इस कहानी का शीर्षक "कमसिन" है, जिसे सीमा असीम सक्सेना ने लिखा है। कहानी में मुख्य पात्र राशि है, जो अपने पूर्व प्रेमी रवि को एक होटल में देखती है। वह और उसके दोस्त पिंकी और बिट्टू होटल के मेन्यू में खाने की चीजें देख रहे होते हैं, तभी राशि की नजर रवि पर पड़ती है। उसे रवि की उपस्थिति से खुशी होती है, लेकिन वह साथ में एक महिला और एक मोटे आदमी को भी देखती है, जो रवि के साथ हैं। राशि के मन में कई भावनाएँ उमड़ती हैं; वह अपनी पुरानी यादों में खो जाती है और सोचती है कि रवि से अलग होने के पीछे कोई मजबूरी रही होगी। वह अपने प्यार को महसूस करती है और यह जानती है कि रवि भी उसे प्यार करते थे। वह रवि को देखना चाहती है ताकि उसे यह एहसास हो सके कि वह अभी भी जिंदा है। कहानी में यह भी दर्शाया गया है कि कैसे रवि ने मंदिर में जाकर नमन किया, जबकि वह पहले ईश्वर में विश्वास नहीं करते थे। यह एक भावनात्मक यात्रा है, जहाँ राशि अपने खोए हुए प्यार के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करती है। अंत में, जब उसे अपने दोस्तों से पूछा जाता है कि वह क्या सोच रही है, तो यह संकेत मिलता है कि उसकी भावनाएँ अभी भी जिंदा हैं। कमसिन - 33 - लास्ट by Seema Saxena in Hindi Love Stories 33.5k 3.1k Downloads 10.4k Views Writen by Seema Saxena Category Love Stories Read Full Story Download on Mobile Description पिंकी और बिट्टू जो मैन्यू कार्ड में खाने की चीजें देख रहे थे वे एकदम से उसकी तरफ देखने लगे, कौन रवि? राशि का ध्यान अभी भी बाहर की तरफ ही लगा था, उसने उन लोगों के प्रश्न को भी शायद नहीं सुना था। पिंक कलर की शर्ट और ब्लैक रंग की पैंट, चेहरे पर वहीं मुस्कुराहट। रवि यहां पर वो पहली बार इस होटल में रवि के साथ ही खाने आई थी। और आज फिर रवि, कहीं धोखा तो नहीं खा रही है उसकी आंखे। वो भाग कर नीचे रवि के पास पहुंच जाना चाहती थी ताकि छूकर देख सके। उसने खुद को चिकोटी काटी कहीं ख्वाब में तो नहीं है वो। नहीं ख्वाब नहीं । ये सच है, हकीकत है। तीन महीने पहले गुजरे पल एक एक कर आंखों में घूम गये। रवि पहले से कुछ कमजोर दिख रहे थे, साथ में कोइ्र महिला लाल रंग की साड़ी में। Novels कमसिन न तौलना, न मापना, न गिनना कभी हूँ गर्भगृह में समाया निशब्द, निश्छल, निस्वार्थ, अडिग पवित्र प्रेम मैं ! ! होस्टल के कमरे में मनु ने हिलाकर उसे जगा... More Likes This ये कहाँ आ गए हम - 3 by Shristi Tiwari मैं दादा-दादी की लाड़ली - 2 by sapna बिना देखे प्यार - 1 by mahadev ki diwani वेलेंटाइन- डे, एक अधूरी शुरुआत - 1 by vikram kori BL Live story - 1 by PAYAL PARDHI बिल्ली जो इंसान बनती थी - 1 by Sonam Brijwasi The Monster Who Love Me - 1 by sheetal Kharwar More Interesting Options Hindi Short Stories Hindi Spiritual Stories Hindi Fiction Stories Hindi Motivational Stories Hindi Classic Stories Hindi Children Stories Hindi Comedy stories Hindi Magazine Hindi Poems Hindi Travel stories Hindi Women Focused Hindi Drama Hindi Love Stories Hindi Detective stories Hindi Moral Stories Hindi Adventure Stories Hindi Human Science Hindi Philosophy Hindi Health Hindi Biography Hindi Cooking Recipe Hindi Letter Hindi Horror Stories Hindi Film Reviews Hindi Mythological Stories Hindi Book Reviews Hindi Thriller Hindi Science-Fiction Hindi Business Hindi Sports Hindi Animals Hindi Astrology Hindi Science Hindi Anything Hindi Crime Stories