Khaam Raat - 4 by Prabodh Kumar Govil in Hindi Classic Stories PDF

ख़ाम रात - 4

by Prabodh Kumar Govil Matrubharti Verified in Hindi Classic Stories

- उसे ज़रूर किसी की नज़र लग गई। मैडम ने कुछ सहज होकर कहा। मैं अपनी पलकें मूंद कर बैठ गया और उनकी बात सुनने लगा। वो कहती गईं, लगातार। जैसे किसी रुकी हुई नहर को बहाव का रास्ता ...Read More