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मोहल्ला-ए-गुफ़्तगू By Deepak Bundela Arymoulik

जी हां ये बात सौ फीसदी बिलकुल सही हैं..एक मोहल्ला ही हैं जहां ज़माने भर की चर्चाए तों होती हैं लेकिन वो कभी खबरों में शामिल नहीं हो पाती हैं.. क्योंकि जो भी खबर कनाफूसी से शुरू होकर...

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तीन औरतों का घर By Rajni Gosain

"गली के कोने में हरे सफ़ेद रंग की मटमैली सी सफेदी लिए जो मकान हैं, वो देखिये जिसके आँगन में ईंट गारे की बनी दीवार से बाहर झांकता बड़ा सा नीम का पेड़ दिख रहा हैं! वहीं मकान हैं फरीद...

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अधूरी मोहब्बत By sapna

कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ प्यार और दोस्ती की परिभाषा बदल जाती है। बचपन की मासूम दोस्ती धीरे-धीरे दिल की गहराई में उतर जाती है, लेकिन समय, दूरी और परिस्थितियाँ...

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13वां दरवाज़ा By Vijeta Maru

गांव का नाम था भैरवपुर। चारों ओर ऊँचे पेड़ों से घिरा, एक ऐसा गांव जहां शाम ढलते ही लोग अपने दरवाज़े बंद कर लेते थे। गांव के बाहर एक पुरानी, टूटी-फूटी हवेली थी — राय हवेली। गांववालो...

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उधड़ा हुआ स्वेटर By Sudha Arora

उधड़ा हुआ स्वेटर सुधा अरोड़ा (1) यों तो उस पार्क को लवर्स पार्क कहा जाता था पर उसमें टहलने वाले ज्यादातर लोगों की गिनती वरिष्ठ नागरिकों में की जा सकती थी. युवाओं में अलस्सुबह उठने, ज...

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Ashvdhaama: एक युग पुरुष By bhagwat singh naruka

इस रचना के सभी पात्र ओर घटनाएं काल्पनिक है इनका किसी धर्म ओर जाति ,मानव ,पशु से कोई लेना देना नहीं है । ये मात्र मेरे दिमाग ओर मेरी लेखनी की उपज है इस कहानी के सारे राइट्स मेरे अधी...

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सेहरा में मैं और तू By Prabodh Kumar Govil

ओह! शुरू शुरू में ये अविश्वसनीय सा लगा था।

बिल्कुल असंभव! नहीं, ऐसा हो ही कैसे सकता है? इसकी कल्पना करना भी कल्पनातीत है।

आख़िर नियम कायदे भी तो कुछ चीज़ होती है या नहीं! ऐसा...

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बसंती की बसंत पंचमी By Prabodh Kumar Govil

ये दुख बरसों पुराना था। ये न मेरा था और न तेरा। ये सबका था। हर दिन का था। हर गांव का था। हर शहर का था।
नहीं- नहीं, ग़लती हो गई। शायद गांव का नहीं था, केवल शहर का था। जितना बड़ा शह...

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प्रेम - मेरे प्यार की शुरूआत By alaywritss

मेरे प्यार की शुरूआत कुछ इस तरह हुई की में कक्षा 10 के बाद मेरी स्कूल बदल गई और कक्षा 11 में मुझे एक लड़की पसंद आती हैं। वो बहुत ही सुंदर थी , उसकी सुंदरता कहूं तो यूं थी की वो एकद...

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Secrets of The Night By Amreen Khan

ब्लैक कार अपनी पूरी तेज रफ्तार में, खाली और काली सडक पर दौड रही थी. इंजन की गडगडाहट और टायरों की आवाज रात की खामोशी को चीर रही थी. कार के अंदर म्यूजिक फुल वॉल्यूम पर बज रहा था—सैंग...

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त्रिशूलगढ़: काल का अभिशाप By Gxpii

हवा में अजीब सी घुटन थी। आसमान में बादल थे, लेकिन बिजली नहीं चमक रही थी।
सिर्फ एक बेचैनी थी — जो हर दिशा से वेद को घेर रही थी।

उसका गांव छोटा था, शांत और पहाड़ियों से घिरा हुआ।...

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बाते अधूरी सी... By Priyanka Taank Bhati

मई का महीना था, रात काफी हो चुकी थी यही कोई लगभग रात के साढ़े ग्यारह बजे होंगे, सिद्धार्थ सड़क पर चला जा रहा था, तभी उसे कही से डॉगी के भौंकने की आवाज सुनाई दी, आवाज सुनते ही उसके...

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हम हैं अधूरे By Priyanka

एग्जाम के दिनों में, नेक्स्ट एंबीशन के बारे में, पढ़ाई के बारे में, गोल्स के बारे में, फ्यूचर के बारे में बस ऐसे ही बातें होती रही सुदीप और मोक्षा के बीच और दोनों में दोस्ती भी हो...

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रौशन राहें By Lokesh Dangi

गाँव की सड़कों पर धूल उड़ रही थी, और सूरज की गर्मी पूरे गाँव पर अपने कड़े हाथों से शासन कर रही थी। हिम्मतगढ़, एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेतों की हरियाली और घरों की छतों पर बिखरी मिट्टी...

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मृगतृष्णा By Saroj Verma

घना वन, पुष्पों और लताओं से सुशोभित बड़े-बडे, हरे-भरे और सुंदर वृक्ष, प्राय: वन्य जीव ऐसे ही निर्भीकता से स्वच्छंद विचरण करते हुए दिखाई दे जाएंगे,ये स्थान है अरण्य वन___ यहां अरण्य...

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Rebirth ...! By Reshma Janwekar

      अस्पताल में दवाओं का गंध हमेशा बना रहता था | और रक्तांश खुराना को इससे हमेशा से नफ़रत थी लेकिन इस वक्त वह उस गंध को मेहसूस नही कर पा रहा था |     रक्तांश इस वक्त वीआईपी वार्ड...

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नज़र से दिल तक By Payal Author

कभी-कभी ज़िंदगी में कोई ऐसा मोड़ आता है जहाँ सबकुछ पहले जैसा रहते हुए भी अचानक अलग लगने लगता है।कहानी है अनाया की — एक मासूम-सी लड़की, जिसके सपनों में सिर्फ़ एक ही ख्वाब था — डॉक्ट...

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काली किताब. By Shailesh verma

शैली: रहस्य, थ्रिलर, अलौकिक

अध्याय 1: पुरानी गलियों का रहस्य

लखनऊ की पुरानी चौक बाज़ार में कई गलियाँ ऐसी हैं जो मानो समय के साथ थम गई हों। एक ऐसी ही गली है — “क़ाफ़िला गली”,...

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महाराजा रणजीत सिंह By Sudhir Sisaudiya

आदिकाल से ही भारत देश में, जीवन के हर क्षेत्र में, असाधारण व्यक्तियों का प्रादुर्भाव होता रहा है। हमारा इतिहास ऐसे महान लोगों के नामों से भरा पड़ा है; जिनकी कला, साहित्य, राजनीति,...

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बात बिगड़ी है कुछ इस तरह By vishvnath yadav

हैलो मेरा नाम विकेश है मैं एक इंजीनियर हू और एक कंपनी में जॉब करता हु,
मैं कोई राइटर नही हू इसीलिए अगर मुझ से कोई गलती होजाए तो कृपीय माफ कर दीजिएगा ??
मैं अपने जीवन का एक छोटा स...

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सरजमीं By Saroj Verma

सरजमीं ,मुल्क,वतन,मातृभूमि,इन सब नामों से स्वदेश को सम्बोधित किया जाता है,कहते हैं जो देश पर फिद़ा होता है उसका नाम हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाता है,अपने मुल्क के वास्ते शहीद हो ज...

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लहरों की बाांसुरी By Suraj Prakash

रचना काल 2015

अभी वाशरूम में हूँ कि मोबाइल की घंटी बजी है। सुबह-सुबह कौन हो सकता है। सोचता हूँ और घंटी बजने देता हूँ। पता है जब तक तौलिया बाँध कर बाहर निकलूंगा, घंटी बजनी बंद हो...

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अबकी बार... लल्लन प्रधान By Bhupendra Singh chauhan

जगतपुरा....ऐसा गांव जो अब भी गांव है ।शहरों की चकाचौंध और आधुनिकता से दूर एकांत में बसे इस गांव की खूबी है कि यह अपने मे ही खुश हैं।इसकी अपनी दुनिया है।करीब...

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संयोग - अनोखी प्रेम कथा By Kishanlal Sharma

"धीरे धीरे अंधेरे को खदेड़कर उजाला धरती पर अपने पैर पसार रहा था।भोर का आगमन होते ही पेड़ो पर बैठे पक्षियों का कलरव स्वर गूंजने लगा।शीतल मन्द मन्द हवा बह रही थी।चारो तरफ हरियाली।...

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नागमणि By Vijay Sharma Erry

कुछ सच इतने गहरे, इतने रहस्यमयी होते हैं कि ज़िन्दगी की सारी परतें उधेड़ कर रख देते हैं। ऐसी ही एक सच्चाई छुपी है एक लड़की – तन्वी – की आँखों में। बचपन की एक घटना ने उसकी किस्मत बद...

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मॉटरनी का बुद्धु By सीमा बी.

"मॉटर जी खाना लग गया है, आप जल्दी से आ जाओ हम दोनो को बहुत जोरों की भूख लगी है", आवाज सुनकर भूपेंद्र जी ने जल्दी से अपनी किताब बंद की और डायनिंग टेबल पर पहुँच गए, जहाँ उनका...

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स्वतन्त्र सक्सेना की कहानियां - बद्री विशाल By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

स्वतन्त्र सक्सेना एक परिपक्व और विचारशील रचनाकार हैं, वे निबन्ध लेखक और कहानीकार हैं। उनकी कहानी जमीन से जुड़ी रहती हैं जो रोचक और विश्वसनीय भी होती हैं। भाषा पर उनका असाधारण अधिका...

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बारिश, चाय और तुम By सिद्धार्थ रंजन श्रीवास्तव

"अरे यार अब ये चीनी का डिब्बा कहाँ रखा है? नीलू ने जाने कहाँ रखा है? फ़ोन मिला कर फिर से पूछना पड़ेगा।" आकर्ष किचन में डब्बो से उलझता हुआ बड़बड़ा रहा था।

अभी आकर्ष जेब में स...

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बेवजह... By Harshad Molishree

बेवजह....भाग १....राजस्थान की जलाने देने वाली गर्मी मैं... एक लड़का जो महज १४ - १५ साल का होगा, सुनसान रास्ते पर लडखडाते हुए चल रहा है, पिघलादेने वाली गर्मी... सामने सब कुछ धुन्दला...

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मासूम गंगा के सवाल By Sheel Kaushik

मासूम गंगा के सवाल (लघुकविता-संग्रह) शील कौशिक (1) समर्पण उन सभी प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरण विद्वानों को जो प्रकृति को महसूसते हैं... जानते-समझते हैं और उसके प्रति कृतज्ञ हैं...

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आशिकी.....अब तुम ही हो। By vaishnavi Shukla

मां कमरे में बड़बड़ाते हुए दाखिल होती है ....ये लड़की पता नही कब सुधरेगी ...!!

वंदना: 8 बज गए है । सूर्य देवता सर पर है ,पर राजकुमारी अभी तक सोई हुई है ( वो खिड़की का परदा हटाते...

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अल्हड़ लड़की गीता By Shiv Shanker Gahlot

आप अकेले नहीं जो किसी खूबसूरत लड़की से प्यार करना चाहते हैं । कोई बिरला ही होगा जिसे ये चाहत न हो । पर ये वास्तव मे आधा सच है । आप किसी भी खूबसूरत लड़की से प्यार करने को तैयार हो ज...

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एक था लेखक By Prashant Salunke

यह कहानी एक वास्तविक लेखक के जीवन से बनाई है पर कहानी को रोमांचक बनाने के लिए लेखक ने अपनी कल्पनाओ का भरपूर इस्तमाल किया है इसलिये इस कहानीको सिर्फ एक कहानी के रूप में ही पढे.

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लिविंग विथ डाइंग By Makvana Bhavek

मेरी क्लासमेट ऋत्वि मेहता का अंतिम संस्कार एक बारिश वाले दिन हुआ। अंतिम संस्कार में बहुत से लोग आये होगे। उनकी संख्या और उनके आसु उसके जिवन की अहमियत दशा रहे होगे। अंतिम संस्कार से...

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पिया बसंती रे! By Saroj Prajapati

भाग-1 छुट्टी का दिन था। खुशी अपने टेरेस गार्डन में पौधों की निराई गुड़ाई में लगी हुई थी। चंपा का पौधा जो उसने सर्दियों से पहले लगाया था। बसंत का मौसम आते ही उसमें व उसके साथ साथ दू...

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लाल बैग By BleedingTypewriter

रात का समय था। एक बूढ़ा आदमी अपने पुराने से घर में अकेला बैठा था। सामने टीवी पर तेज़ आवाज़ में समाचार चल रहा था।

“आज शहर के सबसे बड़े बैंक में हुई 5 करोड़ की चोरी से हड़कंप मच ग...

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कर्म से तपोवन तक By Santosh Srivastav

सघन वन में संध्या दोपहर ढलते ही प्रतीत होने लगती है । माधवी ने अपने आश्रम के भीतरी प्रकोष्ठ से गगरी उठाई और वृक्षों की हरीतिमा में छुपी ऊंची नीची ढलानों पर बहती नदी की ओर चल दी । न...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल By Mallika Mukherjee

देश विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप की एक ऐसी त्रासदी है, जिसकी पीड़ा पीढ़ियों तक महसूस की जायेगी। इस विभाजन ने सिर्फ सरहदें ही नहीं खींचीं, बल्कि सामाजिक समरसता और साझा संस्कृति की विरासत...

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हडसन तट का ऐरा गैरा By Prabodh Kumar Govil

हडसन नदी की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि यह अत्यंत तेज़ वेग से बहती थी। और तो और, इसे मौसम के साथ बदलना भी खूब आता था। जाड़ों के मौसम में जब तेज़ हिमपात होता तो यहां ठंडे पानी में बर्फ़...

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कहानियों का रचना संसार By Dr Yogendra Kumar Pandey

रवि एक रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी करता है। यह एक बड़ी रहवासी सोसायटी है जो शहर के बाहरी हिस्से में है ।रवि तथा उसके दो अन्य साथी 24 घंटे शिफ्टवाईज ड्यूटी...

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एबॉन्डेण्ड By Pradeep Shrivastava

एबॉन्डेण्ड - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 इसे आप कहानी के रूप में पढ़ रहे हैं, लेकिन यह एक ऐसी घटना है जिसका मैं स्वयं प्रत्यक्षदर्शी रहा हूं। चाहें तो आप इसे एक रोचक रिपोर्ट भी कह सकते...

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काश आप कमीने होते ! By uma (umanath lal das)

पाठकों की आश्वस्ति के लिए मैं यह हलफनामा नहीं दे सकता कि कहानी के पात्र, घटनाक्रम, स्थान आदि काल्पनिक हैं। किसी भी तरह के मेल को मैं स्थितियों का संयोग नहीं ठहरा रहा। इसके बाद आपकी...

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मुलाकात By दिलीप कुमार

शाम का समय था... हल्की हल्की हवाओं के साथ छोटी छोटी बारिस की बूंदे पड़ रही थी। बड़ा ही सुहाना मौसम था...मैं ग्राउंड में टहल रहा था अचानक मेरे कानों में आवाज आई ।ओ मिस्टर मैंने पलट क...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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प्रयाग यात्रा By संदीप सिंह (ईशू)

प्रयागराज गंगा-यमुना-सरस्वती अर्थात त्रिवेणी या संगम की पावन नगरी है।

प्रयागराज को लोग "तीर्थों का राजा " (तीर्थराज) के नाम से जानते हैं।

हिन्दू मान्यता के अनुसार, यह...

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हरिसिंह हरीश की कुछ और रचनाएं व समीक्षा By राज बोहरे

दर्द की सीढ़ियां (ग़ज़ल संग्रह)

हरि सिंह हरीश अपनी युवावस्था के समय से ही लिखने के प्रति बड़े समर्पित रहे हैं। वह कहते थे कि जब वह छठवें क्लास में पढ़ रहे थे तो होमवर्क की कॉपिय...

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सरहद By Kusum Bhatt

चीड़ के पेड़ों की टहनियां तेज हवा के दबाव से जोरां से हिलती हैं सायं-सायं के कनफोडू षोर से काँंप उठती हूँ। इन चीड़ों से ढेर सूखी पिरूल भी लगातार झर रही है। ऊपर चढ़ने की कोशिश करते पाँव...

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अनसुनी यात्राओं की नायिकाएं By Pradeep Shrivastava

ढेरों रंग-गुलाल से भरी होली एकदम सामने अठखेलियां करने लगी थी. फाल्गुन में फगुनहट जोर-शोर से बह रही थी. पेशे से तेज़-तर्रार वकील, मेरे एक पारिवारिक मित्र 'दरभंगा' से वापस &#3...

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हंसता क्यों है पागल By Prabodh Kumar Govil

कुछ दिन पहले शाम को पार्क में अपने साथी सीनियर सिटीजंस के साथ टहल कर गप्पें लड़ाते समय पड़ौस में रहने वाले एक साथी ने बताया कि आज तो उनका सारा दिन बहुत आराम से बीत गया। उनका गीज़र...

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जुड़ी रहूँ जड़ों से By Sunita Bishnolia

जुड़ी रहूँ जड़ों से
शहर की सबसे आलीशान कोठी में एक तरफ बैडमिंटन कोर्ट है जहाँ अभी भी कुछ लोग काम करे रहे है। इसी के दूसरे छोर पर दो आउट हाऊस भी बने हुए है। दोनों आउट हाऊस हरियाली...

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मोहल्ला-ए-गुफ़्तगू By Deepak Bundela Arymoulik

जी हां ये बात सौ फीसदी बिलकुल सही हैं..एक मोहल्ला ही हैं जहां ज़माने भर की चर्चाए तों होती हैं लेकिन वो कभी खबरों में शामिल नहीं हो पाती हैं.. क्योंकि जो भी खबर कनाफूसी से शुरू होकर...

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तीन औरतों का घर By Rajni Gosain

"गली के कोने में हरे सफ़ेद रंग की मटमैली सी सफेदी लिए जो मकान हैं, वो देखिये जिसके आँगन में ईंट गारे की बनी दीवार से बाहर झांकता बड़ा सा नीम का पेड़ दिख रहा हैं! वहीं मकान हैं फरीद...

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अधूरी मोहब्बत By sapna

कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ प्यार और दोस्ती की परिभाषा बदल जाती है। बचपन की मासूम दोस्ती धीरे-धीरे दिल की गहराई में उतर जाती है, लेकिन समय, दूरी और परिस्थितियाँ...

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13वां दरवाज़ा By Vijeta Maru

गांव का नाम था भैरवपुर। चारों ओर ऊँचे पेड़ों से घिरा, एक ऐसा गांव जहां शाम ढलते ही लोग अपने दरवाज़े बंद कर लेते थे। गांव के बाहर एक पुरानी, टूटी-फूटी हवेली थी — राय हवेली। गांववालो...

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उधड़ा हुआ स्वेटर By Sudha Arora

उधड़ा हुआ स्वेटर सुधा अरोड़ा (1) यों तो उस पार्क को लवर्स पार्क कहा जाता था पर उसमें टहलने वाले ज्यादातर लोगों की गिनती वरिष्ठ नागरिकों में की जा सकती थी. युवाओं में अलस्सुबह उठने, ज...

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Ashvdhaama: एक युग पुरुष By bhagwat singh naruka

इस रचना के सभी पात्र ओर घटनाएं काल्पनिक है इनका किसी धर्म ओर जाति ,मानव ,पशु से कोई लेना देना नहीं है । ये मात्र मेरे दिमाग ओर मेरी लेखनी की उपज है इस कहानी के सारे राइट्स मेरे अधी...

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सेहरा में मैं और तू By Prabodh Kumar Govil

ओह! शुरू शुरू में ये अविश्वसनीय सा लगा था।

बिल्कुल असंभव! नहीं, ऐसा हो ही कैसे सकता है? इसकी कल्पना करना भी कल्पनातीत है।

आख़िर नियम कायदे भी तो कुछ चीज़ होती है या नहीं! ऐसा...

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बसंती की बसंत पंचमी By Prabodh Kumar Govil

ये दुख बरसों पुराना था। ये न मेरा था और न तेरा। ये सबका था। हर दिन का था। हर गांव का था। हर शहर का था।
नहीं- नहीं, ग़लती हो गई। शायद गांव का नहीं था, केवल शहर का था। जितना बड़ा शह...

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प्रेम - मेरे प्यार की शुरूआत By alaywritss

मेरे प्यार की शुरूआत कुछ इस तरह हुई की में कक्षा 10 के बाद मेरी स्कूल बदल गई और कक्षा 11 में मुझे एक लड़की पसंद आती हैं। वो बहुत ही सुंदर थी , उसकी सुंदरता कहूं तो यूं थी की वो एकद...

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Secrets of The Night By Amreen Khan

ब्लैक कार अपनी पूरी तेज रफ्तार में, खाली और काली सडक पर दौड रही थी. इंजन की गडगडाहट और टायरों की आवाज रात की खामोशी को चीर रही थी. कार के अंदर म्यूजिक फुल वॉल्यूम पर बज रहा था—सैंग...

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त्रिशूलगढ़: काल का अभिशाप By Gxpii

हवा में अजीब सी घुटन थी। आसमान में बादल थे, लेकिन बिजली नहीं चमक रही थी।
सिर्फ एक बेचैनी थी — जो हर दिशा से वेद को घेर रही थी।

उसका गांव छोटा था, शांत और पहाड़ियों से घिरा हुआ।...

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बाते अधूरी सी... By Priyanka Taank Bhati

मई का महीना था, रात काफी हो चुकी थी यही कोई लगभग रात के साढ़े ग्यारह बजे होंगे, सिद्धार्थ सड़क पर चला जा रहा था, तभी उसे कही से डॉगी के भौंकने की आवाज सुनाई दी, आवाज सुनते ही उसके...

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हम हैं अधूरे By Priyanka

एग्जाम के दिनों में, नेक्स्ट एंबीशन के बारे में, पढ़ाई के बारे में, गोल्स के बारे में, फ्यूचर के बारे में बस ऐसे ही बातें होती रही सुदीप और मोक्षा के बीच और दोनों में दोस्ती भी हो...

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रौशन राहें By Lokesh Dangi

गाँव की सड़कों पर धूल उड़ रही थी, और सूरज की गर्मी पूरे गाँव पर अपने कड़े हाथों से शासन कर रही थी। हिम्मतगढ़, एक छोटा सा गाँव, जहाँ खेतों की हरियाली और घरों की छतों पर बिखरी मिट्टी...

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मृगतृष्णा By Saroj Verma

घना वन, पुष्पों और लताओं से सुशोभित बड़े-बडे, हरे-भरे और सुंदर वृक्ष, प्राय: वन्य जीव ऐसे ही निर्भीकता से स्वच्छंद विचरण करते हुए दिखाई दे जाएंगे,ये स्थान है अरण्य वन___ यहां अरण्य...

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Rebirth ...! By Reshma Janwekar

      अस्पताल में दवाओं का गंध हमेशा बना रहता था | और रक्तांश खुराना को इससे हमेशा से नफ़रत थी लेकिन इस वक्त वह उस गंध को मेहसूस नही कर पा रहा था |     रक्तांश इस वक्त वीआईपी वार्ड...

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नज़र से दिल तक By Payal Author

कभी-कभी ज़िंदगी में कोई ऐसा मोड़ आता है जहाँ सबकुछ पहले जैसा रहते हुए भी अचानक अलग लगने लगता है।कहानी है अनाया की — एक मासूम-सी लड़की, जिसके सपनों में सिर्फ़ एक ही ख्वाब था — डॉक्ट...

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काली किताब. By Shailesh verma

शैली: रहस्य, थ्रिलर, अलौकिक

अध्याय 1: पुरानी गलियों का रहस्य

लखनऊ की पुरानी चौक बाज़ार में कई गलियाँ ऐसी हैं जो मानो समय के साथ थम गई हों। एक ऐसी ही गली है — “क़ाफ़िला गली”,...

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महाराजा रणजीत सिंह By Sudhir Sisaudiya

आदिकाल से ही भारत देश में, जीवन के हर क्षेत्र में, असाधारण व्यक्तियों का प्रादुर्भाव होता रहा है। हमारा इतिहास ऐसे महान लोगों के नामों से भरा पड़ा है; जिनकी कला, साहित्य, राजनीति,...

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बात बिगड़ी है कुछ इस तरह By vishvnath yadav

हैलो मेरा नाम विकेश है मैं एक इंजीनियर हू और एक कंपनी में जॉब करता हु,
मैं कोई राइटर नही हू इसीलिए अगर मुझ से कोई गलती होजाए तो कृपीय माफ कर दीजिएगा ??
मैं अपने जीवन का एक छोटा स...

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सरजमीं By Saroj Verma

सरजमीं ,मुल्क,वतन,मातृभूमि,इन सब नामों से स्वदेश को सम्बोधित किया जाता है,कहते हैं जो देश पर फिद़ा होता है उसका नाम हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाता है,अपने मुल्क के वास्ते शहीद हो ज...

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लहरों की बाांसुरी By Suraj Prakash

रचना काल 2015

अभी वाशरूम में हूँ कि मोबाइल की घंटी बजी है। सुबह-सुबह कौन हो सकता है। सोचता हूँ और घंटी बजने देता हूँ। पता है जब तक तौलिया बाँध कर बाहर निकलूंगा, घंटी बजनी बंद हो...

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अबकी बार... लल्लन प्रधान By Bhupendra Singh chauhan

जगतपुरा....ऐसा गांव जो अब भी गांव है ।शहरों की चकाचौंध और आधुनिकता से दूर एकांत में बसे इस गांव की खूबी है कि यह अपने मे ही खुश हैं।इसकी अपनी दुनिया है।करीब...

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संयोग - अनोखी प्रेम कथा By Kishanlal Sharma

"धीरे धीरे अंधेरे को खदेड़कर उजाला धरती पर अपने पैर पसार रहा था।भोर का आगमन होते ही पेड़ो पर बैठे पक्षियों का कलरव स्वर गूंजने लगा।शीतल मन्द मन्द हवा बह रही थी।चारो तरफ हरियाली।...

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नागमणि By Vijay Sharma Erry

कुछ सच इतने गहरे, इतने रहस्यमयी होते हैं कि ज़िन्दगी की सारी परतें उधेड़ कर रख देते हैं। ऐसी ही एक सच्चाई छुपी है एक लड़की – तन्वी – की आँखों में। बचपन की एक घटना ने उसकी किस्मत बद...

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मॉटरनी का बुद्धु By सीमा बी.

"मॉटर जी खाना लग गया है, आप जल्दी से आ जाओ हम दोनो को बहुत जोरों की भूख लगी है", आवाज सुनकर भूपेंद्र जी ने जल्दी से अपनी किताब बंद की और डायनिंग टेबल पर पहुँच गए, जहाँ उनका...

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स्वतन्त्र सक्सेना की कहानियां - बद्री विशाल By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

स्वतन्त्र सक्सेना एक परिपक्व और विचारशील रचनाकार हैं, वे निबन्ध लेखक और कहानीकार हैं। उनकी कहानी जमीन से जुड़ी रहती हैं जो रोचक और विश्वसनीय भी होती हैं। भाषा पर उनका असाधारण अधिका...

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बारिश, चाय और तुम By सिद्धार्थ रंजन श्रीवास्तव

"अरे यार अब ये चीनी का डिब्बा कहाँ रखा है? नीलू ने जाने कहाँ रखा है? फ़ोन मिला कर फिर से पूछना पड़ेगा।" आकर्ष किचन में डब्बो से उलझता हुआ बड़बड़ा रहा था।

अभी आकर्ष जेब में स...

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बेवजह... By Harshad Molishree

बेवजह....भाग १....राजस्थान की जलाने देने वाली गर्मी मैं... एक लड़का जो महज १४ - १५ साल का होगा, सुनसान रास्ते पर लडखडाते हुए चल रहा है, पिघलादेने वाली गर्मी... सामने सब कुछ धुन्दला...

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मासूम गंगा के सवाल By Sheel Kaushik

मासूम गंगा के सवाल (लघुकविता-संग्रह) शील कौशिक (1) समर्पण उन सभी प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरण विद्वानों को जो प्रकृति को महसूसते हैं... जानते-समझते हैं और उसके प्रति कृतज्ञ हैं...

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आशिकी.....अब तुम ही हो। By vaishnavi Shukla

मां कमरे में बड़बड़ाते हुए दाखिल होती है ....ये लड़की पता नही कब सुधरेगी ...!!

वंदना: 8 बज गए है । सूर्य देवता सर पर है ,पर राजकुमारी अभी तक सोई हुई है ( वो खिड़की का परदा हटाते...

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अल्हड़ लड़की गीता By Shiv Shanker Gahlot

आप अकेले नहीं जो किसी खूबसूरत लड़की से प्यार करना चाहते हैं । कोई बिरला ही होगा जिसे ये चाहत न हो । पर ये वास्तव मे आधा सच है । आप किसी भी खूबसूरत लड़की से प्यार करने को तैयार हो ज...

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एक था लेखक By Prashant Salunke

यह कहानी एक वास्तविक लेखक के जीवन से बनाई है पर कहानी को रोमांचक बनाने के लिए लेखक ने अपनी कल्पनाओ का भरपूर इस्तमाल किया है इसलिये इस कहानीको सिर्फ एक कहानी के रूप में ही पढे.

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लिविंग विथ डाइंग By Makvana Bhavek

मेरी क्लासमेट ऋत्वि मेहता का अंतिम संस्कार एक बारिश वाले दिन हुआ। अंतिम संस्कार में बहुत से लोग आये होगे। उनकी संख्या और उनके आसु उसके जिवन की अहमियत दशा रहे होगे। अंतिम संस्कार से...

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पिया बसंती रे! By Saroj Prajapati

भाग-1 छुट्टी का दिन था। खुशी अपने टेरेस गार्डन में पौधों की निराई गुड़ाई में लगी हुई थी। चंपा का पौधा जो उसने सर्दियों से पहले लगाया था। बसंत का मौसम आते ही उसमें व उसके साथ साथ दू...

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लाल बैग By BleedingTypewriter

रात का समय था। एक बूढ़ा आदमी अपने पुराने से घर में अकेला बैठा था। सामने टीवी पर तेज़ आवाज़ में समाचार चल रहा था।

“आज शहर के सबसे बड़े बैंक में हुई 5 करोड़ की चोरी से हड़कंप मच ग...

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कर्म से तपोवन तक By Santosh Srivastav

सघन वन में संध्या दोपहर ढलते ही प्रतीत होने लगती है । माधवी ने अपने आश्रम के भीतरी प्रकोष्ठ से गगरी उठाई और वृक्षों की हरीतिमा में छुपी ऊंची नीची ढलानों पर बहती नदी की ओर चल दी । न...

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मेरा स्वर्णिम बंगाल By Mallika Mukherjee

देश विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप की एक ऐसी त्रासदी है, जिसकी पीड़ा पीढ़ियों तक महसूस की जायेगी। इस विभाजन ने सिर्फ सरहदें ही नहीं खींचीं, बल्कि सामाजिक समरसता और साझा संस्कृति की विरासत...

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हडसन तट का ऐरा गैरा By Prabodh Kumar Govil

हडसन नदी की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि यह अत्यंत तेज़ वेग से बहती थी। और तो और, इसे मौसम के साथ बदलना भी खूब आता था। जाड़ों के मौसम में जब तेज़ हिमपात होता तो यहां ठंडे पानी में बर्फ़...

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कहानियों का रचना संसार By Dr Yogendra Kumar Pandey

रवि एक रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी करता है। यह एक बड़ी रहवासी सोसायटी है जो शहर के बाहरी हिस्से में है ।रवि तथा उसके दो अन्य साथी 24 घंटे शिफ्टवाईज ड्यूटी...

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एबॉन्डेण्ड By Pradeep Shrivastava

एबॉन्डेण्ड - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 इसे आप कहानी के रूप में पढ़ रहे हैं, लेकिन यह एक ऐसी घटना है जिसका मैं स्वयं प्रत्यक्षदर्शी रहा हूं। चाहें तो आप इसे एक रोचक रिपोर्ट भी कह सकते...

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काश आप कमीने होते ! By uma (umanath lal das)

पाठकों की आश्वस्ति के लिए मैं यह हलफनामा नहीं दे सकता कि कहानी के पात्र, घटनाक्रम, स्थान आदि काल्पनिक हैं। किसी भी तरह के मेल को मैं स्थितियों का संयोग नहीं ठहरा रहा। इसके बाद आपकी...

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मुलाकात By दिलीप कुमार

शाम का समय था... हल्की हल्की हवाओं के साथ छोटी छोटी बारिस की बूंदे पड़ रही थी। बड़ा ही सुहाना मौसम था...मैं ग्राउंड में टहल रहा था अचानक मेरे कानों में आवाज आई ।ओ मिस्टर मैंने पलट क...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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प्रयाग यात्रा By संदीप सिंह (ईशू)

प्रयागराज गंगा-यमुना-सरस्वती अर्थात त्रिवेणी या संगम की पावन नगरी है।

प्रयागराज को लोग "तीर्थों का राजा " (तीर्थराज) के नाम से जानते हैं।

हिन्दू मान्यता के अनुसार, यह...

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हरिसिंह हरीश की कुछ और रचनाएं व समीक्षा By राज बोहरे

दर्द की सीढ़ियां (ग़ज़ल संग्रह)

हरि सिंह हरीश अपनी युवावस्था के समय से ही लिखने के प्रति बड़े समर्पित रहे हैं। वह कहते थे कि जब वह छठवें क्लास में पढ़ रहे थे तो होमवर्क की कॉपिय...

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सरहद By Kusum Bhatt

चीड़ के पेड़ों की टहनियां तेज हवा के दबाव से जोरां से हिलती हैं सायं-सायं के कनफोडू षोर से काँंप उठती हूँ। इन चीड़ों से ढेर सूखी पिरूल भी लगातार झर रही है। ऊपर चढ़ने की कोशिश करते पाँव...

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अनसुनी यात्राओं की नायिकाएं By Pradeep Shrivastava

ढेरों रंग-गुलाल से भरी होली एकदम सामने अठखेलियां करने लगी थी. फाल्गुन में फगुनहट जोर-शोर से बह रही थी. पेशे से तेज़-तर्रार वकील, मेरे एक पारिवारिक मित्र 'दरभंगा' से वापस &#3...

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हंसता क्यों है पागल By Prabodh Kumar Govil

कुछ दिन पहले शाम को पार्क में अपने साथी सीनियर सिटीजंस के साथ टहल कर गप्पें लड़ाते समय पड़ौस में रहने वाले एक साथी ने बताया कि आज तो उनका सारा दिन बहुत आराम से बीत गया। उनका गीज़र...

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जुड़ी रहूँ जड़ों से By Sunita Bishnolia

जुड़ी रहूँ जड़ों से
शहर की सबसे आलीशान कोठी में एक तरफ बैडमिंटन कोर्ट है जहाँ अभी भी कुछ लोग काम करे रहे है। इसी के दूसरे छोर पर दो आउट हाऊस भी बने हुए है। दोनों आउट हाऊस हरियाली...

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