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  • VORTX - 1

    ट्रेलर  यह कहानी है हमारे ब्रह्मांड R3G7 की... एक ऐसा ब्रह्मांड जो अब अपनी आखिरी...

  • श्रापित एक प्रेम कहानी - 53

    एकांश गुणा और चतूर से कहता है-- थैंक्स यार तुम दौनो ने मेरी बहुत हेल्प की । अगर...

  • वरदान - 6

    बड़ी रानी जो अब अस्थायी रूप से राजसिंहासन पर बैठी थी, उसके मन में एक गहरी चिंता...

  • સંવેદનાનું સરનામું - 8

    " પૈસો મારો પરમેશ્વર  નેvપત્ની મારી ગુરુ, છૈયા છોકરા શાલિગ્રામ હું કોની પૂજા કરુ...

  • After Diwali

      After Diwali Diwali hasn’t even fully arrived, and yet the chant of “After Diw...

  • सैदो में बंधी जिंदगी - एपिसोड 2

    शादी की पहली रात आर्यन का बंगला। अनन्या को अलग कमरा मिला। वो बिस्तर पर बैठी सोच...

  • સ્નેહ ની ઝલક - 18

    મારી દુનિયાવરસાદ પછીની એક મીઠી સાંજ હતી. અમદાવાદની ગલીઓ ભીની હતી અને દીવાઓની રોશ...

  • શતરંજ - ભાગ 1

    #શતરંજ લેખિકા Mansi Desai Desai Mansi Shastri ​અમદાવાદની ભાગોળે આવેલું 'વાઘે...

  • रॉ एजेंट सीजन 1 - 18

    सुबह का समय था अजय सिंह और विजय डोभाल दोनों इंतजार कर रहे थे ,तभी अन्दर एक महिला...

  • कथा सम्राट का व्यंग्यबोध

    प्रेमचंद के साहित्य में निहित व्यंग्यविवेक रंजन श्रीवास्तव ए 233 ओल्ड मिनाल रेजी...

श्रापित एक प्रेम कहानी By CHIRANJIT TEWARY

अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...

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वरदान By Renu Chaurasiya

एक दिन उनके राज्य में एक भिखारी आ पहुँचा। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और उसकी त्वचा पर बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ थीं, जिनसे निरंतर मवाद बह रहा था। उसके शरीर से दुर्गंध फैल रही । उसके ए...

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સંવેદનાનું સરનામું By Jaypandya Pandyajay

યજ્ઞેશ પોતાની ચેમ્બરમાં બેઠો હતો. ત્યાં જ ડોર ખોલીને એક સુંદરી અંદર પ્રવેશ કરે છે. તમે ચિંતા ન કરશો બધુ જ ઠીક થઈ જશે, આપણો સમય અત્યારે ખુબ જ ખરાબ છે તે હું જાણું છું પણ એક દિવસ આપ...

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સ્નેહની ઝલક By Sanjay Sheth

અમદાવાદના એચ એલ કોમર્સ કોલેજના કેમ્પસમાં વસંતના દિવસની હળવી ધૂપ, લીલાં ગાર્ડન અને ગુલાબના ફૂલોની સુગંધ બધું શાંત અને મીઠી લાગણી ભરતું હતું. સંદીપ એ ખૂણામાં, પોતાના નોટબુક અને પેન સ...

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रॉ एजेंट By bhagwat singh naruka

इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इसका किसी जीवित, जंतु, मानव संसाधन से कोई लेना देना नही है अगर ऐसा होता है तो ये मात्र एक सयोग होगा ,,, जय हिन्द,
इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क...

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मैं दादा-दादी की लाड़ली By sapna

मैं अपने बचपन में दादा-दादी की लाड़ली थी।उनकी आँखों का नूर, उनके आँगन की सबसे प्यारी हँसी।घर में अगर कोई सबसे पहले मेरी ओर देखता था,तो वे दादा-दादी ही होते थे।उनके लिए मैं केवल उनक...

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પડછાયો: એક પેઢીના સ્વપ્નનો વારસો By I AM ER U.D.SUTHAR

શિયાળાની ધીમી અને ફૂલગુલાબી ઠંડીમાં, હરગોવનદાસ સોની પોતાના નાનકડા ૨ BHK ફ્લેટની બાલ્કનીમાં બેઠા હતા. સવારના તાજા ખબર વાંચતાં તેઓ ઠંડીનો આનંદ માણી રહ્યા હતા. તેમનું જીવન શાંત અને સર...

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प्रेम न हाट बिकाय By Pranava Bharti

कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...

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Maharana Pratap By Aarushi Singh Rajput

एक बड़े मेले के भीड़-भाड़ वाले प्रांगण के भीतर एक विशाल कक्ष सजा हुआ था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। सामने, एक सोने-ओसके सिंहासन पर लगभग सोलह–सत्रह वर्ष का एक लड़का बैठा था; जलालु...

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इंतेक़ाम By Mamta Meena

आसमान में काले बादल छाए हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे आज इंदर देव रूष्ट हो और अपना सारा कोप निकालना चाहते हो,बरसात आने की आशंका में सभी लोग अपना काम जल्दी-जल्दी समेट कर अपने घर पहुंचन...

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સંવેદનાનું સરનામું By Jaypandya Pandyajay

યજ્ઞેશ પોતાની ચેમ્બરમાં બેઠો હતો. ત્યાં જ ડોર ખોલીને એક સુંદરી અંદર પ્રવેશ કરે છે. તમે ચિંતા ન કરશો બધુ જ ઠીક થઈ જશે, આપણો સમય અત્યારે ખુબ જ ખરાબ છે તે હું જાણું છું પણ એક દિવસ આપ...

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સ્નેહની ઝલક By Sanjay Sheth

અમદાવાદના એચ એલ કોમર્સ કોલેજના કેમ્પસમાં વસંતના દિવસની હળવી ધૂપ, લીલાં ગાર્ડન અને ગુલાબના ફૂલોની સુગંધ બધું શાંત અને મીઠી લાગણી ભરતું હતું. સંદીપ એ ખૂણામાં, પોતાના નોટબુક અને પેન સ...

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रॉ एजेंट By bhagwat singh naruka

इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इसका किसी जीवित, जंतु, मानव संसाधन से कोई लेना देना नही है अगर ऐसा होता है तो ये मात्र एक सयोग होगा ,,, जय हिन्द,
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मैं दादा-दादी की लाड़ली By sapna

मैं अपने बचपन में दादा-दादी की लाड़ली थी।उनकी आँखों का नूर, उनके आँगन की सबसे प्यारी हँसी।घर में अगर कोई सबसे पहले मेरी ओर देखता था,तो वे दादा-दादी ही होते थे।उनके लिए मैं केवल उनक...

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પડછાયો: એક પેઢીના સ્વપ્નનો વારસો By I AM ER U.D.SUTHAR

શિયાળાની ધીમી અને ફૂલગુલાબી ઠંડીમાં, હરગોવનદાસ સોની પોતાના નાનકડા ૨ BHK ફ્લેટની બાલ્કનીમાં બેઠા હતા. સવારના તાજા ખબર વાંચતાં તેઓ ઠંડીનો આનંદ માણી રહ્યા હતા. તેમનું જીવન શાંત અને સર...

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Maharana Pratap By Aarushi Singh Rajput

एक बड़े मेले के भीड़-भाड़ वाले प्रांगण के भीतर एक विशाल कक्ष सजा हुआ था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। सामने, एक सोने-ओसके सिंहासन पर लगभग सोलह–सत्रह वर्ष का एक लड़का बैठा था; जलालु...

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इंतेक़ाम By Mamta Meena

आसमान में काले बादल छाए हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे आज इंदर देव रूष्ट हो और अपना सारा कोप निकालना चाहते हो,बरसात आने की आशंका में सभी लोग अपना काम जल्दी-जल्दी समेट कर अपने घर पहुंचन...

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