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सनम By shikha

मुंबई की एक सर्द सुबह...

समंदर की लहरें शांत थीं, लेकिन शहर के बीचोंबीच एक तूफानी शख्सियत की एंट्री होने वाली थी।

काली Mercedes-Benz Maybach का दरवाज़ा खुला, और धुएं की तरह ब...

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अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तान। By kajal jha

एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक

पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली।

लेकिन अब—

यहाँ सिर्फ सन्नाटा था।

ऐसा सन्नाटा, जो कानों...

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वो कौन थी? By sapna

"दुनिया में कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हें हमारा दिमाग तो नहीं मानता, लेकिन हमारी रूह महसूस कर सकती है। हम अक्सर अंधेरे रास्तों पर चलते हुए पीछे मुड़कर देखते हैं, यह सोचकर कि...

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अंजामे मुहाब्बत By Sarah

ठंडी हवा के झोंके पेड़ो को झूमने पर मजबूर कर रहे थे।शाम का धुंदलका छा रहा था। हर चीज सुर्खी लिए हुए महसूस हो रही थी।सूरज नीले आसमान पर अपनी मंजिल तय करता हुआ चारों तरफ सुर्खी बिखेर...

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जेहादन By Pradeep Shrivastava

वह चार साल बाद अपने घर पहुँची लेकिन गेट पर लगी कॉल-बेल का स्विच दबाने का साहस नहीं कर पाई। क़रीब दस मिनट तक खड़ी रही। उसके हाथ कई बार स्विच तक जा-जा कर ठहर गए। जून की तपा देने वाली...

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तुम मेरे हो By NEELOMA

सुबह की किरणें कमरे में फैल चुकी थीं। लगभग 45-46 का चौबे, पहलवान जैसा गठीला शरीर लिए, आँगन में कसरत कर रहा था। उसकी भारी आवाज़ गूँजी—

“नीचे आ जा और कसरत कर, वरना नाश्ता नहीं मिल...

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Red Love By BleedingTypewriter

मैं हूँ Jachu — एक writer, जो अब तक मर्डर, थ्रिलर और क्राइम की दुनिया में जीती आई है।
लेकिन आज... कुछ अलग है।
आज मैं एक love story लिखने जा रही हूँ। और नहीं, ये सिर्फ कहानी नहीं...

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सिंहासन By W.Brajendra

रहस्यमयी दस्तावेज़

जयपुर की एक पुरानी लाइब्रेरी में, किताबों की धूल भरी अलमारियों के बीच, इतिहास के शोधकर्ता आरव मल्होत्रा को एक फटी-पुरानी डायरी मिली। वह रोज़ाना किसी नए राज की...

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बेपनाह प्यार By Kridha Raguvanshi

प्यार, एक चार अक्षर से बनी शब्द। लेकिन ये छोटी सी शब्द समुद्र से ज्यादा गहराई और कभी न रुकने वाली लहरों की तरह है। इस विश्व में हर किसी को प्यार होता है, लेकिन सच्चा प्यार नहीं। अक...

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अनकही दास्तां (शानवी अनंत) By Akshay Tiwari

(एक भावनात्मक प्रेम कहानी)

दोस्तों,
मेरा नाम अनंत है।
मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मा, जहां सुबह की शुरुआत होती है घर के पास के मंदिर की घंटियों से और रातें ढलती...

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हनुमत हांक - समीक्षा व परिचय By Ram Bharose Mishra

हनुमत हांक' बलदेव दास जी द्वारा लिखी गई बड़ी महत्वपूर्ण पुस्तक है । यद्यपि यह सामान्य रूप से सब जगह नहीं पाई जाती, मंदिरों, बड़े पुस्तकालयों और पुस्तक विक्रेताओं से मांगने पर भ...

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शांतनु By Siddharth Chhaya

शांतनु मातृभारती पर इसी नाम से अत्यंत लोकप्रिय साबित हुए गुजराती उपन्यास का हिन्दी रूपांतरण है इस उपन्यास में एक तरफ़ा प्रेम और दोस्ती की ऊंचाईयों को बड़ी परिपक्वता से दर्शाया गया ह...

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Imperfectly Fits You By rakhi

सखी (मन मे) - आप मेरे हो सत्या और मैं आपकी हु। में आपकी ही रहूंगी । में आपकी हंसिनी हु जो अकेली रह सकती है मर सकती है पर कही ओर नहीं जा सकती । दुनिया की रिवाजों जरूरत मुझे नहीं है...

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एक अदद फ्लैट By Arpan Kumar

नंदलाल यादव दिल्ली में नौकरी करते हैं और साहिबाबाद में किराए के एक फ्लैट में रहते हैं। लोकल ट्रेन से आना-जाना करते हैं। आई.टी.ओ. पर उतर कर बस से आर.के.पुरम जाते हैं।सुबह शाम सप्ताह...

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दूध का क़र्ज़ By S Sinha

एक दिन जब तनुजा ने अपने घर फोन किया , उसके पापा ने फोन उठा कर कहा “ हाँ बेटा , बोल कैसी चल रही है तेरी पढ़ाई ? “

“ वो सब ठीक है , मुझे आपलोगों को एक खुशखबरी देनी है . “

“...

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सुनो पुनिया By Roop Singh Chandel

सुनो पुनिया (1) घाम की चादर आंगन के पूर्वी कोने में सिकुड़ गई थी. पुनिया ने मुंडेर की ओर देखा और अनुमान लगाया सांझ होने में अधिक देर नहीं है. ठंड का असर काफी देर पहले से ही बढ़ने लगा...

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सुनहरी गलियों का प्यार By Rekha Rani

जयपुर का बस स्टॉप शाम को और भी गुलाबी लगता है। हवा में गुलाब जल की महक है, और सामने की दीवार पर जान्हवी पेंट कर रही है — एक अधूरा मोर जिसकी आँखों में उदासी है।

जान्हवी कोई आम...

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लड़का होना आसान नहीं होता By parth Shukla

कितनी अजीब बात है ना...
बचपन जहाँ खेल और खिलौनों का होना चाहिए,
वहाँ कुछ बच्चों के हिस्से सिर्फ ताने, ज़िम्मेदारियाँ और रोने की मनाही आती है।

क्यों?
क्योंकि वो "लड़का&#34...

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बडी प्रतिमा By Sudha Trivedi

एक झुंड भरकर युवा आधुनिक लडकियां टीचर्स ट्रेंनिंग काॅलेज के गेट पर रुककर यह देहाती गीत गा रही हैं। सभी लडकियों ने ट्रेनिंग काॅलेज की यूनिफाॅर्म पहन रखी है - राजकमल की सफेद काॅटन सा...

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फ्लाई किल्लर By SR Harnot

फ्लाई किल्लर एस. आर. हरनोट (1) उस चिनार के पेड़ पर सारे मौसम रहते थे। उसके नीचे लगी लोहे की बैंच अंग्रेजों के ज़माने की थी जिस पर वह बैठा रहता था। वह कई बार अपनी उंगलियों के पोरों पर...

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पहली मुलाक़ात By vaghasiya

छोटे शहर बरेली के एक साधारण से कॉलेज में, नया सत्र शुरू हो चुका था। कॉलेज की भीड़ में, हलके भूरे रंग की शर्ट और नीली जींस पहने एक लड़का, कुछ घबराया, कुछ उत्साहित-सा कैंपस में प्रवे...

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ग़ज़ल - सहारा में चल के देखते हैं By alka agrwal raj

ख़ुलूस ओ प्यार के सांचे में ढल के देखते हैं।

जफ़ा की क़ैद से बाहर निकल के देखते हैं।।



हम अपने आप को थोडा बदल के देखते हैं।

चलो के हम भी हक़ीक़त पे चल के देखते हैं।।...

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अंधेरे से इंसाफ तक By mood Writer

सागरपुर नाम का शहर, जो न तो पूरी तरह गाँव था और न ही पूरी तरह महानगर। यहाँ न तो मेट्रो की गूंज थी और न ही ऊँची-ऊँची इमारतों की चकाचौंध। लेकिन यहाँ के लोग अपनी ज़िंदगी जीने के लिए स...

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राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2) By Soni shakya

इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की....

शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है।

क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें?

तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...

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तब राहुल सांकृत्यायन को नहीं पढ़ा था By Arpan Kumar

यह कहानी अनुरंजन की कैशोर्य कल्पनाशीलता की है। उसकी अनगढ़ता और दुःसाहस की है। एक ग्रामीण किशोर की अदम्य जिजीविषा भी है यहाँ। जाने क्या है इस कहानी में और जाने क्या नहीं है! कुछ भी ह...

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कामिनी एक अजीब दास्तां By Chetan Joshi

एक एसी हारर कहानी जो पल पल रोमांच और रहस्य से भरी है, जिसे पढ़ते समय पाठक को लगता है व‌ह किसी रहस्यमय दुनिया में आ गया है

कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है और सब कुछ पाने के लिए...

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हनुमान साठिका लेखक महात्मा बलदेव दास कृत By Ram Bharose Mishra

दोहा- श्री गणपति मंगल करण हरण अमंगल मूल । मंगल मूरति मोहि पर रहहु सदा अनुकूल ॥१॥ संवत सर श्रुति खंड विधु कार्तिक शुभ सित पक्ष । छठि मंगल बलदेव कृत हनुमत विनय प्रत्यक्ष ॥२॥(

दोहे...

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JANVI - राख से उठती लौ By Luqman Gangohi

प्रस्तावना"वो कहते हैं न, कि लड़कियां कमजोर होती हैं...पर मैंने तो देखा है-एक लड़की अपने टूटने की आवाज़ भी अंदर ही दबा लेती है,और जब दुनिया उसे गिरा देती है,तब वो जमीन से नहीं...

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साँसत में काँटे By Pradeep Shrivastava

उसकी आँखों में भर आए आँसू उसके गालों पर गिरने ही वाले थे। आँसुओं से भरी उसकी आँखों में भीड़ और उनके हाथों में लहराते तिरंगे के अक्स दिखाई दे रहे थे। ज़ीरो डिग्री टेम्प्रेचर वाली कड़...

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My Mafia Boyfriend By unknown writer

एक अंडरवर्ल्ड की परछाईं में पनपती मासूम मोहब्बत की दास्तान......
Characters introduction............


-वीर सैयद (28 वर्ष) :-
"शहर में डर का दूसरा नाम — पर...

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जिंदगी की दूसरे किनारा By AbhiNisha

जिंदगी के पार जिंदगी

कहते हैं जिंदगी एक रहस्य से भरा हुआ है

एक पजल की तरह

जिंदगी की हर मोड़ हर रास्ता है

जिसे सुलझाना आसान नहीं

और जिंदगी की कहानी एक पजल है...

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ख़ज़ाने का नक्शा By Naina Khan

लखनऊ की गलियों से लेकर राजस्थान की रेत तक, दो नौजवान — रैयान मीर और ज़ेहरा नाज़ — एक ऐसे नक़्शे की तलाश में निकलते हैं जो सदियों पुराने सुल्तान बहादुर शाह के गुमशुदा ख़ज़ाने तक पहु...

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इश्क के साये में By kajal jha

खामोश पेंटिंग की पहली साँस

पुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस शाम भी आधी अँधेरे में डूबी हुई थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्थरों से टकरा रही थीं और अंदर हवा में पुरान...

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फ़ाइनल डिसीज़न By Pradeep Shrivastava

आज वह फिर नस्लवादी कॉमेंट की बर्छियों से घायल होकर घर लौटी है। वह रास्ते भर कार ड्राइव करती हुई सोचती रही कि आख़िर ऐसे कॅरियर पैसे का क्या फ़ायदा जो सम्मान सुख-चैन छीन ले। क्या मैं ग...

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छुपी हुई शादी By Agni Jwala

उसका शरीर ज्वालामुखी के लावा जैसी तेज़ गर्मी से जल रहा था, और एकमात्र व्यक्ति जो उसे बचा सकता था, वह उसके सामने खड़ा आदमी था......

वह ठंडी संगमरमर जैसी त्वचा से कसकर चिपक गई, उस...

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तेरा ज़हर, मेरी मोहब्बत By Yasmeen Khan

19 साल की थी मैं, जब ज़िंदगी ने मुझे बेच दिया था…”

बरसों से जिसे घर कहा था, उसी घर के कोने में बैठी मैं उस दिन अपना वजूद समेट रही थी। माँ की आँखें भीगी थीं, लेकिन लाचार। बाप… वो...

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक By jassu

मौत का दस्तक
​बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...

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उस पार भी तू By Nirbhay Shukla

कुछ प्रेम कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं... और कुछ अधूरी होकर भी अमर हो जाती हैं।
यह कहानी भी उन्हीं में से एक है।

‘प्रकाश और राधिका’— दो नाम नहीं, दो आत्माएँ थीं जो एक-दूसरे की सा...

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इक्क ट्का तेरी चाकरी वे माहिया... By Jaishree Roy

इक्क ट्का तेरी चाकरी वे माहिया... जयश्री रॉय (1) पेड़ के घने झुरमुटों के बीच से अचानक आसमान का वह टुकड़ा किसी जादू की तश्तरी की तरह झप से निकला था- चमचमाता नीला, चाँद-तारों से भरा हु...

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‎समर्पण से आंगे By vikram kori

सुबह के छह बज रहे थे।
‎शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज़िंदगी में नींद के लिए जगह कब की खत्म हो चुकी थी।

‎किराए के छोटे से कमरे में रखे एक पुराने से पलंग पर वह...

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उलझे रिश्ते By Akash

बस में बहुत भीड थी, लोगों को खड़े खड़े सफर कर रहे थे। बैठने वाले भी दांत को कसके जा रहे थे। लेकिन उन्हीं बीच एक युवक जो दिखने में तो एक सीधा साधा २० २१ साल का जवान लड़का था, सरल सफ...

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दूध का दरिया एक वरदान बना अभिशाप By टीना सुमन

भागती दौड़ती मुंबई का एक पॉश एरिया और वहां पर स्थित ठाकुर सूर्यभान सिहं की आलीशान हवेली।हवेली में रहने वाले ठाकुर सूर्यभान और उनका बेटा ठाकुर प्रताप सिंह उनकी पत्नी ज्योत्सना और...

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गाजा वार By suhail ansari

इजरायल-हमास संघर्ष के वास्तविक तथ्यों (जैसे, गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 55,223 मौतें, 1.8 मिलियन विस्थापित) पर आधारित होगी। यह काल्पनिक लेकिन प्रामाणिक कहानी आमिना (28, शिक्...

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पर्दे के पीछे By ARTI MEENA

सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...

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प्रथा : एक ज़िन्दगी, कई इम्तेहान By shrutika dhole

वो उस वक्त सिर्फ 12 साल की थी।

एक छोटी सी लड़की, जिसकी सुबह बाकी बच्चों जैसी हँसी-खुशी से नहीं, बल्कि घुटन और ज़िम्मेदारियों से शुरू होती थी।

वो बाकी बच्चों से अलग स्कूल जाने...

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मेरे दूल्हे को मरना होगा By Varun Vilom

घर भरा हुआ था।

आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक।

शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ।

सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...

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जिंदगी संघर्ष से सुकून तक कविताएं By Kuldeep Singh

️®️ Kuldip Singh ️ Dip ®️ ️ dedicated to ️My lovely family and my friends️ Also dedicated to ️  All wonderful readers Hello everyone  Book summary नमस्कार मेरा नाम कुलदीप सिंह है...

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तेरा इंतकाम, मेरा इश्क़ - एक अनसुनी मोहब्बत की सीरीज By Rishabh Sharma

बनारस का वो महीना सावन का था, और आसमान में छाई थी हल्की हल्की धुंध।
शहर की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी में पहला दिन था काव्या का। नीली सलवार-कुर्ता, एक हाथ में किताबें, दूसरे में छतरी...

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मेनका By Raj Phulware

अध्याय 1 — रामगढ़ में मेनका का आगमन

सुबह की धूप अभी-अभी पहाड़ियों के पीछे से झाँकने लगी थी।
रामगढ़ गाँव की मिट्टी से उठती हल्की भाप, खपरैल के घरों की छतों से टपकती ओस की बूंदें...

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उस बाथरूम में कोई था By Varun Vilom

हिमालय की ढलानों पर रात पूरी तरह उतर चुकी थी। देवदार के घने जंगल के बीच बने छोटे-से कैम्प में एक अलाव जल रहा था, जिसकी लपटें सबके चेहरों पर नारंगी रोशनी बिखेर रही थीं। ठंडी हवा तम्...

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सनम By shikha

मुंबई की एक सर्द सुबह...

समंदर की लहरें शांत थीं, लेकिन शहर के बीचोंबीच एक तूफानी शख्सियत की एंट्री होने वाली थी।

काली Mercedes-Benz Maybach का दरवाज़ा खुला, और धुएं की तरह ब...

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अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तान। By kajal jha

एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक

पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली।

लेकिन अब—

यहाँ सिर्फ सन्नाटा था।

ऐसा सन्नाटा, जो कानों...

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वो कौन थी? By sapna

"दुनिया में कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हें हमारा दिमाग तो नहीं मानता, लेकिन हमारी रूह महसूस कर सकती है। हम अक्सर अंधेरे रास्तों पर चलते हुए पीछे मुड़कर देखते हैं, यह सोचकर कि...

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अंजामे मुहाब्बत By Sarah

ठंडी हवा के झोंके पेड़ो को झूमने पर मजबूर कर रहे थे।शाम का धुंदलका छा रहा था। हर चीज सुर्खी लिए हुए महसूस हो रही थी।सूरज नीले आसमान पर अपनी मंजिल तय करता हुआ चारों तरफ सुर्खी बिखेर...

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जेहादन By Pradeep Shrivastava

वह चार साल बाद अपने घर पहुँची लेकिन गेट पर लगी कॉल-बेल का स्विच दबाने का साहस नहीं कर पाई। क़रीब दस मिनट तक खड़ी रही। उसके हाथ कई बार स्विच तक जा-जा कर ठहर गए। जून की तपा देने वाली...

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तुम मेरे हो By NEELOMA

सुबह की किरणें कमरे में फैल चुकी थीं। लगभग 45-46 का चौबे, पहलवान जैसा गठीला शरीर लिए, आँगन में कसरत कर रहा था। उसकी भारी आवाज़ गूँजी—

“नीचे आ जा और कसरत कर, वरना नाश्ता नहीं मिल...

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Red Love By BleedingTypewriter

मैं हूँ Jachu — एक writer, जो अब तक मर्डर, थ्रिलर और क्राइम की दुनिया में जीती आई है।
लेकिन आज... कुछ अलग है।
आज मैं एक love story लिखने जा रही हूँ। और नहीं, ये सिर्फ कहानी नहीं...

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सिंहासन By W.Brajendra

रहस्यमयी दस्तावेज़

जयपुर की एक पुरानी लाइब्रेरी में, किताबों की धूल भरी अलमारियों के बीच, इतिहास के शोधकर्ता आरव मल्होत्रा को एक फटी-पुरानी डायरी मिली। वह रोज़ाना किसी नए राज की...

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बेपनाह प्यार By Kridha Raguvanshi

प्यार, एक चार अक्षर से बनी शब्द। लेकिन ये छोटी सी शब्द समुद्र से ज्यादा गहराई और कभी न रुकने वाली लहरों की तरह है। इस विश्व में हर किसी को प्यार होता है, लेकिन सच्चा प्यार नहीं। अक...

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अनकही दास्तां (शानवी अनंत) By Akshay Tiwari

(एक भावनात्मक प्रेम कहानी)

दोस्तों,
मेरा नाम अनंत है।
मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मा, जहां सुबह की शुरुआत होती है घर के पास के मंदिर की घंटियों से और रातें ढलती...

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हनुमत हांक - समीक्षा व परिचय By Ram Bharose Mishra

हनुमत हांक' बलदेव दास जी द्वारा लिखी गई बड़ी महत्वपूर्ण पुस्तक है । यद्यपि यह सामान्य रूप से सब जगह नहीं पाई जाती, मंदिरों, बड़े पुस्तकालयों और पुस्तक विक्रेताओं से मांगने पर भ...

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शांतनु By Siddharth Chhaya

शांतनु मातृभारती पर इसी नाम से अत्यंत लोकप्रिय साबित हुए गुजराती उपन्यास का हिन्दी रूपांतरण है इस उपन्यास में एक तरफ़ा प्रेम और दोस्ती की ऊंचाईयों को बड़ी परिपक्वता से दर्शाया गया ह...

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Imperfectly Fits You By rakhi

सखी (मन मे) - आप मेरे हो सत्या और मैं आपकी हु। में आपकी ही रहूंगी । में आपकी हंसिनी हु जो अकेली रह सकती है मर सकती है पर कही ओर नहीं जा सकती । दुनिया की रिवाजों जरूरत मुझे नहीं है...

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एक अदद फ्लैट By Arpan Kumar

नंदलाल यादव दिल्ली में नौकरी करते हैं और साहिबाबाद में किराए के एक फ्लैट में रहते हैं। लोकल ट्रेन से आना-जाना करते हैं। आई.टी.ओ. पर उतर कर बस से आर.के.पुरम जाते हैं।सुबह शाम सप्ताह...

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दूध का क़र्ज़ By S Sinha

एक दिन जब तनुजा ने अपने घर फोन किया , उसके पापा ने फोन उठा कर कहा “ हाँ बेटा , बोल कैसी चल रही है तेरी पढ़ाई ? “

“ वो सब ठीक है , मुझे आपलोगों को एक खुशखबरी देनी है . “

“...

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सुनो पुनिया By Roop Singh Chandel

सुनो पुनिया (1) घाम की चादर आंगन के पूर्वी कोने में सिकुड़ गई थी. पुनिया ने मुंडेर की ओर देखा और अनुमान लगाया सांझ होने में अधिक देर नहीं है. ठंड का असर काफी देर पहले से ही बढ़ने लगा...

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सुनहरी गलियों का प्यार By Rekha Rani

जयपुर का बस स्टॉप शाम को और भी गुलाबी लगता है। हवा में गुलाब जल की महक है, और सामने की दीवार पर जान्हवी पेंट कर रही है — एक अधूरा मोर जिसकी आँखों में उदासी है।

जान्हवी कोई आम...

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लड़का होना आसान नहीं होता By parth Shukla

कितनी अजीब बात है ना...
बचपन जहाँ खेल और खिलौनों का होना चाहिए,
वहाँ कुछ बच्चों के हिस्से सिर्फ ताने, ज़िम्मेदारियाँ और रोने की मनाही आती है।

क्यों?
क्योंकि वो "लड़का&#34...

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बडी प्रतिमा By Sudha Trivedi

एक झुंड भरकर युवा आधुनिक लडकियां टीचर्स ट्रेंनिंग काॅलेज के गेट पर रुककर यह देहाती गीत गा रही हैं। सभी लडकियों ने ट्रेनिंग काॅलेज की यूनिफाॅर्म पहन रखी है - राजकमल की सफेद काॅटन सा...

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फ्लाई किल्लर By SR Harnot

फ्लाई किल्लर एस. आर. हरनोट (1) उस चिनार के पेड़ पर सारे मौसम रहते थे। उसके नीचे लगी लोहे की बैंच अंग्रेजों के ज़माने की थी जिस पर वह बैठा रहता था। वह कई बार अपनी उंगलियों के पोरों पर...

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पहली मुलाक़ात By vaghasiya

छोटे शहर बरेली के एक साधारण से कॉलेज में, नया सत्र शुरू हो चुका था। कॉलेज की भीड़ में, हलके भूरे रंग की शर्ट और नीली जींस पहने एक लड़का, कुछ घबराया, कुछ उत्साहित-सा कैंपस में प्रवे...

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ग़ज़ल - सहारा में चल के देखते हैं By alka agrwal raj

ख़ुलूस ओ प्यार के सांचे में ढल के देखते हैं।

जफ़ा की क़ैद से बाहर निकल के देखते हैं।।



हम अपने आप को थोडा बदल के देखते हैं।

चलो के हम भी हक़ीक़त पे चल के देखते हैं।।...

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अंधेरे से इंसाफ तक By mood Writer

सागरपुर नाम का शहर, जो न तो पूरी तरह गाँव था और न ही पूरी तरह महानगर। यहाँ न तो मेट्रो की गूंज थी और न ही ऊँची-ऊँची इमारतों की चकाचौंध। लेकिन यहाँ के लोग अपनी ज़िंदगी जीने के लिए स...

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राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2) By Soni shakya

इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की....

शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है।

क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें?

तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...

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तब राहुल सांकृत्यायन को नहीं पढ़ा था By Arpan Kumar

यह कहानी अनुरंजन की कैशोर्य कल्पनाशीलता की है। उसकी अनगढ़ता और दुःसाहस की है। एक ग्रामीण किशोर की अदम्य जिजीविषा भी है यहाँ। जाने क्या है इस कहानी में और जाने क्या नहीं है! कुछ भी ह...

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कामिनी एक अजीब दास्तां By Chetan Joshi

एक एसी हारर कहानी जो पल पल रोमांच और रहस्य से भरी है, जिसे पढ़ते समय पाठक को लगता है व‌ह किसी रहस्यमय दुनिया में आ गया है

कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है और सब कुछ पाने के लिए...

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हनुमान साठिका लेखक महात्मा बलदेव दास कृत By Ram Bharose Mishra

दोहा- श्री गणपति मंगल करण हरण अमंगल मूल । मंगल मूरति मोहि पर रहहु सदा अनुकूल ॥१॥ संवत सर श्रुति खंड विधु कार्तिक शुभ सित पक्ष । छठि मंगल बलदेव कृत हनुमत विनय प्रत्यक्ष ॥२॥(

दोहे...

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JANVI - राख से उठती लौ By Luqman Gangohi

प्रस्तावना"वो कहते हैं न, कि लड़कियां कमजोर होती हैं...पर मैंने तो देखा है-एक लड़की अपने टूटने की आवाज़ भी अंदर ही दबा लेती है,और जब दुनिया उसे गिरा देती है,तब वो जमीन से नहीं...

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साँसत में काँटे By Pradeep Shrivastava

उसकी आँखों में भर आए आँसू उसके गालों पर गिरने ही वाले थे। आँसुओं से भरी उसकी आँखों में भीड़ और उनके हाथों में लहराते तिरंगे के अक्स दिखाई दे रहे थे। ज़ीरो डिग्री टेम्प्रेचर वाली कड़...

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My Mafia Boyfriend By unknown writer

एक अंडरवर्ल्ड की परछाईं में पनपती मासूम मोहब्बत की दास्तान......
Characters introduction............


-वीर सैयद (28 वर्ष) :-
"शहर में डर का दूसरा नाम — पर...

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जिंदगी की दूसरे किनारा By AbhiNisha

जिंदगी के पार जिंदगी

कहते हैं जिंदगी एक रहस्य से भरा हुआ है

एक पजल की तरह

जिंदगी की हर मोड़ हर रास्ता है

जिसे सुलझाना आसान नहीं

और जिंदगी की कहानी एक पजल है...

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ख़ज़ाने का नक्शा By Naina Khan

लखनऊ की गलियों से लेकर राजस्थान की रेत तक, दो नौजवान — रैयान मीर और ज़ेहरा नाज़ — एक ऐसे नक़्शे की तलाश में निकलते हैं जो सदियों पुराने सुल्तान बहादुर शाह के गुमशुदा ख़ज़ाने तक पहु...

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इश्क के साये में By kajal jha

खामोश पेंटिंग की पहली साँस

पुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस शाम भी आधी अँधेरे में डूबी हुई थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्थरों से टकरा रही थीं और अंदर हवा में पुरान...

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फ़ाइनल डिसीज़न By Pradeep Shrivastava

आज वह फिर नस्लवादी कॉमेंट की बर्छियों से घायल होकर घर लौटी है। वह रास्ते भर कार ड्राइव करती हुई सोचती रही कि आख़िर ऐसे कॅरियर पैसे का क्या फ़ायदा जो सम्मान सुख-चैन छीन ले। क्या मैं ग...

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छुपी हुई शादी By Agni Jwala

उसका शरीर ज्वालामुखी के लावा जैसी तेज़ गर्मी से जल रहा था, और एकमात्र व्यक्ति जो उसे बचा सकता था, वह उसके सामने खड़ा आदमी था......

वह ठंडी संगमरमर जैसी त्वचा से कसकर चिपक गई, उस...

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तेरा ज़हर, मेरी मोहब्बत By Yasmeen Khan

19 साल की थी मैं, जब ज़िंदगी ने मुझे बेच दिया था…”

बरसों से जिसे घर कहा था, उसी घर के कोने में बैठी मैं उस दिन अपना वजूद समेट रही थी। माँ की आँखें भीगी थीं, लेकिन लाचार। बाप… वो...

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक By jassu

मौत का दस्तक
​बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...

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उस पार भी तू By Nirbhay Shukla

कुछ प्रेम कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं... और कुछ अधूरी होकर भी अमर हो जाती हैं।
यह कहानी भी उन्हीं में से एक है।

‘प्रकाश और राधिका’— दो नाम नहीं, दो आत्माएँ थीं जो एक-दूसरे की सा...

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इक्क ट्का तेरी चाकरी वे माहिया... By Jaishree Roy

इक्क ट्का तेरी चाकरी वे माहिया... जयश्री रॉय (1) पेड़ के घने झुरमुटों के बीच से अचानक आसमान का वह टुकड़ा किसी जादू की तश्तरी की तरह झप से निकला था- चमचमाता नीला, चाँद-तारों से भरा हु...

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‎समर्पण से आंगे By vikram kori

सुबह के छह बज रहे थे।
‎शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज़िंदगी में नींद के लिए जगह कब की खत्म हो चुकी थी।

‎किराए के छोटे से कमरे में रखे एक पुराने से पलंग पर वह...

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उलझे रिश्ते By Akash

बस में बहुत भीड थी, लोगों को खड़े खड़े सफर कर रहे थे। बैठने वाले भी दांत को कसके जा रहे थे। लेकिन उन्हीं बीच एक युवक जो दिखने में तो एक सीधा साधा २० २१ साल का जवान लड़का था, सरल सफ...

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दूध का दरिया एक वरदान बना अभिशाप By टीना सुमन

भागती दौड़ती मुंबई का एक पॉश एरिया और वहां पर स्थित ठाकुर सूर्यभान सिहं की आलीशान हवेली।हवेली में रहने वाले ठाकुर सूर्यभान और उनका बेटा ठाकुर प्रताप सिंह उनकी पत्नी ज्योत्सना और...

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गाजा वार By suhail ansari

इजरायल-हमास संघर्ष के वास्तविक तथ्यों (जैसे, गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 55,223 मौतें, 1.8 मिलियन विस्थापित) पर आधारित होगी। यह काल्पनिक लेकिन प्रामाणिक कहानी आमिना (28, शिक्...

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पर्दे के पीछे By ARTI MEENA

सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...

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प्रथा : एक ज़िन्दगी, कई इम्तेहान By shrutika dhole

वो उस वक्त सिर्फ 12 साल की थी।

एक छोटी सी लड़की, जिसकी सुबह बाकी बच्चों जैसी हँसी-खुशी से नहीं, बल्कि घुटन और ज़िम्मेदारियों से शुरू होती थी।

वो बाकी बच्चों से अलग स्कूल जाने...

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मेरे दूल्हे को मरना होगा By Varun Vilom

घर भरा हुआ था।

आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक।

शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ।

सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...

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जिंदगी संघर्ष से सुकून तक कविताएं By Kuldeep Singh

️®️ Kuldip Singh ️ Dip ®️ ️ dedicated to ️My lovely family and my friends️ Also dedicated to ️  All wonderful readers Hello everyone  Book summary नमस्कार मेरा नाम कुलदीप सिंह है...

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तेरा इंतकाम, मेरा इश्क़ - एक अनसुनी मोहब्बत की सीरीज By Rishabh Sharma

बनारस का वो महीना सावन का था, और आसमान में छाई थी हल्की हल्की धुंध।
शहर की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी में पहला दिन था काव्या का। नीली सलवार-कुर्ता, एक हाथ में किताबें, दूसरे में छतरी...

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मेनका By Raj Phulware

अध्याय 1 — रामगढ़ में मेनका का आगमन

सुबह की धूप अभी-अभी पहाड़ियों के पीछे से झाँकने लगी थी।
रामगढ़ गाँव की मिट्टी से उठती हल्की भाप, खपरैल के घरों की छतों से टपकती ओस की बूंदें...

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उस बाथरूम में कोई था By Varun Vilom

हिमालय की ढलानों पर रात पूरी तरह उतर चुकी थी। देवदार के घने जंगल के बीच बने छोटे-से कैम्प में एक अलाव जल रहा था, जिसकी लपटें सबके चेहरों पर नारंगी रोशनी बिखेर रही थीं। ठंडी हवा तम्...

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