कहानी "डॉमनिक की वापसी" में शिमोर्ग अपने चारों ओर के पहाड़ों की हरियाली को देखकर अपने बचपन की होली के रंगों को याद करती है। उसे लगता है कि ये पहाड़ और उसके पिता का रंग उसके मन में गहराई तक बैठा हुआ है। वह मंडी में अपने पुराने थिएटर ग्रुप के ऑडिटोरियम में बैठी है, लेकिन आज उसका मन वहां नहीं लग रहा। वह विश्वमोहन का इंतज़ार कर रही है और उसे सब कुछ खोखला लग रहा है। शिमोर्ग ने नई कार से यात्रा की है, जो उसे पिछले अनुभवों की याद दिलाती है। वह 'मैन्डी हिल्स' रेस्त्रां के पास रुकी है, जहां उसे कुछ स्थायी चीज़ें याद आती हैं। आज वहां सन्नाटा है, और वह अतीत में लौटने या उससे विदा लेने की दुविधा में है। उसके मन में पहले कभी इतनी दुविधा नहीं रही है, और वह आगे बढ़ने से पहले अपने अतीत को देखने की कोशिश कर रही है। डॉमनिक की वापसी - 32 by Vivek Mishra in Hindi Love Stories 1.3k 2k Downloads 8.1k Views Writen by Vivek Mishra Category Love Stories Read Full Story Download on Mobile Description शिमोर्ग को आज अपने चारों ओर पहाड़ों का हरा रंग देखकर बचपन की होली याद आ रही थी, ऐसा ही गहरा रंग पोत देते थे, एक दूसरे के मुँह पे, कई-कई बार धोने पर भी नहीं उतरता, लगा रह जाता था, कानों और नथुनों के किनारों पर। शिमोर्ग के सोने की आभा लिए गोरे रंग पर वह कई दिनों तक चढ़ा रहता। जब तक रंग पूरी तरह उतर नहीं जाता, माँ उससे बात तक नहीं करती और पिताजी हमेशा माँ के लाख मना करने पर भी वही रंग लाकर देते। गहरा हरा रंग। बहुत पक्का रंग होता था, तब। बिलकुल हिमाचल के पहाड़ों पर फैली इस हरियाली की तरह। पिता कहते थे इन पहाड़ों का रंग एक बार चढ़ जाए, तो फिर आसानी से नहीं उतरता, गहरे तक मन-साँस में बैठा रहता है. उनकी पंक्तियाँ- ‘बस साँस एक गहरी साँस अपने मन की एक पूरी साँस हरियाली की हरी साँस अपनी माटी में सनी साँस’ जैसे आसपास की हवा में तैर रही थीं.. Novels डॉमनिक की वापसी वो गर्मियों की एक ऐसी रात थी जिसमें देर तक पढ़ते रहने के बाद, मैं ये सोच के लेटा था कि सुबह देर तक सोता रहूँगा। पर एन उस वक़्त जब नींद सपने जैसी किसी ची... More Likes This गलतफहमी का खून - 1 by Hindi kahaniyan बेजुबान इश्क - (सीजन 2) by soni कशिश - ए अहसास वह प्यार का - 1 by sumit kushwah खामोशी की धुन - 1 by Anime Toons समर्पण से आंगे - 1 by vikram kori पहली नजर का पहला प्यार by PAYAL PARDHI कुछ पल अनजाने से - भाग 1 by Gunjan Banshiwal More Interesting Options Hindi Short Stories Hindi Spiritual Stories Hindi Fiction Stories Hindi Motivational Stories Hindi Classic Stories Hindi Children Stories Hindi Comedy stories Hindi Magazine Hindi Poems Hindi Travel stories Hindi Women Focused Hindi Drama Hindi Love Stories Hindi Detective stories Hindi Moral Stories Hindi Adventure Stories Hindi Human Science Hindi Philosophy Hindi Health Hindi Biography Hindi Cooking Recipe Hindi Letter Hindi Horror Stories Hindi Film Reviews Hindi Mythological Stories Hindi Book Reviews Hindi Thriller Hindi Science-Fiction Hindi Business Hindi Sports Hindi Animals Hindi Astrology Hindi Science Hindi Anything Hindi Crime Stories