गीता के रतन ( कविता संग्रह )

by Geeta Kaushik Rattan in Hindi Poems

1• कविता----"मोह-जाल" आज अचानक चली आई फिर, याद तुम्हारी द्वार प्रिये। बिखर पड़ी अश्रुजल धारा, गई क्यूँ हिम्मत हार प्रिये।। सब भाव जोड़ मन चितवन के, करके सब संचित अनुराग। कभी चित्रकार कभी शिल्पकार बन, रही जोड़ती ...Read More