पीढ़ी की पीड़ा बादामी

by padma sharma in Hindi Poems

मुझे हतप्रभ छोड बादामी तो एक झटके से बाहर निकल गई लेकिन मैं उसके शब्दों के अर्थ खोजने लगी थी। उसकी बातें दुगने बेग से मेरे विचारों पर छाती चली गई। दूसरी औंरतों से कुछ अलग व्यक्तित्व है इसका ...Read More