kalyug or Prambrhama कलयुग और परमब्रह्म by king offear in Hindi Poems PDF

कलयुग और परमब्रह्म

by king offear in Hindi Poems

अब अशुद्धि के लिए मैं शुद्ध होना चाहता हूँ, अब कुबुद्धी को लिए मैं बुद्ध होना चाहता हूँ. चाहता हूँ इस जगत में शांति चारों ओर हो, इस जगत के प्रेम पर मैं क्रुद्ध होना चाहता हूँ. चाहता हूँ ...Read More