Poems by Amrita Sinha in Hindi Poems PDF

कविताएँ

by Amrita Sinha in Hindi Poems

1*माँकाबरगदहोना—-++————माँजोकभीबरगदसीथीं,हरतरफअबव्हीलचेयरपरबैठीहैं,सिमटकरनबोलना,नचलना,नखानाबसदेखतीजातीहैंएकटक,निहारतीरहतीहैंअपलकजैसेपूरीदेहकादर्द,तरलहोसमागयाहोआँखोंमेंबहुतकुछकहतीहैंआँखेंउनकीफिरभी,नहींकहपातींकुछऔरछूटजाताहैसबअनकहा।इतनीअवश,निरीहऔरअसहायतोकभीनहींथींमाँउनकीगूँजतीआवाज़बेसाख़्ताखनकतीहँसीजैसेचस्पाँकरदियाहैकिसीनेदीवारोंपर,छतपरछितरातीतुलसीकेपत्तोंपर,फूलोंकेगमलोंपरशायद,तभीआँखेंमूँदकरभीसुनसकतीहूँमाँकीवोदमदारआवाज़,हँसीकीगूंजहवामेंदेरतकतैरतेशब्दपूजाकीघंटीकीटुनटुनाहटऔरअगरूधूमसेसुवासितमंत्रोच्चार।कौंधजाताहैअबभीअक्सरओंकारउच्चारितकरतामाँकास्वरकभीसुनाईपड़तीहैउनकीडाँट-फटकारकभीप्यारसेपुकारतीहैंनाममेरामैंज़राभीस्वीकारनानहींचाहतीकिमाँअबघिरीहुईहैंकृत्रिममशीनोंसेनलियोंसे,दवाइयोंकीछोटीबड़ीशीशियोंसेइनसारीदवाइयोंकेतीव्रगंधऔरमशीनोंकेमॉनिटरपरउठतीगिरतीरेखाएँ,बेहदडरातीहैंमुझे।माँकामोबाइलनंबरअबभीजसकातसहैमेरेफ़ोनमेंअबभीक़रीब-क़रीबहरदिनबजताहैरिंगटोनफ़्लैशहोताहैमाँकानामस्क्रीनपरबातेंभीहोतीहैंइसीनंबरपरबसफ़र्क़यहीहोताहैकिमाँकीआवाज़नहींहोती,उसतरफ़।माँकीइसटीसकोमहसूसकरचुपरहनाचाहतीहूँएकपूरेदिनयहीसोचकरकिमेरेकंठमेंभीआवाज़नहींहैपरकुछहीघंटोंमेंछटपटाकरअकुलाहटमेंचीखनेलगतीहूँज़ोरोंसेऔरअपनीपलकोंसेसोखलेनाचाहतीहूँमाँकीअव्यक्तपीड़ा,अनकहादर्द।परमैंबिसारनहींपातीमाँकीखोईआवाज़कोभूलेशब्दोंकोमशीनोंकीकृत्रिमताकोनिश्चयहीमाँकाहोनानेमतहै,जानतीहूँकिमाँहैंबावजूदइसकेढूँढतीहूँमाँकोअपनेआसपासउनकेहोनेकोचाहतीहूँफिरसेआजायेचेहरेपरउनकेवहीपुरानाभावमीठीसीमुस्कुराहटऔरएकअददआवाज़।2* डूबनाप्रेममें-----------प्रेमकीपुख़्ताकिन्तु कुछखुरदुरीपथरीलीज़मीनऔरलहुलुहानमनस्मरणकररहाकृष्ण-प्रेममेंलीनबेसुधमीरा कोकियाजिसनेसहजहीविष-पानप्रेमकीपराकाष्ठा!हलाहलकाप्यालाछलकताहुआआँखेंमूँदकरपीनाहोगातुम्हेंभीतबनीलकंठेश्वरकहलाओगेतुमहमारेप्रेमकाआग़ाज़भीयहीहोगाअतृप्तआत्मागोतालगातीउदात्तनदीसीप्रेममेंलिपटीआसमानमेंअपनीप्रेयसकानामउकेरतीचखनाचाहतीहैप्रेमकोबननाचाहतीहैसुर्ख़लालकभीआसमानीबाँहोंमेंसमेटेढेरोंचाँदनीगुनगुनानाचाहतीहैकोईसुरीलासंगीतआवेगोंकेसाथबिनाकिसीशर्तकेक्योंकिप्रेमकभीप्रतिदाननहींमाँगता।~~~~~~॰~~~~~3*कुकुरमुत्ते——————कोयलेखदानकेआस-पासरहतीहैंयेमेहनतकशऔरतें,करतीहैंकाम,ढोतीहैं,ईँट-गारे,पत्थर,कोयला,कभीलोहा-लक्कड़ढोतीहैंबोझाहोंठों पेलियेमुस्कानमेहनतकशऔरतेंबाँधतीहैं,बड़ेसलीक़ेसेसाड़ीअपनीऔरबाँधतीहैंछौनेकोभीअपनेअपनीछातीसेचिपकाकरबड़ेसूक़ूनसेसोताहैदूधमुँहाबच्चामाँकीदेहसेखींचकरऊष्माधूल,मिट्टी,दुनियाँकीकर्कशआवाज़ोंसेबेख़बर।पैरोंकीफटीबिवाईकीपीरछुपायेपत्थरसीखुरदुरीहथेलीसेटेरतीजातीहैंचेहरेपरजमीसमयकीमोटीगर्दढोतीजातीहैंमाथेपरजीवनकेअसंख्यबोझऔरझाड़तीजातीहैंदेहऔरउसपरचिपकी,फँसीपड़ी,हैवानोंकीकईजोड़ीआँखेंजोसिर्फचिपकतीहीनहींभेदजातीहैंदेहको।येवहीऔरतेंहैं,जिनकीदेहमेंहमढूँढतेहैंकला,मिलतींहैंयेकभीबी॰प्रभाकीपेंटिंगमेंकभीहमेंइनमेंदिखतीहैझलकमोनालिसाकी,तोकभीगजगामिनीकी।बड़ीबेफ़िक्रीसेमुस्कुरातीहैंयेऔरतेंदोसाँवलेहोंठोंकेबीचफँसेसुफ़ेदझक्क़मोतीसेदाँतजैसेकईसफ़ेदकबूतरबैठेंहोंपंक्तिबद्धडरतीहैंयेकिसुनकरज़ोरोंकीहँसीइनकीकहींयेसफ़ेदकबूतरउड़करसमानाजायेंनीलेआसमानमें।शायदतभीहँसतीहैंयेहौले-हौलेकाँधेपरलालगमछालिए।खोलतीहैंअपनेखानेकाडिब्बानिकालतीहैँचाँदसीगोलरोटियाँधरतीहैंउसपरभरवाँमिर्चकेअचारऔरकच्चेप्याज़।तोड़तीहैंनिवालेऔरदेखतीहैं,एकटक,एकहीजगह,गड़ातीहुईनज़रधरतीपर।सोचतीहैं-औरतऔरधरतीकच्चीगीलीमिट्टीहीतोहैं!गिरतेहीबीजजहाँअँखुआजातेहैंऔरउगआतेहैंबिरवे,पल्लवितहोतेहैंप्रेमउगतेहैंसपने।औरसोचतीहैंयेभीकिग़रीबोंकेसपनेहोतेहैंबड़ेबेमुरव्वतफिसलकरआँखोंसेसीधेसमाजातेहैंयातोगोबरकीढेरमेंयाफिरभीगीगीलीमिट्टीकेदलदलमेंऔरतबवहाँउगआतेहैंअनगिनखरपतवार,जंगलीघासयाफिरढेरोंकुकुरमुत्तेपरवेभूलतीनहींऔरढूँढकरपहचानहीलेतीहैंअपनेसपनोंकोमुलायमकुकुरमुत्तोंकीशक्लमें।4 * विरहमन-------भीड़हुजूम,लोगोंकाभीड़सेघिरेतुमऔरएकांतकीटोहमेंमुंतज़िरमैं,अपनीदुखतीपीठएकउदासदरख़्तसेटिकाए,बड़ेबेमनसेउबाऊदिनकीसलाइयोंपरबुननेलगीहूँकुछख्वाबअतीतकोउधेड़तीभविष्यबुनतीवर्तमानकेकंधेपरसररखकरतीहूँ,इंतज़ारकिकबभीड़छटेएकांतमिलेऔरमिलोतुममुझसेअपनीउदात्तरागलियेपूरेआवेगकेसाथहोंआलिंगनबद्धहमलरजतेहोंठऔरगूँगेशब्दोंकीआड़में।फूटकरबहनिकलूँमैंपकेघावकीपीवसीताकिडूबसकोतुमउसकीलिजलिजीमवादमेंऔरमहसूसकरसकोमर्ममेरेविरहमनका।सोखसकोअपनीगीलीपलकोंसेगिन-गिनपीरमेरा,जैसेचुगताहैपंछीदाना,,,,एक-एक।मेरीकराहपरमेरीआहपरतुम्हारेप्यारकीफूँकनर्मसेमलकीफाहोंसीमख़मलीमरहममेंलिथड़ापूराजिस्मतुमफैलोमेरीदेहपरपसरतेकिसीतरलसेचूमतेमेरेकानोंकीलौकोबरसोतुमसावनकीकिसीपहलीफुहारसे।निर्बाधबहोतुमशुष्क,पपड़ीपड़े,सर्दहोंठोंकेकोरोंतकसूखापड़ाहैजोअबतकगहरेशापितकुँएसा।धँसजाओमेरेमनकेहरेदलदलमेंताकिढहतीदीवारोंसेझरतेस्वप्न,ठहरजायेंठिठककरऔरबचजायेंपिघलनेसेवेसारेनमकीनपहाड़जोउगआयेहैंमेरीआँखोंकेआँगनमें,प्रेमकेउगतेसूरजकेसाथ।कभीखोलूँमैंभीअपनेघरकीजंगातीखिड़कियाँऔरसुनूँबाहरीहवाकीसुरीलीतानक्योंकिअरसाबीतगयाकोईरागडूबीनहींसुरसंध्याकेरंगमें।पर,ऐसातोतबहोजबभीड़हटेतमछटेएकांतमिलेतुमबनोहरे-भरेदरख़्तऔरमैंलिपटूँतुमसेलतासीअमरबेलबन,,,,,!पर,ऐसातोतबहोजबभीड़छटे,,,,,,एकांतमिले,,,,!5 *वजूद———येचुप्पी,येउदासी,येमौन,जानेकहाँबहालेजातीहैकभीसमंदरकेअतलमेंकभीनिर्बाधगगनमेंगुमनदीकीअजस्त्रधारापरजैसेबहतीजातीहोअकेलीनावबग़ैरकिसीनाविकबहतीजातीहैबेलौसहवाकेरुख़केसाथकभीहवाकेविरूद्धनिपटअकेली,निस्संगबग़ैरकिसीकिनारेबिनाकिसीठौरकीचाहलिएकिन्तुनावकोतयकरनाहीहोगाकिबंधेकिसीखूंटेसेयायूँहीबेरोकटोकबहतीरहेलहरोंकेसाथछिटककरयहाँ-वहाँकरतीरहेअठखेलियांशायदजबाबमेंउसकावजूदअहमहोक्योंकिनावकिनारेसेज़्यादापानाचाहतीहैपानीकेबहावको।—अमृतासिन्हा