Majdur ki Beti by Kumar Kishan Kirti in Hindi Social Stories PDF

मजदूर की बेटी

by Kumar Kishan Kirti Matrubharti Verified in Hindi Social Stories

मैं प्रतिदिन उसे शाम के वक्त पसीने से लथपथ होकर अपने घर की तरफ लौटता देखता।सिर पर मैला-कुचैला पगड़ी बांधे, शरीर पर धूलकण,पैबंद लगी पुरानी धोती पहने हुए वह अपने कंधे पर कुदाल लेकर लौटता था।पर वह किस जगह ...Read More