Seeta - Ek naari - 5 by Pratap Narayan Singh in Hindi Poems PDF

सीता: एक नारी - 5

by Pratap Narayan Singh in Hindi Poems

सीता: एक नारी ॥पंचम सर्ग॥ संतप्त मन, हिय दाह पूरित, नीर लोचन में लिएमुझको विपिन में छोड़करलक्ष्मण बिलखतेचल दिए निर्लिप्त, संज्ञा शून्य, आगे लड़खड़ाते वे बढ़ेउठते नहीं थे पाँव, रथ पर अति कठिनता से चढ़े रक्षार्थ खींचा था, गमन ...Read More