moulik sher - 2 by Deepak Bundela AryMoulik in Hindi Poems PDF

मौलिक शेर - 2

by Deepak Bundela AryMoulik in Hindi Poems

मौलिक 'शेर' पार्ट -241. इस चेहरे की नज़ाकत को यूं ना रखो हिज़ाब में.. ! ये बिजली हैं जो रुक ना सकेगी नकाब में... !!42. हमें वेबफ़ाई की बाजीगरी नहीं आती... ! और तुम्हें बफाई ...Read More