Best Short Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultur...Read More


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  • मुकम्मल

    पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म...

  • ख़ुशी

    सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का का...

  • चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं

    चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स...

अलमारी By Vandna Sharma

सुबह के साढ़े सात बजे थे। रीना ने अदरक वाली चाय बनाकर रवि को थमाई और बहुत हिम्मत जुटाकर बोली, "सुनो, मुझे एक छोटी सी अलमारी चाहिए। मेरा कॉस्मेटिक का सामान, क्रीम-पाउडर, पर्स सब बेड...

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સાથે હોવું એટલે સાથે સમય વિતાવવો - 3 By Aloka Patel

ભાગ ૩ — રવિવારનું વચનરવિવારની સવાર કાવ્યા માટે ખાસ હતી.ઘડિયાળમાં સાત વાગ્યા હતા, પરંતુ કાવ્યા રોજ કરતાં વહેલી ઊઠી ગઈ હતી. બારીમાંથી આવતી ઠંડી હવામાં તેના વાળ હળવેથી લહેરાઈ રહ્યા હત...

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பூங்கா நட்புகள் By Ramakrishnan Anantha

அந்த நகரத்தின் ஒரு பகுதியில்.... காலை சூரியன் உதயமாக காத்துக்கொண்டு இருக்கும் பறவைகள்... அந்த பகுதியை தூய்மை செய்யும் பணியாளர்கள்... வீட்டிற்கு பால் போடும் பால்காரர்... வீட்டு வேலை...

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રાહ હૃદયની - 1 By Harsh Jethva

પ્રસ્તાવના કેટલીક વાર્તાઓની શરૂઆત મુલાકાતથી થતી નથી. કેટલીક વાર્તાઓ તો એ ક્ષણથી શરૂ થાય છે, જ્યારે કોઈ અજાણી વ્યક્તિ ભીડમાં માત્ર એક નજર માટે તમારી સામે આવે... અને પછી આખી જિંદગી મ...

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द्वितिय महायुद्ध - भाग 18 By Siddhesh Chaudhari

जून १९४० मध्ये फ्रान्सचा अत्यंत अपमानास्पद पराभव झाल्यानंतर युरोपच्या नकाशावर एक नजर टाकली, तर परिस्थिती अत्यंत भयंकर दिसत होती. पोलंड, नॉर्वे, डेन्मार्क, नेदरलँड्स, बेल्जियम आणि आ...

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मुकम्मल By Shivam Dhuriya

पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म नहीं कर पाईं। एक पुरानी नीली चूड़ी अचानक दोनों को फिर आमने-सामने ला खड़ा करती है और उन्हें एहसास हो...

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किनारा By Rajeev kumar

    जल की कलकल करती जलधारा प्रबल वेग से बढ़ रही थी। पत्थर पर जल का प्रहार लगातार हो रहा था। यहाँ-वहाँ अटकी हुई जलकुम्भी भी जकड़न से मुक्त हो बह रहा था। छोटे बच्चे बड़ी सावधानी से अपनी...

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मेरी जिंदगी का सफर 10 By Ankit Khatri

      आज मैं जहाँ हूँ… और आगे की उम्मीद हर सफर की एक शुरुआत होती है।कुछ रास्ते आसान होते हैं और कुछ रास्ते ऐसे होते हैं, जिन पर चलते हुए इंसान कई बार खुद से ही पूछता है—“मैं आखिर ज...

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बुंदकी की छींट By Deepak sharma

                 “दो रोटी आज कम क्यों खायी?”    अम्मा ने पूछा।              &n...

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भिकारी ( भाग ४) By suchitra gaikwad Sadawarte

ओम ? इथे काय करतोयस तू ? ते ही एकटाच ? ओम थोडा गोंधळून गेला होता , कदाचित घाबरला ही होता . त्याला इतका अंदाज होता सुहा ताई इकडेच कुठेतरी लपून बसली आहे . हा आवाज त्याच्या पप्पाचा हो...

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चेतना By Rajeev kumar

  किसी का मन मसोस कर रह जाना किसी के लिए बड़ी ही प्रसन्नता की बात होती है। किसी का हार जाना, न जाने क्यों जलने वालों को जीत की अनुभूति करवा देता है। क्यों किसी का कुछ बिगड़ जाना, किस...

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A Miracle of Gods Faithfulness By Mary Kondeti

It was 26 January 2022, at the peak of the COVID-19 pandemic. I was attending the online Republic Day flag-hoisting ceremony conducted by our school. It was a quiet morning, but wi...

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एहसास By Rajeev kumar

  पहले तो गुजाराभत्ता के नाम पर अड़ी रही सुहानी। मनोज अपने सामर्थ्य को देखते हुए इतनी बड़ी रकम के लिए हामी भरी थी। सुहानी और बेटी काव्या के भविष्य को लेकर चिंतीत थी और वो इस बात को ल...

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देश की शान-सेना का जवान By Piyush Goel

एक गाँव में रामसेवक नाम का किसान रहता था,बड़ा ही मेहनती, अपने परिवार में माता पिता की सेवा और अपनी खेती पर पूरा ध्यान, अपने माँ बाप के इकलौते बेटे थे।रामसेवक हमेशा यही सोचते रहते थ...

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शेवटचा संदेश By Anuja Dharane

सीता लहानपणापासूनच सुखवस्तू कुटुंबात वाढली होती.ती तिच्या आई-वडिलांची एकुलती एक मुलगी होती. आई, बाबा, आजी, आजोबा आणि घरातील प्रत्येक व्यक्ती तिच्यावर खूप प्रेम करायची. तिच्या घरात...

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टके कोस By Deepak sharma

                  “मलकिन आप को उधर बुला रही हैं,” किशोरीलाल मेरे कमरे में आन खड़ा हुआ।          &n...

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चुगली By Rajeev kumar

      शनैः शनैः गतिरोध बढ़ता जा रहा था। गतिरोध तन का नहीं, बल्कि गतिरोध मन का बढ़ता जा रहा था। वो तो शिथील सी चाल से चल रहा था लेकिन उसकी इच्छाएं मानो विमान पर सवार हो। शारिरिक परेशा...

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एक माँ का संकल्प By Piyush Goel

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम है...

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बाबूजी की हिचकी By Deepak sharma

                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                &nb...

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ख़ुशी By Piyush Goel

सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का...

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घुमक्कड़ By Rajeev kumar

घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धी...

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चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं By Shivam Dhuriya

चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे।
यह कोई तन्हाई नहीं,...

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The Night of the Brahma Kamal By Deep Parekh

Kavya had walked for eleven days to reach Hemkund.Her grandmother used to say that the Brahma Kamal bloomed only once a year, only at night, and only for those patient enough to si...

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रिकवरी एजेंट By Rajeev kumar

    अफरातफरी मचते ही लोग सिर पर पाँव रख कर भागे। लोगों के कदमों की तेज ध्वनी गुंजायमान थी। कम्पन ऐसा हो रहा था मानो धरती काँप रही हो। कदमों को कहाँ मालूम था कि कुचला जाने वाला आदमी...

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इन्तजार By Rajeev kumar

. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकार...

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नाम बदलाई By Deepak sharma

                   उन्हें अपना पहला नाम, हीरालाल, 15 मार्च 1909 को मिला था। जब वह लाला मगनलाल  के घर पैदा हुए थे।   &nbs...

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શક - સંબંધને અંદરથી ખોખલો કરતી ઉધઈ By Anuradha

શક — સંબંધને અંદરથી ખોખલો કરતી ઉધઈશક પણ એક ઉધઈ જેવો હોય છે…દેખાતો નથી, અવાજ કરતો નથી,પણ ધીમે ધીમે સંબંધને અંદરથી ખાઈ જાય છે.ક્યારેક જીવનમાં એવી વ્યક્તિ મળે છે, જે આપણને માત્ર પ્રેમ...

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અંતહીન શાંતિની શોધ: રાજકુમારી અને યોગેશ્વરનો સંવાદ By Sicret super Star

પ્રકરણ ૧: નવી શાંતિ અને નવો સંશયમહારાજ વિક્રમસેનની પુત્રી, રાજકુમારી દેવાંશીના જીવનમાં લાંબા સમય પછી એક એવી સવાર આવી હતી જે ચિંતામુક્ત હતી. તેના જીવનના વમળો, રાજકીય કટોકટીઓ અને અંગ...

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ભાઈબંધ By ચિરાગ રાણપરીયા

શહેરના એક નાનકડા વિસ્તારમાં પાંચ મિત્રો રહેતા હતા—ચિરાગ, રવિ, કૌશલ, કૃણાલ અને રોહિત. પાંચેયની ઉંમર લગભગ સરખી હતી, પણ સ્વભાવ એકબીજાથી સાવ અલગ.ચિરાગ શાંત અને સમજદાર હતો. કોઈ મુશ્કેલી...

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പണിക്കരു സാറും ചൂരലും പിന്നെ ഞാനും By aNil Madhavan

പണിക്കരു സാറും ചൂരലും പിന്നെ ഞാനുംഅഞ്ചാം ക്ലാസ്സിൽ ചേരുന്നത് ഒരു പുതിയ സ്കൂളിലാണ്. പുതിയ സ്കൂൾ പുതിയ കൂട്ടുകാർ.  അച്ഛന്റെ കുടുംബം വക ആയിരുന്നു ആ സ്‌കൂളിരിക്കുന്ന സ്ഥലവും അതിനോട് ചേ...

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कथनी और करनी By Vandna Sharma

कहानी - कथनी और करनीरोहित बहुत ही धार्मिक व्यक्ति था। सबकी सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता। मोहल्ले में उसकी गिनती एक अच्छे बेटे और अच्छे भाई के रूप में होती थी, पर वह एक अच्छा पति...

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सच By Rajeev kumar

  सच सच जानना था, सो चुपचाप हो गया। पता है, चुप होकर किसी के अन्दर से सच निकालने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। दरअसल ऐसी आग लगा दी थी, साँप-छुछुंदर वाला हाल हो गया था, न निगलते...

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મારો માધવ By ચિરાગ રાણપરીયા

મારા માધવ એટલે ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ.મારા માટે માધવ માત્ર એક ભગવાનનું નામ નથી, પરંતુ જીવનને સમજવાનો એક સુંદર માર્ગ છે. જ્યારે જીવનમાં સુખ આવે ત્યારે જે સ્મિત સાથે સ્વીકારવાનું શીખવે, દુઃ...

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प्यार की साज़िश By Bihari Lal Chouhan

प्यार की जोखिमएक रोमांटिक-सस्पेंस फिल्म की कहानीशैली: Romance | Suspense | Drama | Action | Emotionअनुमानित अवधि: लगभग 60 मिनटमुख्य पात्र:आरव — 29 वर्ष, तेज-तर्रार, ईमानदार लेकिन ज...

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બારીમાં આખું આકાશ By khush parmar

            સાંજનો સમય થયો હતો.ઘરની બારી પાસે બેસી હું પુસ્તક વાંચી રહી હતી. આકાશ માં વાદળાં ફેલાય રહ્યા હતા. રસ્તામાં છોકરાઓ રમી રહ્યા હતા.વાહનો નો અવાજ કાનમાં ખૂબ જ અસર કરતો હતો....

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जल-समाधि By Virendra Dewangan

‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोगों का चेहरा सही से नहीं आ रहा है। कैमरे में चेहरा नहीं आएगा, तो तुम्हें कौन पहचानेगा? तुम्हारा दर्द...

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मेहनत By Rajeev kumar

  घर वापसी का तो मन बना ही लिया था। अब तो जाना लगभग तय ही था। काम भी नहीं और रूपया भी खत्म।बिना रूपया का तो एक दिन भी गुजारा करना संभव है। यह बात तो कई लोगों ने समझायी थी।पिता ने भ...

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पूर्णिमा का नशा By Manoj yadav

वो पूर्णिमा की रात थी। चाँद कुछ ज़्यादा ही पास लग रहा था। आसमान भी बिल्कुल साफ़ था—जैसे किसी ने उसको धोकर रख दिया हो। मैं बालकनी में बैठा था न जाने कितनी देर से। उसकी "हाँ"...

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माटी से मुकाम तक By Bihari Lal Chouhan

माटी से मुकाम तकबिहारी और सुमति की प्रेम कहानीबरगवां गांव की कच्ची गलियों में पला-बढ़ा बिहारी चौहान गरीब जरूर था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां, पित...

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अलमारी By Vandna Sharma

सुबह के साढ़े सात बजे थे। रीना ने अदरक वाली चाय बनाकर रवि को थमाई और बहुत हिम्मत जुटाकर बोली, "सुनो, मुझे एक छोटी सी अलमारी चाहिए। मेरा कॉस्मेटिक का सामान, क्रीम-पाउडर, पर्स सब बेड...

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સાથે હોવું એટલે સાથે સમય વિતાવવો - 3 By Aloka Patel

ભાગ ૩ — રવિવારનું વચનરવિવારની સવાર કાવ્યા માટે ખાસ હતી.ઘડિયાળમાં સાત વાગ્યા હતા, પરંતુ કાવ્યા રોજ કરતાં વહેલી ઊઠી ગઈ હતી. બારીમાંથી આવતી ઠંડી હવામાં તેના વાળ હળવેથી લહેરાઈ રહ્યા હત...

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பூங்கா நட்புகள் By Ramakrishnan Anantha

அந்த நகரத்தின் ஒரு பகுதியில்.... காலை சூரியன் உதயமாக காத்துக்கொண்டு இருக்கும் பறவைகள்... அந்த பகுதியை தூய்மை செய்யும் பணியாளர்கள்... வீட்டிற்கு பால் போடும் பால்காரர்... வீட்டு வேலை...

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રાહ હૃદયની - 1 By Harsh Jethva

પ્રસ્તાવના કેટલીક વાર્તાઓની શરૂઆત મુલાકાતથી થતી નથી. કેટલીક વાર્તાઓ તો એ ક્ષણથી શરૂ થાય છે, જ્યારે કોઈ અજાણી વ્યક્તિ ભીડમાં માત્ર એક નજર માટે તમારી સામે આવે... અને પછી આખી જિંદગી મ...

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द्वितिय महायुद्ध - भाग 18 By Siddhesh Chaudhari

जून १९४० मध्ये फ्रान्सचा अत्यंत अपमानास्पद पराभव झाल्यानंतर युरोपच्या नकाशावर एक नजर टाकली, तर परिस्थिती अत्यंत भयंकर दिसत होती. पोलंड, नॉर्वे, डेन्मार्क, नेदरलँड्स, बेल्जियम आणि आ...

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मुकम्मल By Shivam Dhuriya

पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म नहीं कर पाईं। एक पुरानी नीली चूड़ी अचानक दोनों को फिर आमने-सामने ला खड़ा करती है और उन्हें एहसास हो...

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किनारा By Rajeev kumar

    जल की कलकल करती जलधारा प्रबल वेग से बढ़ रही थी। पत्थर पर जल का प्रहार लगातार हो रहा था। यहाँ-वहाँ अटकी हुई जलकुम्भी भी जकड़न से मुक्त हो बह रहा था। छोटे बच्चे बड़ी सावधानी से अपनी...

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मेरी जिंदगी का सफर 10 By Ankit Khatri

      आज मैं जहाँ हूँ… और आगे की उम्मीद हर सफर की एक शुरुआत होती है।कुछ रास्ते आसान होते हैं और कुछ रास्ते ऐसे होते हैं, जिन पर चलते हुए इंसान कई बार खुद से ही पूछता है—“मैं आखिर ज...

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बुंदकी की छींट By Deepak sharma

                 “दो रोटी आज कम क्यों खायी?”    अम्मा ने पूछा।              &n...

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भिकारी ( भाग ४) By suchitra gaikwad Sadawarte

ओम ? इथे काय करतोयस तू ? ते ही एकटाच ? ओम थोडा गोंधळून गेला होता , कदाचित घाबरला ही होता . त्याला इतका अंदाज होता सुहा ताई इकडेच कुठेतरी लपून बसली आहे . हा आवाज त्याच्या पप्पाचा हो...

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चेतना By Rajeev kumar

  किसी का मन मसोस कर रह जाना किसी के लिए बड़ी ही प्रसन्नता की बात होती है। किसी का हार जाना, न जाने क्यों जलने वालों को जीत की अनुभूति करवा देता है। क्यों किसी का कुछ बिगड़ जाना, किस...

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A Miracle of Gods Faithfulness By Mary Kondeti

It was 26 January 2022, at the peak of the COVID-19 pandemic. I was attending the online Republic Day flag-hoisting ceremony conducted by our school. It was a quiet morning, but wi...

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एहसास By Rajeev kumar

  पहले तो गुजाराभत्ता के नाम पर अड़ी रही सुहानी। मनोज अपने सामर्थ्य को देखते हुए इतनी बड़ी रकम के लिए हामी भरी थी। सुहानी और बेटी काव्या के भविष्य को लेकर चिंतीत थी और वो इस बात को ल...

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देश की शान-सेना का जवान By Piyush Goel

एक गाँव में रामसेवक नाम का किसान रहता था,बड़ा ही मेहनती, अपने परिवार में माता पिता की सेवा और अपनी खेती पर पूरा ध्यान, अपने माँ बाप के इकलौते बेटे थे।रामसेवक हमेशा यही सोचते रहते थ...

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शेवटचा संदेश By Anuja Dharane

सीता लहानपणापासूनच सुखवस्तू कुटुंबात वाढली होती.ती तिच्या आई-वडिलांची एकुलती एक मुलगी होती. आई, बाबा, आजी, आजोबा आणि घरातील प्रत्येक व्यक्ती तिच्यावर खूप प्रेम करायची. तिच्या घरात...

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टके कोस By Deepak sharma

                  “मलकिन आप को उधर बुला रही हैं,” किशोरीलाल मेरे कमरे में आन खड़ा हुआ।          &n...

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चुगली By Rajeev kumar

      शनैः शनैः गतिरोध बढ़ता जा रहा था। गतिरोध तन का नहीं, बल्कि गतिरोध मन का बढ़ता जा रहा था। वो तो शिथील सी चाल से चल रहा था लेकिन उसकी इच्छाएं मानो विमान पर सवार हो। शारिरिक परेशा...

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एक माँ का संकल्प By Piyush Goel

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम है...

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बाबूजी की हिचकी By Deepak sharma

                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                &nb...

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ख़ुशी By Piyush Goel

सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का...

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घुमक्कड़ By Rajeev kumar

घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धी...

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चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं By Shivam Dhuriya

चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे।
यह कोई तन्हाई नहीं,...

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The Night of the Brahma Kamal By Deep Parekh

Kavya had walked for eleven days to reach Hemkund.Her grandmother used to say that the Brahma Kamal bloomed only once a year, only at night, and only for those patient enough to si...

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रिकवरी एजेंट By Rajeev kumar

    अफरातफरी मचते ही लोग सिर पर पाँव रख कर भागे। लोगों के कदमों की तेज ध्वनी गुंजायमान थी। कम्पन ऐसा हो रहा था मानो धरती काँप रही हो। कदमों को कहाँ मालूम था कि कुचला जाने वाला आदमी...

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इन्तजार By Rajeev kumar

. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकार...

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नाम बदलाई By Deepak sharma

                   उन्हें अपना पहला नाम, हीरालाल, 15 मार्च 1909 को मिला था। जब वह लाला मगनलाल  के घर पैदा हुए थे।   &nbs...

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શક - સંબંધને અંદરથી ખોખલો કરતી ઉધઈ By Anuradha

શક — સંબંધને અંદરથી ખોખલો કરતી ઉધઈશક પણ એક ઉધઈ જેવો હોય છે…દેખાતો નથી, અવાજ કરતો નથી,પણ ધીમે ધીમે સંબંધને અંદરથી ખાઈ જાય છે.ક્યારેક જીવનમાં એવી વ્યક્તિ મળે છે, જે આપણને માત્ર પ્રેમ...

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અંતહીન શાંતિની શોધ: રાજકુમારી અને યોગેશ્વરનો સંવાદ By Sicret super Star

પ્રકરણ ૧: નવી શાંતિ અને નવો સંશયમહારાજ વિક્રમસેનની પુત્રી, રાજકુમારી દેવાંશીના જીવનમાં લાંબા સમય પછી એક એવી સવાર આવી હતી જે ચિંતામુક્ત હતી. તેના જીવનના વમળો, રાજકીય કટોકટીઓ અને અંગ...

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ભાઈબંધ By ચિરાગ રાણપરીયા

શહેરના એક નાનકડા વિસ્તારમાં પાંચ મિત્રો રહેતા હતા—ચિરાગ, રવિ, કૌશલ, કૃણાલ અને રોહિત. પાંચેયની ઉંમર લગભગ સરખી હતી, પણ સ્વભાવ એકબીજાથી સાવ અલગ.ચિરાગ શાંત અને સમજદાર હતો. કોઈ મુશ્કેલી...

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പണിക്കരു സാറും ചൂരലും പിന്നെ ഞാനും By aNil Madhavan

പണിക്കരു സാറും ചൂരലും പിന്നെ ഞാനുംഅഞ്ചാം ക്ലാസ്സിൽ ചേരുന്നത് ഒരു പുതിയ സ്കൂളിലാണ്. പുതിയ സ്കൂൾ പുതിയ കൂട്ടുകാർ.  അച്ഛന്റെ കുടുംബം വക ആയിരുന്നു ആ സ്‌കൂളിരിക്കുന്ന സ്ഥലവും അതിനോട് ചേ...

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कथनी और करनी By Vandna Sharma

कहानी - कथनी और करनीरोहित बहुत ही धार्मिक व्यक्ति था। सबकी सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता। मोहल्ले में उसकी गिनती एक अच्छे बेटे और अच्छे भाई के रूप में होती थी, पर वह एक अच्छा पति...

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सच By Rajeev kumar

  सच सच जानना था, सो चुपचाप हो गया। पता है, चुप होकर किसी के अन्दर से सच निकालने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। दरअसल ऐसी आग लगा दी थी, साँप-छुछुंदर वाला हाल हो गया था, न निगलते...

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મારો માધવ By ચિરાગ રાણપરીયા

મારા માધવ એટલે ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ.મારા માટે માધવ માત્ર એક ભગવાનનું નામ નથી, પરંતુ જીવનને સમજવાનો એક સુંદર માર્ગ છે. જ્યારે જીવનમાં સુખ આવે ત્યારે જે સ્મિત સાથે સ્વીકારવાનું શીખવે, દુઃ...

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प्यार की साज़िश By Bihari Lal Chouhan

प्यार की जोखिमएक रोमांटिक-सस्पेंस फिल्म की कहानीशैली: Romance | Suspense | Drama | Action | Emotionअनुमानित अवधि: लगभग 60 मिनटमुख्य पात्र:आरव — 29 वर्ष, तेज-तर्रार, ईमानदार लेकिन ज...

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બારીમાં આખું આકાશ By khush parmar

            સાંજનો સમય થયો હતો.ઘરની બારી પાસે બેસી હું પુસ્તક વાંચી રહી હતી. આકાશ માં વાદળાં ફેલાય રહ્યા હતા. રસ્તામાં છોકરાઓ રમી રહ્યા હતા.વાહનો નો અવાજ કાનમાં ખૂબ જ અસર કરતો હતો....

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जल-समाधि By Virendra Dewangan

‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोगों का चेहरा सही से नहीं आ रहा है। कैमरे में चेहरा नहीं आएगा, तो तुम्हें कौन पहचानेगा? तुम्हारा दर्द...

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मेहनत By Rajeev kumar

  घर वापसी का तो मन बना ही लिया था। अब तो जाना लगभग तय ही था। काम भी नहीं और रूपया भी खत्म।बिना रूपया का तो एक दिन भी गुजारा करना संभव है। यह बात तो कई लोगों ने समझायी थी।पिता ने भ...

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पूर्णिमा का नशा By Manoj yadav

वो पूर्णिमा की रात थी। चाँद कुछ ज़्यादा ही पास लग रहा था। आसमान भी बिल्कुल साफ़ था—जैसे किसी ने उसको धोकर रख दिया हो। मैं बालकनी में बैठा था न जाने कितनी देर से। उसकी "हाँ"...

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माटी से मुकाम तक By Bihari Lal Chouhan

माटी से मुकाम तकबिहारी और सुमति की प्रेम कहानीबरगवां गांव की कच्ची गलियों में पला-बढ़ा बिहारी चौहान गरीब जरूर था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां, पित...

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