं एक कुत्ता हूँ, इंसान नहीं,तुम्ह...

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मन के भीतर (कुछ सूक्ष्म पल…) By Shilpy Aggarwal

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शायद उसी दिन मैं मर गया By Kishan Didani

शायद उसी दिन मैं मर गयालगता है जैसे मेरा सपना मुकम्मल हो गया,मरना था जिस दिन... शायद उसी दिन मैं मर गया। बस छह महीने की कहानी थी, मगर उम्र-सी लगती थी,हर सुबह तेरी आवाज़ से मेरी दुन...

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زندگی کی صلیب By Dr Darshita Babubhai Shah

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હું અને મારા અહસાસ - 138 By Dr Darshita Babubhai Shah

સહારા પારકા હોત તો પહોંચી વળું, અહીં બધા મારા છે, કોઈના માં ખામી નથી, અહીં બધા સારા છે.   આમ તો દુનિયા માં, કોઈ કોઈનું નથી તો,  મન થી માની લે તો, અહીં બધા તારા છે.  ...

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तेरा एहसास By Himani Dave

कि गुजरते हुए हर लम्हे मुझे फुरसत के लगते हैं यादों के सुनहरे धागे मुझे तेरे संग ओर खूबसूरत लगते हैं रुकी सी मेरी जिंदगानी के पल मुझे तेरे आने से ओर भी खुशनसीब लगते हैं , हवाओं का...

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કવિની કથા - 4 By Rushil Dodiya

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कविताओं का संग्रह- भाग 3 By prachi Gurjar

                कविताओं का संग्रह : भाग 3                                                      लेखिका                               प्राची गुर्जर लेखिका की ओर सेकुछ भाव कहे नहीं जा...

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मानसून नाराज है By Vandna Sharma

एक बूंद बादलों की गोद में बैठी सोच रही थी। नीचे कितनी गर्मी है, अगर मैं बाहर गई तो गर्मी में भाप बन जाऊंगी। मनुष्य कितना स्वार्थी हो गया है। जंगल काटकर शहर बसाए जा रहा है। ओजोन लेय...

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कर लो बात By Vandna Sharma

मन की बात और सुनो'मैं सड़क हूँ' ने कहा था - "मैं सबकी हूँ, पर मेरी कोई नहीं।"  ठीक वैसे ही हास्य है।  हँसी सबकी है, पर हँसी की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता।  लोग कहते हैं - "अर...

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खिचड़ी की राम कथा By Vandna Sharma

काव्य संग्रह : 'खिचड़ी' की राम कथा खिचड़ी केवल भोजन नहीं, संस्कृति है। यूपी की मिट्टी की सौंधी खुशबू है। अमीर-गरीब, बच्चे-बूढ़े, स्वस्थ-बीमार - सबको भाने वाली। झट से बनने व...

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चारपाई की व्यथा By Vandna Sharma

नया काव्य संग्रह -चरपाई की व्यथा *- डॉ वंदना शर्मा*कविता लिखना मेरे लिए शब्दों का खेल नहीं, एक जिम्मेदारी है। आज जब मैं चारों ओर देखती हूँ तो पाती हूँ कि हम बहुत तेजी से भाग रहे है...

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خفیہ میں نے اپنے دل میں کیا راز چھپا رکھا ہے؟ میں نے تعلق کو شدت سے نبھایا ہے۔   میرے دل میں پیاس اٹھی اور   آنکھیں آنسو بہاتی ہیں۔   محبت کی سردی کو ٹھنڈا کرنے کے ل...

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My Shayari Book - 3 By Roshan baiplawat

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सबसे मुश्किल सवाल-काव्य संग्रह By Vandna Sharma

जय महाकाल मैं मानती हूँ कि कविता का धर्म सिर्फ सौंदर्य रचना नहीं है। उसका काम है दीवार पर उँगली रखकर पूछना - "यहाँ दरार क्यों है?" उसका काम है उस अँधेरे को नाम देना जिससे हम सब आँख...

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