Kandha by Amita Joshi in Hindi Short Stories PDF

कंधा

by Amita Joshi in Hindi Short Stories

"कितनी डरपोक हो तुम ,तुम्हें छोड़ कर मैं कहीं नहीं जा सकता ।अच्छे भले बन्द घर में भी डर लगता है तुम्हे ,ऐसा कब तक चलेगा ",सोमेश की आवाज़ में एक खीज थी ।"क्या करूं ये मेेेरा खानदानी डर ...Read More