Chalo, kahi sair ho jaye - 15 by राज कुमार कांदु in Hindi Travel stories PDF

चलो, कहीं सैर हो जाए... - 15

by राज कुमार कांदु Matrubharti Verified in Hindi Travel stories

उस असुर की ख़ामोशी देखकर भोले बाबा अंतर्ध्यान होना ही चाहते थे कि वह कुटिल मुस्कान लिए हुए बोल पड़ा, "हे देवाधिदेव महादेव ! ठीक है। मैं आपको सृष्टि के नियमों को तोड़ने के लिए विवश नहीं करूँगा। मैं ...Read More