मै मन - 2 Vedanta Life Agyat Agyani द्वारा Spiritual Stories में हिंदी पीडीएफ

I mind by Vedanta Life  Agyat Agyani in Hindi Novels
मन स्वयं आनंद है, स्वयं ब्रह्म है।
बस उसे कर्ता से द्रष्टा बना दो—कर्ता नहीं बचता।
यही द्रष्टा प्रेम है, आनंद है।
तब मन स्थिर होता है, ऊर्जा बहती ह...