कर्मण्येवाधिकारस्ते

by Annada patni in Hindi Poems

कर्मण्येवाधिकारस्ते अन्नदा पाटनी छिटक कर आती वातायन से किरणें सूरज की, कमरे की दीवार पर बनाती हुई एक आकृति अंगूठे की जैसे चिढ़ा रही हो सिंगट्टा “होगे तुम बड़ी साख वाले, ...Read More