Kathin path par kaise badhe by Rajesh Kumar in Hindi Philosophy PDF

कठिन पथ पर कैसे बढ़ें

by Rajesh Kumar in Hindi Philosophy

उड़ने लगे धूल कण जब,पैर पथ पर बढ़ चले।हो बिछे कंट पथ पर,कठिनाइयां चाहे मिले।ध्येय ज्वाला जला हृदय में,नित्य आगे बढ़ चले।सफल परिश्रम हो हमारा,नित्य पथ अवलोकन करें।साथियों, जब कभी हम अपने लक्ष्य को निश्चित कर उसकी ओर ...Read More