Best Spiritual Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


Languages
Categories
Featured Books

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব 248 By Ashoke Ghosh

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-২৪৮ যুধিষ্ঠিরের সশরীরে স্বৰ্গযাত্রা   প্রাককথন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন বেদব্যাস মহাভারত নামক মহাগ্রন্থ রচনা করেছিলেন। তিনি এই গ্রন্থে কুরুবংশের বিস্তার, গান্ধারীর ধর্...

Read Free

शैतानी घाटी का सफर - 5 By RAAHULL SHARMA

और ड्राइविंग सीट पर वही कालू ड्राइवर बैठा था, जिसका चेहरा अब आधा जला हुआ और खौफनाक था।राम: "सौरभ! देखो वो बस!"पर सौरभ जैसे पागल हो गया था। वो गाड़ी से बचने के बजाय, सीधा उस जलती हु...

Read Free

નિલક્રિષ્ના - ભાગ 53 By કૃષ્ણપ્રિયા

આમ વિરમન્યુ અને શિવમન્યુની વાતનો અંતિમ સૂત્ર પૂર્ણ થવા આવ્યો હતો. તેમની ગાથાના રહસ્યો જાણ્યા પછી હવે સમય પાંચ હજાર વર્ષ પછી એક નવા વળાંક તરફ આગળ વધી રહ્યો હતો. આકાશના અનંત વિસ્તારન...

Read Free

कर्मठ बनो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (67)की व्याख्या"दक्षता महे"ऋगुवेद-7/32/9भावार्थ--दक्ष बनो। पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद 7.32.9 का मूल मंत्र इस प्रकार है—मा स्रेधत सोमिनो दक्षता महे कृणुध्वं राय आतुजे...

Read Free

श्रापित एक प्रेम कहानी - 88 By CHIRANJIT TEWARY

ये पहली बार था जब एकांश का हाथ वर्शाली के किसी अंग को छु रहा था। दोनो ही एक दुसरे मे खोया हुआ था । तभी एकांश अपने आपको संभालते हूए धिरे से वर्शाली के हुक को लगा देता है। वर्शाली अब...

Read Free

श्रेष्ठ लोगों की संगति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (66) की व्याख्या "देवानाम् सख्यमुप सेदिमा वयम्।ऋग्वेद --1/89/3भावार्थ - हम श्रेष्ठ लोगों की संगति प्राप्त करें। "देवानां सख्यमुप सेदिमा वयम्") ऋग्वेद के मंत्र का वास्...

Read Free

महाभारत की कहानी - भाग 246 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२५० कौरव और पांडवों के स्वर्गलाभ   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्...

Read Free

मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

Read Free

ઘોસ્ટ ઓફ કારગિલ - ભાગ 8 By Vir jadeja

શહીદોની ફૌજટોર્ચના પ્રકાશમાં ૧૨ આકૃતિઓ. બરફ પર ઊભી. શ્વાસ નહીં, ધબકાર નહીં. પણ આંખો... આંખોમાં આગ.સૌથી આગળ કેપ્ટન સૌરભ કાલિયા. ૧૯૯૯ માં  પકડાયા હતા. દુશ્મને અમાનવીય યાતનાઓ આપીને શહ...

Read Free

कालू की पहाड़ी - 6 By RAAHULL SHARMA

कालू के गायब होते ही उन आठों दोस्तों की देह में एक अजीब सी ऐंठन पैदा हुई। उनके शरीरों से हड्डियां चटकने की आवाजें आ रही थीं।डेविड, जो बेंगलुरु में सबका लीडर बना फिरता था, अब उसकी च...

Read Free

तुरीय-आधारित '0 बोध' By Vedanta Life Agyat Agyani

।वेदांत 2.0 लाइफ़": तुरीय-आधारित '0 बोध' को लाइफ़–साइंस और कॉन्शसनेस–स्टडीज़ के एकीकृत फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तावसार (Abstract) – "वेदांत 2.0 लाइफ़" नामक एक समेकित फ्रेम...

Read Free

मित्र कौन ? By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (१) की व्याख्या "न स सखा यो न ददाति  सख्ये"ऋग्वेद --10/117/4भावार्थ -- ,वह मित्र‌ नहीँ है जो सहायता न करें।पूरा मंत्र अर्थ सहितआपने जो पंक्ति उद्धृत की है — “न स सखा...

Read Free

मॉडर्न साधु By aman

ये कहानी शुरू होती हैं अस्पताल से....जहां मोहन अपने होने वाले बच्चे के लिए चिंतित हैं। ऑपरेशन रूम से आती दर्द भरी चीखों ने उसे परेशान कर दिया हैं चिंता ने उसके बच्चे पैदा होने की ख...

Read Free

साझा कल्याण By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-(२) की व्याख्या *केवलाघो भवति केवलादी"ऋग्वेद --1/117/4भावार्थ --जो अकेले भोग करता है वह‌ पाप का‌ भागी होता है। पूरा श्लोक अर्थ सहितजो मंत्र उद्धृत किया है — "केवलाघो...

Read Free

वर्तमान नकलूसी गुरु और प्राचीन बोध By Vedanta Life Agyat Agyani

बोध पहले अनुभव है, बाद में शास्त्र। पहले भीतर एक घटनाक्रम घटता है — आनंद, मौन, संतोष, प्रस्फुटन, सहजता। बाद में बुद्धि उसे भाषा देती है, और वही भाषा शास्त्र, पद, दोहा, भजन, सूत्र,...

Read Free

मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु By Vedanta Life Agyat Agyani

मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु शरीर जड़ है।ऊर्जा चेतन है।इन दोनों के मध्य जो बोध उत्पन्न होता है, वही मन है।मन न पूर्णतः शरीर है, न पूर्णतः ऊर्जा।मन दोनों का सेतु है।इसी कारण मन द...

Read Free

মন্ত্র বীজ নাম ও মুক্তি By prem chand hembram

মন্ত্র, বীজনাম ও মুক্তি — ভারতীয় দর্শনের প্রকৃত দিশা ভারতীয় দর্শনে "মুক্তি" বা "মোক্ষ" মানবজীবনের সর্বোচ্চ লক্ষ্য বলে বিবেচিত হয়েছে। কিন্তু মুক্তি বলতে কেবল সংসার ত্যাগ বা কোনো...

Read Free

परिश्रम का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(3) की व्याख्या "न ऋते श्रान्तस्य सख्यायदेवा:"4/33/11भावार्थ -देवता(ईश्वर) श्रम करने वाले के सिवा और से मित्रता नहीं ‌करते।ऋग्वेद 4.33.11 का अंश:न ऋते श्रान्तस्य सख्या...

Read Free

শ্রী শ্রী ঠাকুরের পঞ্চ নীতি By prem chand hembram

মুক্তির পঞ্চনীতি-পথ — শ্রীশ্রী ঠাকুর অনুকূলচন্দ্রের জীবনদর্শন ভারতীয় দর্শনে "মুক্তি" বা "মোক্ষ" মানবজীবনের সর্বোচ্চ লক্ষ্য হিসেবে বিবেচিত হয়েছে। সাধারণত মানুষ মুক্তিকে মৃত্যুর পর...

Read Free

साथ साथ चलो साथ साथ बोलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-(4) की व्याख्या ऋगुवेद--10/191/2सं गच्छव्व सं वदध्वंभावार्थ--साथ-साथचलो, साथ ऋग्वेद 10.191.2 का मंत्र है:संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।देवा भागं यथा पूर्वे...

Read Free

स्वर्ग का दरवाजा - 5 By Author Pawan Singh

एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते।  ये लाइन तो आपने सुनी ही होगी लेकिन ऐसा क्यों कहा जाता है? क्या ये दर्शाता है कि दोस्ती में लिंग भेदभाव होता है या प्यार की भावना दोस्ती क...

Read Free

દીકરી ના પિતા - 3 By Samragni

દીકરીની જિંદગી: જ્યારે જન્મથી મૃત્યુ સુધી પિતાનો સથવારો ન હોયદીકરી માટે પિતા એટલે પહેલો હીરો, પહેલું સુરક્ષા કવચ અને પહેલો મિત્ર. પણ જ્યારે જન્મથી જ એ છત્રછાયા ન મળે, ત્યારે એની સફ...

Read Free

जो जागे वह पाए By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति --(5) की व्याख्या "यो जागार तमृच: कामयन्ति"ऋग्वेद--5/44/14भावार्थ --जो जागता है उसे ऋचाएँ चाहती हैं।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद 5.44.14 का पूरा मंत्र इस प्रकार है...

Read Free

સ્વ ની ખોજ - ભાગ 4 By Komal Mehta

⏳ ભાગ ૧: આંતરિક ખોજ અને અનુભૂતિ (The Inner Quest)     જેમ એક કુશળ ગોતાખોર સમુદ્રના અતલ ઊંડાણમાં જઈને કિંમતી મોતી શોધી લાવે છે, બસ તેવી જ રીતે આપણે પણ આપણા મનના ગહન ઊંડાણમાં ઉતરીને...

Read Free

मुक्ति का पंचनीति मार्ग By prem chand hembram

मुक्ति का पंचनीति मार्ग — श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र की जीवन-दृष्टि भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। सामान्यतः लोग मुक्ति को मृत्...

Read Free

सन्मार्ग की ओर By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (6) की व्याख्या "अग्ने नय सुपथा राए अस्मान"ऋग्वेद--1/189/1भावार्थ,--हे ईश्वर (अग्नि देव) ! मुझे धन के लिए सन्मार्ग पर ले चलें।ऋग्वेद 1.189.1अग्ने नय सुपथा राये अस्म...

Read Free

રઘુવંશ - ભાગ 6 By Mansi Desai Shastri

"જેની સેનાના એક જ પડકારથી શત્રુઓના ગઢ ધ્રૂજી ઉઠતા, એ અયોધ્યાના અજેય રક્ષક સમ્રાટ પ્રસેનજિતની શૌર્યગાથા — રઘુવંશ."#રઘુવંશ ભાગ 6 અયોધ્યાના રક્ષક – મહારાજ પ્રસેનજિતમહારાજ વિશ્વગંધના પ...

Read Free

अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 1 By RAAHULL SHARMA

अध्याय: देवक़ेड़ा का रहस्यछत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहा...

Read Free

પ્રાર્થના એટલે શું? પ્રાર્થના કેમ કરવી જોઈએ? By Dada Bhagwan

પ્રાર્થના એટલે શું? વિશેષ અર્થની માંગણી કરવી તે, વિશેષ સ્વરૂપે વિનંતી.ધર્મ કે અધ્યાત્મના માર્ગમાં પ્રાર્થનાનું ખૂબ મહત્ત્વ છે. જુદા જુદા ધર્મમાં પ્રાર્થનાનું વિશેષ મહત્ત્વ છે. કેટલ...

Read Free

मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति: भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा By prem chand hembram

मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति — भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। किंतु मुक्ति का अर्थ केवल संसार का त्या...

Read Free

ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 12 By Amir Ali Daredia

ઈસ્લામિક સ્ટોરી 12    યોમુઝઝીનાના જ દિવસે એટલે કે મિસરના રાષ્ટ્રીય ઉત્સવના દિવસે ફિરઓને જાદુગરો અને મુસાનો મુકાબલોગોઠવ્યો હતો.આ દિવસે આ મુકાબલો રાખવાનું એટલા માટે આયોજન કર્યું હતુ...

Read Free

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব 248 By Ashoke Ghosh

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-২৪৮ যুধিষ্ঠিরের সশরীরে স্বৰ্গযাত্রা   প্রাককথন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন বেদব্যাস মহাভারত নামক মহাগ্রন্থ রচনা করেছিলেন। তিনি এই গ্রন্থে কুরুবংশের বিস্তার, গান্ধারীর ধর্...

Read Free

शैतानी घाटी का सफर - 5 By RAAHULL SHARMA

और ड्राइविंग सीट पर वही कालू ड्राइवर बैठा था, जिसका चेहरा अब आधा जला हुआ और खौफनाक था।राम: "सौरभ! देखो वो बस!"पर सौरभ जैसे पागल हो गया था। वो गाड़ी से बचने के बजाय, सीधा उस जलती हु...

Read Free

નિલક્રિષ્ના - ભાગ 53 By કૃષ્ણપ્રિયા

આમ વિરમન્યુ અને શિવમન્યુની વાતનો અંતિમ સૂત્ર પૂર્ણ થવા આવ્યો હતો. તેમની ગાથાના રહસ્યો જાણ્યા પછી હવે સમય પાંચ હજાર વર્ષ પછી એક નવા વળાંક તરફ આગળ વધી રહ્યો હતો. આકાશના અનંત વિસ્તારન...

Read Free

कर्मठ बनो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (67)की व्याख्या"दक्षता महे"ऋगुवेद-7/32/9भावार्थ--दक्ष बनो। पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद 7.32.9 का मूल मंत्र इस प्रकार है—मा स्रेधत सोमिनो दक्षता महे कृणुध्वं राय आतुजे...

Read Free

श्रापित एक प्रेम कहानी - 88 By CHIRANJIT TEWARY

ये पहली बार था जब एकांश का हाथ वर्शाली के किसी अंग को छु रहा था। दोनो ही एक दुसरे मे खोया हुआ था । तभी एकांश अपने आपको संभालते हूए धिरे से वर्शाली के हुक को लगा देता है। वर्शाली अब...

Read Free

श्रेष्ठ लोगों की संगति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति (66) की व्याख्या "देवानाम् सख्यमुप सेदिमा वयम्।ऋग्वेद --1/89/3भावार्थ - हम श्रेष्ठ लोगों की संगति प्राप्त करें। "देवानां सख्यमुप सेदिमा वयम्") ऋग्वेद के मंत्र का वास्...

Read Free

महाभारत की कहानी - भाग 246 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२५० कौरव और पांडवों के स्वर्गलाभ   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्...

Read Free

मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

Read Free

ઘોસ્ટ ઓફ કારગિલ - ભાગ 8 By Vir jadeja

શહીદોની ફૌજટોર્ચના પ્રકાશમાં ૧૨ આકૃતિઓ. બરફ પર ઊભી. શ્વાસ નહીં, ધબકાર નહીં. પણ આંખો... આંખોમાં આગ.સૌથી આગળ કેપ્ટન સૌરભ કાલિયા. ૧૯૯૯ માં  પકડાયા હતા. દુશ્મને અમાનવીય યાતનાઓ આપીને શહ...

Read Free

कालू की पहाड़ी - 6 By RAAHULL SHARMA

कालू के गायब होते ही उन आठों दोस्तों की देह में एक अजीब सी ऐंठन पैदा हुई। उनके शरीरों से हड्डियां चटकने की आवाजें आ रही थीं।डेविड, जो बेंगलुरु में सबका लीडर बना फिरता था, अब उसकी च...

Read Free

तुरीय-आधारित '0 बोध' By Vedanta Life Agyat Agyani

।वेदांत 2.0 लाइफ़": तुरीय-आधारित '0 बोध' को लाइफ़–साइंस और कॉन्शसनेस–स्टडीज़ के एकीकृत फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तावसार (Abstract) – "वेदांत 2.0 लाइफ़" नामक एक समेकित फ्रेम...

Read Free

मित्र कौन ? By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (१) की व्याख्या "न स सखा यो न ददाति  सख्ये"ऋग्वेद --10/117/4भावार्थ -- ,वह मित्र‌ नहीँ है जो सहायता न करें।पूरा मंत्र अर्थ सहितआपने जो पंक्ति उद्धृत की है — “न स सखा...

Read Free

मॉडर्न साधु By aman

ये कहानी शुरू होती हैं अस्पताल से....जहां मोहन अपने होने वाले बच्चे के लिए चिंतित हैं। ऑपरेशन रूम से आती दर्द भरी चीखों ने उसे परेशान कर दिया हैं चिंता ने उसके बच्चे पैदा होने की ख...

Read Free

साझा कल्याण By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-(२) की व्याख्या *केवलाघो भवति केवलादी"ऋग्वेद --1/117/4भावार्थ --जो अकेले भोग करता है वह‌ पाप का‌ भागी होता है। पूरा श्लोक अर्थ सहितजो मंत्र उद्धृत किया है — "केवलाघो...

Read Free

वर्तमान नकलूसी गुरु और प्राचीन बोध By Vedanta Life Agyat Agyani

बोध पहले अनुभव है, बाद में शास्त्र। पहले भीतर एक घटनाक्रम घटता है — आनंद, मौन, संतोष, प्रस्फुटन, सहजता। बाद में बुद्धि उसे भाषा देती है, और वही भाषा शास्त्र, पद, दोहा, भजन, सूत्र,...

Read Free

मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु By Vedanta Life Agyat Agyani

मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु शरीर जड़ है।ऊर्जा चेतन है।इन दोनों के मध्य जो बोध उत्पन्न होता है, वही मन है।मन न पूर्णतः शरीर है, न पूर्णतः ऊर्जा।मन दोनों का सेतु है।इसी कारण मन द...

Read Free

মন্ত্র বীজ নাম ও মুক্তি By prem chand hembram

মন্ত্র, বীজনাম ও মুক্তি — ভারতীয় দর্শনের প্রকৃত দিশা ভারতীয় দর্শনে "মুক্তি" বা "মোক্ষ" মানবজীবনের সর্বোচ্চ লক্ষ্য বলে বিবেচিত হয়েছে। কিন্তু মুক্তি বলতে কেবল সংসার ত্যাগ বা কোনো...

Read Free

परिश्रम का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(3) की व्याख्या "न ऋते श्रान्तस्य सख्यायदेवा:"4/33/11भावार्थ -देवता(ईश्वर) श्रम करने वाले के सिवा और से मित्रता नहीं ‌करते।ऋग्वेद 4.33.11 का अंश:न ऋते श्रान्तस्य सख्या...

Read Free

শ্রী শ্রী ঠাকুরের পঞ্চ নীতি By prem chand hembram

মুক্তির পঞ্চনীতি-পথ — শ্রীশ্রী ঠাকুর অনুকূলচন্দ্রের জীবনদর্শন ভারতীয় দর্শনে "মুক্তি" বা "মোক্ষ" মানবজীবনের সর্বোচ্চ লক্ষ্য হিসেবে বিবেচিত হয়েছে। সাধারণত মানুষ মুক্তিকে মৃত্যুর পর...

Read Free

साथ साथ चलो साथ साथ बोलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-(4) की व्याख्या ऋगुवेद--10/191/2सं गच्छव्व सं वदध्वंभावार्थ--साथ-साथचलो, साथ ऋग्वेद 10.191.2 का मंत्र है:संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।देवा भागं यथा पूर्वे...

Read Free

स्वर्ग का दरवाजा - 5 By Author Pawan Singh

एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते।  ये लाइन तो आपने सुनी ही होगी लेकिन ऐसा क्यों कहा जाता है? क्या ये दर्शाता है कि दोस्ती में लिंग भेदभाव होता है या प्यार की भावना दोस्ती क...

Read Free

દીકરી ના પિતા - 3 By Samragni

દીકરીની જિંદગી: જ્યારે જન્મથી મૃત્યુ સુધી પિતાનો સથવારો ન હોયદીકરી માટે પિતા એટલે પહેલો હીરો, પહેલું સુરક્ષા કવચ અને પહેલો મિત્ર. પણ જ્યારે જન્મથી જ એ છત્રછાયા ન મળે, ત્યારે એની સફ...

Read Free

जो जागे वह पाए By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति --(5) की व्याख्या "यो जागार तमृच: कामयन्ति"ऋग्वेद--5/44/14भावार्थ --जो जागता है उसे ऋचाएँ चाहती हैं।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद 5.44.14 का पूरा मंत्र इस प्रकार है...

Read Free

સ્વ ની ખોજ - ભાગ 4 By Komal Mehta

⏳ ભાગ ૧: આંતરિક ખોજ અને અનુભૂતિ (The Inner Quest)     જેમ એક કુશળ ગોતાખોર સમુદ્રના અતલ ઊંડાણમાં જઈને કિંમતી મોતી શોધી લાવે છે, બસ તેવી જ રીતે આપણે પણ આપણા મનના ગહન ઊંડાણમાં ઉતરીને...

Read Free

मुक्ति का पंचनीति मार्ग By prem chand hembram

मुक्ति का पंचनीति मार्ग — श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र की जीवन-दृष्टि भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। सामान्यतः लोग मुक्ति को मृत्...

Read Free

सन्मार्ग की ओर By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (6) की व्याख्या "अग्ने नय सुपथा राए अस्मान"ऋग्वेद--1/189/1भावार्थ,--हे ईश्वर (अग्नि देव) ! मुझे धन के लिए सन्मार्ग पर ले चलें।ऋग्वेद 1.189.1अग्ने नय सुपथा राये अस्म...

Read Free

રઘુવંશ - ભાગ 6 By Mansi Desai Shastri

"જેની સેનાના એક જ પડકારથી શત્રુઓના ગઢ ધ્રૂજી ઉઠતા, એ અયોધ્યાના અજેય રક્ષક સમ્રાટ પ્રસેનજિતની શૌર્યગાથા — રઘુવંશ."#રઘુવંશ ભાગ 6 અયોધ્યાના રક્ષક – મહારાજ પ્રસેનજિતમહારાજ વિશ્વગંધના પ...

Read Free

अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 1 By RAAHULL SHARMA

अध्याय: देवक़ेड़ा का रहस्यछत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहा...

Read Free

પ્રાર્થના એટલે શું? પ્રાર્થના કેમ કરવી જોઈએ? By Dada Bhagwan

પ્રાર્થના એટલે શું? વિશેષ અર્થની માંગણી કરવી તે, વિશેષ સ્વરૂપે વિનંતી.ધર્મ કે અધ્યાત્મના માર્ગમાં પ્રાર્થનાનું ખૂબ મહત્ત્વ છે. જુદા જુદા ધર્મમાં પ્રાર્થનાનું વિશેષ મહત્ત્વ છે. કેટલ...

Read Free

मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति: भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा By prem chand hembram

मंत्र, बीज-नाम और मुक्ति — भारतीय दर्शन की वास्तविक दिशा भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया है। किंतु मुक्ति का अर्थ केवल संसार का त्या...

Read Free

ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 12 By Amir Ali Daredia

ઈસ્લામિક સ્ટોરી 12    યોમુઝઝીનાના જ દિવસે એટલે કે મિસરના રાષ્ટ્રીય ઉત્સવના દિવસે ફિરઓને જાદુગરો અને મુસાનો મુકાબલોગોઠવ્યો હતો.આ દિવસે આ મુકાબલો રાખવાનું એટલા માટે આયોજન કર્યું હતુ...

Read Free