Best Spiritual Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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মহাভারতের কাহিনি – পর্ব 231 By Ashoke Ghosh

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-২৩১ অর্জুনের নানা দেশে যুদ্ধ এবং বভ্রুবাহন উলূপী ও চিত্রাঙ্গদার কাহিনি   প্রাককথন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন বেদব্যাস মহাভারত নামক মহাগ্রন্থ রচনা করেছিলেন। তিনি এই গ্রন্...

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રઘુવંશ - ભાગ 1 By Mansi Desai Shastri

"તમે રામકથા તો જાણી છે, પણ શું તમે એ ૧૦૦ પ્રતાપી રાજાઓને ઓળખો છો જેમના પુણ્યપ્રતાપે અયોધ્યા અમર બની? આવો, ઈતિહાસના પાનાઓ પર અંકિત એ અજાણ્યા પરાક્રમોની સફરે."#રઘુવંશ. ભાગ 1. આદિ સૂર...

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सत्य पथ पर चलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 8 By Shivraj Bhokare

दोहा:१५बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥कथा: "ऊँचाई का खालीपन"एक नगर में एक बहुत ऊँचा और विशाल खजूर का पेड़ था। उसे अपनी लम्बाई पर बड़ा गर्व...

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महाभारत की कहानी - भाग 231 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२३५ धृतराष्ट्र और गांधारी का वनवास का संकल्प   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गा...

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માતૃત્વનો અમર વારસો : માતૃદિવસ વિશેષ By Abhinav Ahir Writer

માતૃત્વનો અમર વારસો : માતૃદિવસ વિશેષલેખક :- અભિનવ આહીર " દિલદાર "​"મા એટલે નિઃસ્વાર્થ પ્રેમનો દરિયો અને સંસ્કારોનું પહેલું સરનામું.""ગમે તેટલા મોટા માણસ થઈ જાવ, પણ માના ખોળા જેવો ક...

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આપણા શક્તિપીઠ - 41 - અંબિકા શક્તિપીઠ - ભરતપુર રાજસ્થાન By Jaypandya Pandyajay

અંબિકા અને અમૃતેશ્વર. મોટાભાગના લોકો અંબિકાને પાલનપોષણ કરનારી માતા દેવી તરીકે જાણે છે, પરંતુ દરેક વ્યક્તિ એ વાત ધ્યાનમાં લેતું નથી કે અમૃતેશ્વર સાથેની તેમની જોડી ઊર્જા અને સ્થિરતાન...

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ज्ञानी भ्रमित नहीं होता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२८) की व्याख्या  मन्त्र--“उत देवा अवहित देवा: उन्नदेवा पुनः:”। --ऋग्वेद १०.१३७.१भावार्थ --गिरे हुओं को पुनः उठाओं।यह मन्त्र ऋग्वेद के दशम मण्डल, १३७वें सूक्त का प्र...

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स्वभाव धर्म ओर आत्मा की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

स्वभाव का तात्विक विवेचन: दर्शन, मनोविज्ञान और आध्यात्मिक धर्म का एक व्यापक अनुसंधानhttps://orcid.org/0009-0000-8083-0685vedanta 2.0 life - pen name -Agyat agyani—𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲“जो स...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 79 By CHIRANJIT TEWARY

निलु की बात सुनकर कुंम्भन गरजते हूए कहता है। हे मुर्ख मानव । कदाचित मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है के तुम मेरे वस्त्र की बात कर रहे हो। निलु बिड़ी का एक गहरी कस्त लगाकर कहती है। कदाचित...

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फल्गु को माता सीता का श्राप By Abhijeet Nayan

फल्गु का रहस्यये कहानी उस समय की है, जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दिनों में पृथ्वी पर भटकते हुए गया नगरी पहुँचे थे। गया उस समय भी पवित्र स्थान माना जाता था, जहाँ पित...

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सिंघनी माता का रहस्य - अध्याय 3 By Abhijeet Nayan

सिंघनी माता का रहस्य — अध्याय 3राजेश की बात सुनते ही चारों ओर सन्नाटा छा गया। कुछ क्षण तक कोई कुछ नहीं बोला। तभी उस सन्नाटे को चीरती हुई एक भारी आवाज गूँजी—“राजेश… क्या तुमने सच मे...

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दुख का कारण 'अति' By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (२९) की व्याख्या बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।ऋगुवेद --१/१६४/३२भाव--बहुत सन्तान वाले बहुत कष्ट उठाते हैं।मंत्र:“बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।”— ऋग्वेद १/१६४/३२पदच्छेद--बहु-प...

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शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर By Vedanta Life Agyat Agyani

  शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर जीवन कोई ऐसी पहेली नहीं है जिसे बाहर की कोई सत्ता (धर्म, विज्ञान या राजनीति) सुलझा सके। यह एक बहती हुई धारा है, जिसका आनंद केवल 'अभी' और...

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स्वर्ग का दरवाजा - 3 By Author Pawan Singh

इस एपिसोड को हम एक सवाल से शुरू करते हैं। चलिए बताइए क्या आपको आपका गोत्र याद हैं? अगर आप भारतवर्ष में रहते हैं तो आप किसी न किसी ऋषि परंपरा का हिस्सा ज़रूर होंगे। ये ऐसा समझिए किस...

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भक्त का रक्षक भगवान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (३०) की व्याख्या यह मन्त्र ऋग्वेद (मण्डल 7, सूक्त 32, मन्त्र 14) है। यह सूक्त मुख्यतः इन्द्र की स्तुति में है।मन्त्र---कस्तमिन्द्र त्वावसुमा मर्त्यो दधर्षति।(ऋग्वेद...

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शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदान्त 2.0: शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान — एक वृहद शोध रिपोर्ट प्रस्तुत शोध रिपोर्ट 'अज्ञात अज्ञानी' (Agyat Agyani) द्वारा प्रतिपादित 'वेदान्त 2.0' के दार्शनिक और वैज...

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स्त्री - दृश्य नहीं, दर्शन है By Vedanta Life Agyat Agyani

Vedanta 2.0 Life स्त्री — दृश्य नहीं, दर्शन है धर्म, पाखंड और विश्वगुरु का मौन सत्यजब पुरुष स्त्री को समझ नहीं पाया, तभी धर्म पैदा हुआ। जब प्रेम नहीं समझा गया, तभी शास्त्र लिखे गए।...

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आन्तरिक पुकार By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद (31)की व्याख्या "इमं न: श्रणुहवम्"ऋगुवेद --10/26/9भावार्थ--हे ईश्वर मेरी प्रार्थना को सुनो। ऋग्वेद में प्रयुक्त पद “इमं नः शृणु हवम्” (मेरी/हमारी प्रार्थना को सुनो) कई सूक्त...

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अप्प दीपो भवः...- बोधार्थी रौनक़ । By Raunak

रांची की वह सुबह आज भी याद है...ठंडी हवा थी...सड़कें धीरे-धीरे जाग रही थीं...और मैं किताबों की तलाश में था।किताबें...जो सिर्फ पन्ने नहीं होतीं...कई बार वे मनुष्य को नया मनुष्य बना...

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‌परम शक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (32) की व्याख्या "स्तोतुर्मघवन काममा पृण"। ऋगुवेद ---१/५७/५भावार्थ --हे प्रभु! भक्त की कामनाओं को पूर्ण करो। मंत्र :“स्तोतुर्मघवन् काममापृण।”— ऋगुवेद --1.57.5पदच्छेद...

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वेदान्त 2.0 - भाग 39 By Vedanta Life Agyat Agyani

 ,  वेदांत 2.0: 'अज्ञात अज्ञानी' के अस्तित्व-दर्शन और वैज्ञानिक अद्वैत का गहन विश्लेषणआधुनिक दार्शनिक चिंतन के धरातल पर 'वेदांत 2.0' का उद्भव एक ऐसी क्रांतिकारी घटन...

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चेतना का स्रोत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या"विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि"भावार्थ --हे प्रभु ! सारी विद्याओं का आदि‌ मूल‌ तू ही‌‌ है।मंत्र —विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2पदच्छेद-विश्वेष...

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Hero - 4 By Ram Make

लेकिन जतिन जैसे ही कमरे से बाहर निकलता है । अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन महागुरु तुमसे क्या कह रहे थे। " फिर जतिन कहता है महागुरु ने कहा है। जो उन्होंने कहा है वह किसी को भी मत बता...

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वह देवों का देव By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या-- "देवो देवनामसि"ऋग्वेद- 1-94-13अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है।विस्तृत भावार्थ :इस मन्त्र में परमात्मा की सर्वोच्चता बताई गई है। संसार में जो भी...

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ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 8 By Amir Ali Daredia

ઇસ્લામિક સ્ટોરી                             8      શોએબે ઉપરથી નીચે સુધી પહેલા તો મુસાનુ બરાબર નિરીક્ષણ કર્યું. તંદુરસ્ત.ખડતલ અને મજબૂત શરીર હતુ હઝરત મુસા(av) નુ.નિરીક્ષણ કરી લીધા...

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मुक्ति की कामना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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જીવન જીવવાની સાચી રીત શું છે? By Dada Bhagwan

જીવન જીવવાની સાચી કળા છે, ક્લેશ વિના જીવન જીવવું! દુર્લભ મનુષ્ય અવતાર મળ્યો, તો જીવન જીવવાનો હેતુ શો છે, એનો વિચાર આવવો જોઈએ. જન્મથી લઈને મૃત્યુ સુધીના જીવનના દરેક તબક્કામાં આપણે ભ...

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सर्वभूतहितेरत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत / नहींनः = हमारीप्रजा = सन्तान, ल...

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মহাভারতের কাহিনি – পর্ব 231 By Ashoke Ghosh

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-২৩১ অর্জুনের নানা দেশে যুদ্ধ এবং বভ্রুবাহন উলূপী ও চিত্রাঙ্গদার কাহিনি   প্রাককথন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন বেদব্যাস মহাভারত নামক মহাগ্রন্থ রচনা করেছিলেন। তিনি এই গ্রন্...

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રઘુવંશ - ભાગ 1 By Mansi Desai Shastri

"તમે રામકથા તો જાણી છે, પણ શું તમે એ ૧૦૦ પ્રતાપી રાજાઓને ઓળખો છો જેમના પુણ્યપ્રતાપે અયોધ્યા અમર બની? આવો, ઈતિહાસના પાનાઓ પર અંકિત એ અજાણ્યા પરાક્રમોની સફરે."#રઘુવંશ. ભાગ 1. આદિ સૂર...

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सत्य पथ पर चलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 8 By Shivraj Bhokare

दोहा:१५बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥कथा: "ऊँचाई का खालीपन"एक नगर में एक बहुत ऊँचा और विशाल खजूर का पेड़ था। उसे अपनी लम्बाई पर बड़ा गर्व...

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महाभारत की कहानी - भाग 231 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२३५ धृतराष्ट्र और गांधारी का वनवास का संकल्प   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गा...

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માતૃત્વનો અમર વારસો : માતૃદિવસ વિશેષ By Abhinav Ahir Writer

માતૃત્વનો અમર વારસો : માતૃદિવસ વિશેષલેખક :- અભિનવ આહીર " દિલદાર "​"મા એટલે નિઃસ્વાર્થ પ્રેમનો દરિયો અને સંસ્કારોનું પહેલું સરનામું.""ગમે તેટલા મોટા માણસ થઈ જાવ, પણ માના ખોળા જેવો ક...

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આપણા શક્તિપીઠ - 41 - અંબિકા શક્તિપીઠ - ભરતપુર રાજસ્થાન By Jaypandya Pandyajay

અંબિકા અને અમૃતેશ્વર. મોટાભાગના લોકો અંબિકાને પાલનપોષણ કરનારી માતા દેવી તરીકે જાણે છે, પરંતુ દરેક વ્યક્તિ એ વાત ધ્યાનમાં લેતું નથી કે અમૃતેશ્વર સાથેની તેમની જોડી ઊર્જા અને સ્થિરતાન...

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ज्ञानी भ्रमित नहीं होता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२८) की व्याख्या  मन्त्र--“उत देवा अवहित देवा: उन्नदेवा पुनः:”। --ऋग्वेद १०.१३७.१भावार्थ --गिरे हुओं को पुनः उठाओं।यह मन्त्र ऋग्वेद के दशम मण्डल, १३७वें सूक्त का प्र...

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स्वभाव धर्म ओर आत्मा की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

स्वभाव का तात्विक विवेचन: दर्शन, मनोविज्ञान और आध्यात्मिक धर्म का एक व्यापक अनुसंधानhttps://orcid.org/0009-0000-8083-0685vedanta 2.0 life - pen name -Agyat agyani—𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲“जो स...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 79 By CHIRANJIT TEWARY

निलु की बात सुनकर कुंम्भन गरजते हूए कहता है। हे मुर्ख मानव । कदाचित मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है के तुम मेरे वस्त्र की बात कर रहे हो। निलु बिड़ी का एक गहरी कस्त लगाकर कहती है। कदाचित...

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फल्गु को माता सीता का श्राप By Abhijeet Nayan

फल्गु का रहस्यये कहानी उस समय की है, जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दिनों में पृथ्वी पर भटकते हुए गया नगरी पहुँचे थे। गया उस समय भी पवित्र स्थान माना जाता था, जहाँ पित...

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सिंघनी माता का रहस्य - अध्याय 3 By Abhijeet Nayan

सिंघनी माता का रहस्य — अध्याय 3राजेश की बात सुनते ही चारों ओर सन्नाटा छा गया। कुछ क्षण तक कोई कुछ नहीं बोला। तभी उस सन्नाटे को चीरती हुई एक भारी आवाज गूँजी—“राजेश… क्या तुमने सच मे...

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दुख का कारण 'अति' By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (२९) की व्याख्या बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।ऋगुवेद --१/१६४/३२भाव--बहुत सन्तान वाले बहुत कष्ट उठाते हैं।मंत्र:“बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।”— ऋग्वेद १/१६४/३२पदच्छेद--बहु-प...

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शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर By Vedanta Life Agyat Agyani

  शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर जीवन कोई ऐसी पहेली नहीं है जिसे बाहर की कोई सत्ता (धर्म, विज्ञान या राजनीति) सुलझा सके। यह एक बहती हुई धारा है, जिसका आनंद केवल 'अभी' और...

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स्वर्ग का दरवाजा - 3 By Author Pawan Singh

इस एपिसोड को हम एक सवाल से शुरू करते हैं। चलिए बताइए क्या आपको आपका गोत्र याद हैं? अगर आप भारतवर्ष में रहते हैं तो आप किसी न किसी ऋषि परंपरा का हिस्सा ज़रूर होंगे। ये ऐसा समझिए किस...

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भक्त का रक्षक भगवान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (३०) की व्याख्या यह मन्त्र ऋग्वेद (मण्डल 7, सूक्त 32, मन्त्र 14) है। यह सूक्त मुख्यतः इन्द्र की स्तुति में है।मन्त्र---कस्तमिन्द्र त्वावसुमा मर्त्यो दधर्षति।(ऋग्वेद...

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शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदान्त 2.0: शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान — एक वृहद शोध रिपोर्ट प्रस्तुत शोध रिपोर्ट 'अज्ञात अज्ञानी' (Agyat Agyani) द्वारा प्रतिपादित 'वेदान्त 2.0' के दार्शनिक और वैज...

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स्त्री - दृश्य नहीं, दर्शन है By Vedanta Life Agyat Agyani

Vedanta 2.0 Life स्त्री — दृश्य नहीं, दर्शन है धर्म, पाखंड और विश्वगुरु का मौन सत्यजब पुरुष स्त्री को समझ नहीं पाया, तभी धर्म पैदा हुआ। जब प्रेम नहीं समझा गया, तभी शास्त्र लिखे गए।...

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आन्तरिक पुकार By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद (31)की व्याख्या "इमं न: श्रणुहवम्"ऋगुवेद --10/26/9भावार्थ--हे ईश्वर मेरी प्रार्थना को सुनो। ऋग्वेद में प्रयुक्त पद “इमं नः शृणु हवम्” (मेरी/हमारी प्रार्थना को सुनो) कई सूक्त...

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अप्प दीपो भवः...- बोधार्थी रौनक़ । By Raunak

रांची की वह सुबह आज भी याद है...ठंडी हवा थी...सड़कें धीरे-धीरे जाग रही थीं...और मैं किताबों की तलाश में था।किताबें...जो सिर्फ पन्ने नहीं होतीं...कई बार वे मनुष्य को नया मनुष्य बना...

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‌परम शक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (32) की व्याख्या "स्तोतुर्मघवन काममा पृण"। ऋगुवेद ---१/५७/५भावार्थ --हे प्रभु! भक्त की कामनाओं को पूर्ण करो। मंत्र :“स्तोतुर्मघवन् काममापृण।”— ऋगुवेद --1.57.5पदच्छेद...

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वेदान्त 2.0 - भाग 39 By Vedanta Life Agyat Agyani

 ,  वेदांत 2.0: 'अज्ञात अज्ञानी' के अस्तित्व-दर्शन और वैज्ञानिक अद्वैत का गहन विश्लेषणआधुनिक दार्शनिक चिंतन के धरातल पर 'वेदांत 2.0' का उद्भव एक ऐसी क्रांतिकारी घटन...

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चेतना का स्रोत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या"विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि"भावार्थ --हे प्रभु ! सारी विद्याओं का आदि‌ मूल‌ तू ही‌‌ है।मंत्र —विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2पदच्छेद-विश्वेष...

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लेकिन जतिन जैसे ही कमरे से बाहर निकलता है । अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन महागुरु तुमसे क्या कह रहे थे। " फिर जतिन कहता है महागुरु ने कहा है। जो उन्होंने कहा है वह किसी को भी मत बता...

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वह देवों का देव By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या-- "देवो देवनामसि"ऋग्वेद- 1-94-13अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है।विस्तृत भावार्थ :इस मन्त्र में परमात्मा की सर्वोच्चता बताई गई है। संसार में जो भी...

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ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 8 By Amir Ali Daredia

ઇસ્લામિક સ્ટોરી                             8      શોએબે ઉપરથી નીચે સુધી પહેલા તો મુસાનુ બરાબર નિરીક્ષણ કર્યું. તંદુરસ્ત.ખડતલ અને મજબૂત શરીર હતુ હઝરત મુસા(av) નુ.નિરીક્ષણ કરી લીધા...

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मुक्ति की कामना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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જીવન જીવવાની સાચી રીત શું છે? By Dada Bhagwan

જીવન જીવવાની સાચી કળા છે, ક્લેશ વિના જીવન જીવવું! દુર્લભ મનુષ્ય અવતાર મળ્યો, તો જીવન જીવવાનો હેતુ શો છે, એનો વિચાર આવવો જોઈએ. જન્મથી લઈને મૃત્યુ સુધીના જીવનના દરેક તબક્કામાં આપણે ભ...

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सर्वभूतहितेरत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत / नहींनः = हमारीप्रजा = सन्तान, ल...

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