sirf tum - 2 by Sarita Sharma in Hindi Poems PDF

सिर्फ तुम.. - 2

by Sarita Sharma in Hindi Poems

दिन बीत रहे हैं बोझिल से,मेरे हर दिन के,हर हिस्सों मे तुम सुर्ख़ियों में हो,मैं गुमनाम कहीं खोयी हूं,गुमनामी के अंधेरों में..तुम मशहूर हो रहे हो,मेरी दुनिया के बाज़ारो में..मैं हर दिन मिट रही हूँ,जैसे हर रोज़ सूरज अस्त ...Read More