मृगतृष्णा--भाग(५) - अंतिम भाग

by Saroj Verma Matrubharti Verified in Hindi Love Stories

शाकंभरी, राजलक्ष्मी के विचार सुनकर घोर चिंता में डूब गई, राजलक्ष्मी की इन गूढ़ बातों का शाकंभरी के पास कोई उत्तर ना था और ये सारी बातें महाराज अमर्त्यसेन भी सुन रहे थे।। आते-जाते अपार की दृष्टि शाकंभरी ...Read More