Seeta - Ek naari - 6 by Pratap Narayan Singh in Hindi Poems PDF

सीता: एक नारी - 6

by Pratap Narayan Singh in Hindi Poems

सीता: एक नारी ॥ षष्टम सर्ग॥ कितने युगों से अनवरत है सृष्टि-क्रम चलता रहाइस काल के अठखेल में जीवन सतत पलता रहा गतिमान प्रतिक्षण समय-रथ, पल भर कभी रुकता नहींसुख औरदुःख भीमनुज-जीवन-राह मेंटिकता नहीं उल्लास के दिन बीतते, कटती ...Read More