Ek-Apreshit-Patra - 6 by Mahendra Bhishma in Hindi Letter PDF

एक अप्रेषित-पत्र - 6

by Mahendra Bhishma Matrubharti Verified in Hindi Letter

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म कर्कशा ‘‘जवानी में दो—दो भोग चुकने के बाद अब बुढ़ापे में तीसरी करने की मंशा है क्या?‘‘ कृशकाय—कंकाल स्वरूपा पत्नी की कर्कश आवाज सुनकर प्रोफेसर साहब को काठ—सा मार गया। उनकी पत्नी की तनी भृकुटि ...Read More