Sanvednao ke swar : ek drashti - 2 by Manoj kumar shukla in Hindi Poems PDF

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 2

by Manoj kumar shukla in Hindi Poems

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (2) जब-जब श्रद्धा विश्वासों पर ..... जब - जब श्रद्धा विश्वासों पर, अपनों ने प्रतिघात किया । तब - तब कोमल मन यह मेरा, आहत हो बेजार हुआ । मैं तो प्रतिक्षण चिंतित रहता, ...Read More