NAISARGIK SUKH by rajendra shrivastava in Hindi Short Stories PDF

नैसर्गिक सुख

by rajendra shrivastava in Hindi Short Stories

लघु कथा-- नैसर्गिक सुख --राजेन्‍द्र कुमार श्रीवास्‍तव ‘’कल्‍लो....कल्‍लो...।‘’ चिल्‍लाते-चिल्‍लाते, मेरी पत्नि धड़धड़ाते हुई, मेरे पास आकर पूछने लगी, ‘’कहॉं है कल्‍लो!ˆ मेरे उत्‍तर की परवाह किये बिना वह घर में ही भड़-भड़ाकर ढूँढने ...Read More