bhale ruth kar shap de shap sahne ka vardan do by कृष्ण विहारी लाल पांडेय in Hindi Poems PDF

भले रूठ कर शाप दे, शाप सहने का वरदान दो

by कृष्ण विहारी लाल पांडेय in Hindi Poems

भले रूठ कर शाप देते रहो प्रिय, मगर शाप सहने का वरदान दे दो। अभी तो बहुत देर है जबकि तम चीर सूरज धरा पर उजाला करेगा, अभी तो बहुत देर है जबकि शशि दीप नभ में सितारों ...Read More