Vaishya ka bhai - 17 by Saroj Verma in Hindi Classic Stories PDF

वेश्या का भाई - भाग(१७)

by Saroj Verma Matrubharti Verified in Hindi Classic Stories

दोनों का खाना बस खत्म ही हो चुका था कि तभी बुर्के में सल्तनत उनके पास आ पहुँची सल्तनत को देखते ही मंगल बोला.... अरे,बहु-बेग़म! आप ! यहाँ और इस वक्त... हाँ! हमें आना ही पड़ा,हम ये कहने आए ...Read More


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