dialogue with oneself by Alok Mishra in Hindi Poems PDF

संवाद खुद का खुद से

by Alok Mishra Matrubharti Verified in Hindi Poems

लिखता हुं मैलिखता नहीं वाह के लिए ।लिखता नहीं गुनाह के लिए।हूक उठती है दिल में ऐसी ,लिखता हुँ मै आह के लिए ।।लिखता नहीं सलाह के लिए ।लिखता नहीं पनाह के लिए ।इश्क की भूख है कुछ ऐसी ...Read More


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