Mukhbir - 27 by राज बोहरे in Hindi Social Stories PDF

मुख़बिर - 27

by राज बोहरे in Hindi Social Stories

मुख़बिर राजनारायण बोहरे (27) फिरौती अगले दिन में किस्सा सुनाने का मन बना रहा था कि यकायक रघुवंशी ने पूछा -‘‘ तुम कितनी फिरौती दे आये थे -गिरराज !‘‘ ‘‘ कतई नहीं साहब, एकऊ रूपया ना दियो हमने !‘‘ ...Read More