Yaadon ke ujale - 3 by Lajpat Rai Garg in Hindi Love Stories PDF

यादों के उजाले - 3

by Lajpat Rai Garg Matrubharti Verified in Hindi Love Stories

यादों के उजाले लाजपत राय गर्ग (3) ‘रवि, तुम्हारी इस बात का क्या जवाब दूँ, कुछ सूझ नहीं रहा। मैं तो नि:शब्द हो गया हूँ।’ कुछ समय के लिये चुप्पी रही। फिर जैसे कुछ स्मरण हो, उसने कहा - ...Read More