meri kavita sangrah - 3 by Prahlad Pk Verma in Hindi Poems PDF

मेरी कविता संग्रह भाग 3

by Prahlad Pk Verma in Hindi Poems

कविता 1stमिट न सके वो फ़साने??????????मिट न सके वो फसानेरह गई यादेसपनों में कर गई बातेइश्क में सब रह जाते है अफसानेहो जाती हैं मिट्ठी मिट्ठी बातेकरनी पड़ती हैं मुलाकातेतड़पना पड़ता है ख्वाबों मेंअश्क रह जाते हैं आंखों मेंदिल ...Read More