jag utha he re insan by Bhavesh Lakhani in Hindi Poems PDF

जाग उठा है रे इन्सान

by Bhavesh Lakhani in Hindi Poems

** जाग उठा है रे इन्सान ** जाग उठा है रे इन्सानभगा दे अपने अंदर का शैतानछिपा है तुजमे अखुट ज्ञानयही है तेरी सच्ची पहेचानइसलिए तू है सबसे महान महेलो का तू होगा दिवानदीवारों के भी होते है कानतोल ...Read More