Bazar by Ajay Amitabh Suman in Hindi Poems PDF

बाजार

by Ajay Amitabh Suman Verified icon in Hindi Poems

1.बाजार झूठ हीं फैलाना कि,सच हीं में यकीनन,कैसी कैसी बारीकियाँ बाजार के साथ।औकात पे नजर हैं जज्बात बेअसर हैं ,शतरंजी चाल बाजियाँ करार के साथ। दास्ताने क़ुसूर दिखा के क्या मिलेगा,छिप जातें गुनाह हर अखबार के साथ।नसीहत-ए-बाजार में आँसू ...Read More