Ghor andhkar by Apurva Raghuvansh in Hindi Poems PDF

घोर अंधकार

by Apurva Raghuvansh in Hindi Poems

वक़्त से नाराज हूंवक्त से अनजान है,कुछ पता पता नहीं है,जानने की जिज्ञासापाने की लालसाखोने को कुछ नहीं,पाने को बहुत कुछभटकता हूंदरबदरकहता किसी से कुछ भी नहींसोचता हूं बहुतकरने को सोचा था बहुत पर कर नहीं पा रहा हूंघेर ...Read More