Shayri - 3 by pradeep Kumar Tripathi in Hindi Poems PDF

शायरी - 3

by pradeep Kumar Tripathi in Hindi Poems

1. गज़लतुम को अपनी जाने वफ़ा मानता है दिल।तुम हिं हो बेवफा ये जनता है दिल।।तुम को अपनी....तुमने दिया जो धोखा तो क्या गलत किया।दिखावे के प्यार को तो पहचानता है दिल।।तुम को अपनी.....तुम हो हसीन दिलरुबा जानेंजा जाने ...Read More