Aughad ka daan - 3 by Pradeep Shrivastava in Hindi Social Stories PDF

औघड़ का दान - 3

by Pradeep Shrivastava Verified icon in Hindi Social Stories

औघड़ का दान प्रदीप श्रीवास्तव भाग-3 ‘हूं .... तुम्हारी सोफी की ज़िंदगी में बड़े पेंचोखम हैं। मायका-ससुराल नाम की कोई चीज बची नहीं है। ले दे के जुल्फ़ी और जुल्फ़ी है। और वो इसी का फ़ायदा उठा रहा है।’ ...Read More