Chalo, kahi sair ho jaye - 13 by राज कुमार कांदु in Hindi Travel stories PDF

चलो, कहीं सैर हो जाए... - 13

by राज कुमार कांदु Matrubharti Verified in Hindi Travel stories

सीढियाँ उतरते हुए बाएं किनारे पड़ने वाले मंदिरों में शीश नवाते हाथ जोड़ते हम लोग आगे बढ़ रहे थे।अब सीढियाँ ख़त्म होनेवाली थीं और आगे मंदिर जैसा कुछ लग नहीं रहा था। इसके विपरीत दायीं तरफ पानी का एक ...Read More