Sirf Tum.. - 5 by Sarita Sharma in Hindi Poems PDF

सिर्फ तुम.. - 5

by Sarita Sharma in Hindi Poems

सिर्फ तुम-5 चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएँ, फिर से किसी मोड़ पर मिलें, और फिर से दिल हार जाएं... पर इसबार जो मिलेंगे तो इतना समझा देना, मैं नहीं हूं तुम्हारे जैसी बस इतना समझ जाना.. ...Read More