hamre pas kitana kam samaya hai by कृष्ण विहारी लाल पांडेय in Hindi Poems PDF

हमारे पास कितना कम समय है

by कृष्ण विहारी लाल पांडेय in Hindi Poems

केबीएलपांडेकेगीत गीत हमारेपासकितनाकमसमयहै डालपर अब पक न पातेफल हमारेपासकितनाकमसमयहै कौनमौसमकेभरोसेबैठताहै चाहतोंकेलिएपूरीउम्रकमहै मंडियांसंभावनाएंतौलती है स्वादकेबाजारकाअपनानियमहै मिट्ठूओ कावंशहैभूखा यहांतकआगये दुर्भिक्षभयहै डालपरअब पक नपातेफलहमारेपासकितनाकमसमयहै हरेबनकेसिर्फकुछविवरणबचेहैं भरीमठमेंलीउदासीक्यारियोंमें आगकीबातेंहवामेंउड़रहीहैं आजठंडीहोरहीजिनगाड़ियोंमें वहइससेक्यासारणिकलेगा यहांपरआरंभसेनिसकरसकताहै डालपर अब पक न पातेफल हमारेपासकितनाकमसमयहै वहांजानेक्याविवेचनचलरहाहै सभी केवक्तव्यबेहदतीखे ...Read More