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दस्तक दिल पर By Sanjay Nayak Shilp

आज से एक कहानी श्रृंखला शुरू कर रहा हूँ, ये वो कहानी है जिसने मुझे लंबी कहानियों को लिखने की क्षमता प्रदान की थी और कहानीकार से उपन्यास कार बनने को प्रोत्साहित किया
"दस्तक दिल...

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ये तुम्हारी मेरी बातें By Preeti

"सुनो, कहां हो तुम"?

"सुबह घर से निकलते वक्त बता कर आया था , भूल गई "?

"सीधे सीधे जवाब देने में दिक्कत है क्या कोई "?

"आज अचानक से मेरी जासूसी...

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पके फलों का बाग़ By Prabodh Kumar Govil

बाग़ के फल अब पकने लगे थे। लेकिन माली भी बूढ़ा होने लगा। माली तो अब भी मज़े में था, क्योंकि बूढ़ा होने की घटना कोई एक अकेले उसी के साथ नहीं घटी थी। जो उसके सामने पैदा हुए वो भी बूढ...

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वेदान्त 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

1. प्रारंभिक स्वरूप
परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है।
यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है,
मंत्रोच्चार औ...

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संगम By Saroj Verma

ये किसे ले आया अपने साथ?मास्टर किशनलाल ने अपने नौकर दीनू से पूछा।
मालिक,हैजे से पत्नि चल बसी,ये अकेली जान कैसे रहता गांव में, कोई रिश्तेदार भी तो ऐसा भरोसेमंद नहीं है, जिसके पास इ...

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एक-रात एक-राज़ By silent Shivani

खिड़की से ठंडी हवा और बारिश की बूंदें,, आरोही के मुंह छू कर जा रही थी,, गुमसुम खडी आरोही,,, मन में क ई सवाल लिए चुपचाप बारिश को देखे जा रही थी,,

आरोही तुम्हें सर्दी लग जायेगी,,...

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मार्क्स - Season-1 By ARUANDHATEE GARG मीठी

मैथ्स टीचर एक स्टूडेंट को पूरी क्लास के सामने बुरी तरह से डांटते हुए ।

सोहन सर ( मैथ्स टीचर ) - ये क्या है नादिर.....???? तुम्हें समझ नहीं आता, कि ये क्लास 12th है । अभी तक तुमन...

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हम कैसे आगे बढे By Rajesh Maheshwari

यह घटना मगध की है। मगध के एक छोटे से राज्य के राजा की कोई सन्तान नहीं थी। जब वे वृद्धावस्था के करीब पहुँचे तथा उन्हें लगा कि उनके जीवन का सूर्य अब अस्ताचल के करीब जा रहा है और सन्त...

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टॉम काका की कुटिया By Harriet Beecher Stowe

माघ का महीना है। दिन ढल चुका है। केंटाकी प्रदेश के किसी नगर के एक मकान में भोजन के उपरांत दो भलेमानस पास-पास बैठे हुए किसी वाद-विवाद में लीन हो रहे थे।

कहने को दोनों ही भलेमानस...

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लबसना वाला प्यार By Manisha Agarwal

अंशिका के घर का सीन इतनी चिंता क्यों कर रही हो जो भी होगा अच्छा ही होगा मुझे पूरी उम्मीद है कि तुम्हारा बेस्ट रिजल्ट आएगा। मां लगातार बोले जा रही है, पर अंशिका की नजर अपने लैपटॉप...

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बिटिया के नाम पाती... By Dr. Vandana Gupta

प्यारी बिटियाढेर सारा प्यार मेरा पत्र पाकर तुम आश्चर्यचकित होंगी कि अभी तो मिलकर गयीं हैं मम्मा और रोज तो मोबाइल पर बात होती है, फिर पत्र क्यों?? बेटा! रोज बात करने के बाद भ...

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इश्क फरामोश By Pritpal Kaur

आसिफ बड़ी देर से बेचैनी के साथ ऑपरेशन थिएटर के बाहर चहल कदमी कर रहा था. अब तक तो खबर मिल जानी चाहिए थी. देर क्यूँ हो रही है? कही कोई गड़बड़ तो नहीं? ये हस्पताल बहुत बेकार है. इतना तो...

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कर्मा By Sushma Tiwari

देश का दिल दिल्ली, कई सपनों का रंग महल.. सत्ता के गलियारों से लेकर तंग गलियों तक.. कई जिन्दगियों की गवाह दिल्ली, आज भीड़ वाली सड़क पर एम्बुलेंस पूरी तेजी में साइरन बजाते दौड़ी चली...

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एक मुट्ठी इश़्क By Saroj Verma

एक मुट्ठी इश्क़...!!--भाग(१) सरकारी अस्पताल का कमरा,कमरे मे पडे़,सफ़ेद रंग के आठ दस बिस्तर और उन्हीं बिस्तरों में से एक बिस्तर जीनत का भी हैं, महीनों से बिस्तर पर लेटे लेटे ऊब चुकी...

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आधार By Krishna Kant Srivastava

आचरण व संस्कार मानवीय नैतिक मूल्यों की दो ऐसी अनमोल निधियाँ हैं, जिनके बिना मानव के सामाजिक जीवन का अस्तित्व खतरे में जान पड़ता है। मानवीय नैतिक मूल्यों का अनुकरण न करना मनुष्य के...

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सर्कस By Madhavi Marathe

हम लोग हमेशा सर्कस से जुडे हुए लोगों के जीवन के बारे में, जानने के लिए बहुत उत्सुक रहते है। उनका खानाबदोशजीवन, मंच पर अभिनय, साहसिक खेल, जानवरों की दुनिया, रोज की तालियाँ, लेकिन जि...

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सावन का फोड़ By नंदलाल मणि त्रिपाठी

तपती गर्मी लोग परेशान चारो तरफ हाहाकार जेठ कि भयंकर गर्मी भुवन भास्कर का कहर जैसे आग उगल रहे हो पृथ्वी के जल स्रोत सूखते जा रहे थे नगरों एव गांवों की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था चरमरा...

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आजाद-कथा - खंड 1 By Munshi Premchand

मियाँ आजाद के बारे में, हम इतना ही जानते हैं कि वह आजाद थे। उनके खानदान का पता नहीं, गाँव-घर का पता नहीं खयाल आजाद, रंग-ढंग आजाद, लिबास आजाद दिल आजाद और मजहब भी आजाद। दिन भर जमीन...

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कांट्रैक्टर By Arpan Kumar

सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी करने आए थे। सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी किए जा रहे थे। अगर देखा जाए तो आख़िरकार कोई ऑफिस भला क्या होता है! राजनीति और कार्यनीति का अखाड़ा ही तो। एन.आई.सी....

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बन्धन By Saroj Verma

आइए ठाकुर साहब!! पधारिए, कहिए क्या लेना चाहते हैं? दुकान के मालिक सेठ मगनलाल ने ठाकुर राघव प्रताप सिंह से पूछा!! बस,सेठ जी कुछ कम्बल खरीदने है, गरीबों में बांटने के लिए,सर्...

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आरुषि By Ashish Jain

पहला इश्क़ आपको प्यार में पड़ना सिखाता है, दूसरा इश्क़ प्यार करना सिखाता है। पहला इश्क़ उस आदमी की मेहनत कि तरह है जो एक बीज को उगाने के लिए करता है और दूसरा इश्क़ उस पौधे की तरह जो उस...

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जादू जैसा तेरा प्यार By anirudh Singh

रात के आठ बजे भी गोवा के सेंट मरियम ऑडिटोरियम में आज जबरदस्त चहल पहल थी,आखिर हो भी क्यों न...दौर था यूथ्स 'आइकॉन ऑफ इंडिया' अवार्ड्स प्रोग्राम का....देश भर के सैकड़ो युवा उध...

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दूरी न रहे कोई By Kishanlal Sharma

"क्या लेंगे आप?"तुम कौन हो?" दरमियाने कद की युवती को अपने साामने खड़ा देखकर राजन बोला था।"मैं इस बार मे नौकरी करती हूँ"वह औरत बोली,"वेटर हूँ।"औरत होकर...

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दिल से दिल तक By Sonali Rawat

‘‘हर्ष,अब क्या होगा?’’ आभा ने कराहते हुए पूछा. उस की आंखों में भय साफसाफ देखा जा सकता था. उसे अपनी चोट से ज्यादा आने वाली परिस्थिति को ले कर घबराहट हो रही थी.

‘‘कुछ नहीं होगा… म...

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थाई निरेमित यानि थाईलैंड का जादू By Neelam Kulshreshtha

अहमदाबाद से दिल्ली, दिल्ली से बैंकॉक यात्रा समाप्ति पर है, नीचे ज़मीन पर दिखायी दे रहा हैं पीली रोशनियों के बीच रेगती लाल बत्तियां. -एक के पीछे एक. बस लग रहा है कि केलिडो स्कोप की त...

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विविधा By Yashvant Kothari

बात होली की हो और कविता, शेरो-शायरी की चर्चा न हो, यह कैसे संभव हैं ? होली का अपना अंदाज है, और कवियों ने उसे अपने रंग में ढाला है। जाने माने शायर नजीर अकबराबादी कहते हैं:

जब...

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उत्कर्ष-अभिलाषा By शिखा श्रीवास्तव

इंसान या यूँ कहिये इस ब्रह्मांड का कोई भी जीव चाहे लाख कोशिश क्यों ना कर ले, प्रकृति ने, ईश्वरीय सत्ता ने उसके भाग्य में जो लिख दिया है, उसकी हथेली की रेखाओं में जो दायित्व उसे सौं...

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यह कैसी विडम्बना है By Ratna Pandey

जगमगाती हुई बल्बों की सीरीज, आसमान पर चमकते पटाखों की सुंदर रौशनी, घोड़े पर सवार वह शख़्स जो आज रात संध्या का जीवन साथी बन जाएगा। घर में ख़ुशियों का माहौल, इन सबके बीच धड़कता संध्या...

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हीर रांझा. By puja

चेनाब नदी के किनारे एक खूबसूरत जगह है- तख़्त हजारा। यहाँ बहने वाले दरिया की लहरें और बगीचे की खुशबू की वजह से इसे पूरब का स्वर्ग कहा जाता है। यही रांझाओं की धरती है जो मस्ती से यहा...

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मौत का छलावा By Raj Roshan Dash

सूर्यवंशी नाम है तेरा न बहुत सुना है मैने तुझे तेरी ताकत पर बहुत अंहकार है न, देख महाबली! तू और तेरी यह ताकत दोनों मेरे आगे विवश हो गये है। लगा अपनी ताकत और सिद्ध कर जी लोगों से कह...

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मेरी जिंदगी है तु By Ziya Bagde

एक बहुत बड़ा बेंकबेट हॉल जो बहुत ही बड़ा और भव्य था , जहा पर एक बहुत ही बड़ी और आलीशान पार्टी हो रही थी , इस पार्टी मे शहर के सभी रहीस फेमिली आई हुयी थी , और सभी अपने आप मे तो कुछ...

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क्लीनचिट By Vijay Raval

अंक- प्रथमपांच जून सेटरडे की नाईट थी. वक़्त होगा तकरीबन रात के १:३० के करीब.शहर से बारह किलोमीटर दूर बर्थ डे बॉय आलोक अपने जिगरजान दोस्त शेखर के फार्म हाउस पर अपने सब दोस्तों के साथ...

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कशिश. By Ashish Bagerwal

हर कोई उसके बारे में जानना चाहता था जो खुद से ही अंजान थी ...
उसका नाम तो उसी की तरह अनसुलझी सी एक पहेली बन चुका था , कोई उसे पगली तो कोई उसे निकम्मी आदि नामों से संबोधित करता था।...

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बजरंग बत्तीसी – समीक्षा व छंद By Ram Bharose Mishra

बजरंग बत्तीसी के रचनाकार हैं महंत जानकी दास जी । “वह काव्य शक्ति में भी सिद्ध थे। उनकी अन्य काव्य कृतियां हैं जैसे राम रसायन, काव्य सुधाकर,ऋतु तरंग,विरह दिवाकर, रस कौमुदी, सुमति पच...

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तर्ज़नी से अनामिका तक By Rajesh Maheshwari

उपरोक्त स्वरचित कविताएँ मेरे जीवन का आधार हैं और इनकी भावनाएँ मेरे लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। मानव अपने जीवन की पहली श्वांस से मृत्यु की अंतिम श्वांस तक संघर्षरत् रहकर अपनी कल्पनाओं...

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रेत होते रिश्ते By Prabodh Kumar Govil

एकरात के दो बजे थे, लेकिन कमरे की बत्ती जली हुई थी। मँुह से चादर हटाकर मैंने देखा तो अवाक् रह गया। शाबान रो रहा था। मैंने उठकर घड़ी एक बार फिर देखी और उसके नजदीक पहुँच गया। वह मेरी...

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बाजार By Neeraj Sharma

ये उपन्यास एक धांसू किरदार की सत्य कहानी पे लिखना उतना ही कठिन हैं जितना बम्बे की हीरो मोपड कपनी से निकलना कठिन होता हैं, यातायात ही इतना की पूछो मत। ये किरदार फिल्मो तक का सफर कैस...

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बेशक इश्क By Vandana thakur

" यह जो हल्का हल्का सुरूर है,, मेरा इश्क , मेरा फितूर है,,, यह जो हल्का,,,!!!! कहते हुए वो लडका अचानक रूक गया । उसकी आंखो से बेतहांशा,,, दर्द के साथ एक नमी उभर आयी । वो लडका एक...

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जुगनू - The world of fireflies By शक्ति

वो एक दो मंजिला मकान था, जिसके भीतर से लड़ने की आवाज़ें आ रही थीं जिसे मेन गेट पर खड़ा लगभग पच्चीस वर्षीय व्यक्ति बड़ी आसानी से सुन पा रहा था पर कुछ साफ़ साफ़ समझ न आया।

वह मेन गेट खो...

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मृत्यु का मध्यांतर By Vijay Raval

अंक - पहला/१'अरे.. यार, नो.. नो.. नो कार तो बिलकुल भी नहीं, जायेंगे तो बाइक पर ही। प्लीज़ अजीत। कल हमारे साथ का लास्ट सन्डे मुझे तुम्हारे साथ दिल खोलकर जीना है, बस।' इशिता...

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कोरोना से सामना By Kishanlal Sharma

गत वर्ष कोरोना कहर बनकर बरपा था।इसलिए नववर्ष यानी 2021 के आगमन पर सरकार के साथ हमने भी मान लिया था कि हमने जंग जीत ली है।कोरोना को हरा दिया है।देश से दूर भगा दिया है।लेकिन यह मुंग...

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प्यार की निशानी By Saroj Prajapati

मंगला जैसे ही सुबह स्कूल पहुंची उसे स्टाफ रूम में एक महिला बैठी हुई दिखाई दी। ध्यान से देखने पर वह उसे पहचानते हुए बोली “तुम तो मंजू हो ना!”
उसने भी हैरानी से मंगला की ओर देखते हु...

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काव्यजीत By Kavya Soni

खबर नहीं शायद तुम्हे
तेरे मेरे प्यार के पल वो अहसास गुजर रहे
खबर नहीं तुम्हे शायद मगर ख्वाब प्यार के
बिखर रहे है
तुम्हे अहसास नहीं बहुत कुछ बदल रहा है
रहते थे जिस अंदाज हम पहल...

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एक और दमयन्ती By ramgopal bhavuk

एक और दमयन्ती ही क्यों?

राजा नल और रानी दमयन्ती की संघर्ष -गाथा पौराणिक आख्यानों में है। इस क्षेत्र के ऐतिहासकि नरवर के किले से ही उनका सम्बन्ध रहा है।

इसके साथ ही पंचम...

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स्टेट बंक ऑफ़ इंडिया socialem (the socialization) By Nirav Vanshavalya

यूरो डॉलर का 300 नोट वाला भारी भरकम बंडल कॉन्फ्रेंस टेबल पर जाकर गिरिता है. इसके दूसरे ही क्षण 25महान अर्थशास्त्री कॉन्फ्रेंस में बैठे हुए दिखाई देते है.
एक अर्थशास्त्री मिस्...

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OUT OF CONTROL By Raaj

आज भी रोज की तरह रात के 1 बजे रोबर्ट दरवाजा खटखटा रहा था। उतने मैं घरके अंदर टोबी के भोकने की आवाज़ आने लगी ।टोबी ने जेरी की थोडी फटी हुई पेंट को मुह में रखकर खिंच र...

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प्लेटफार्म पर खड़ी औरत By Kishanlal Sharma

वह साहित्य का शौकीन कभी नही रहा।उपन्यास और मैगज़ीन को वह छूता तक नही था।कभी कभी समाचारों के लिए अखबार पर सरसरी नज़र जरूर डाल लेता था।
साहित्य से चाहे उसे एलर्जी हो पर एक साहित्यकार...

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क्या तुमने By Ratna Pandey

बसंती अपने माता पिता और बड़ी बहन जयंती के साथ झोपड़ पट्टी की एक खोली में रहती थी। उसकी उम्र अभी 15 साल ही थी। बसंती के पूरे परिवार में उसे छोड़कर बाक़ी सभी श्याम रंग के थे लेकिन वह...

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मेरी लेखन यात्रा By Kishanlal Sharma

मेरा जन्म कृषक परिवार में हुआ था।पुश्तेनी पेशा खेती था।लेकिन बाद में सर्विस में भी आने लगे थे।मेरे बड़े ताऊजी रेलवे में ड्राइवर थे।उनसे छोटे खेती सम्हालते थे।उनसे छोटे हेड मास्टर...

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जय हिन्द की सेना By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म एक सुबह मुँह अंधेरे अटल दा ने मुझे झकझोर कर जगा दिया। घर के सभी लोग अस्त—व्यस्त से कहीं जाने की तैयारी में लगे थे। कल देर रात तक हम सभी रहमान चाचा क...

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दस्तक दिल पर By Sanjay Nayak Shilp

आज से एक कहानी श्रृंखला शुरू कर रहा हूँ, ये वो कहानी है जिसने मुझे लंबी कहानियों को लिखने की क्षमता प्रदान की थी और कहानीकार से उपन्यास कार बनने को प्रोत्साहित किया
"दस्तक दिल...

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ये तुम्हारी मेरी बातें By Preeti

"सुनो, कहां हो तुम"?

"सुबह घर से निकलते वक्त बता कर आया था , भूल गई "?

"सीधे सीधे जवाब देने में दिक्कत है क्या कोई "?

"आज अचानक से मेरी जासूसी...

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पके फलों का बाग़ By Prabodh Kumar Govil

बाग़ के फल अब पकने लगे थे। लेकिन माली भी बूढ़ा होने लगा। माली तो अब भी मज़े में था, क्योंकि बूढ़ा होने की घटना कोई एक अकेले उसी के साथ नहीं घटी थी। जो उसके सामने पैदा हुए वो भी बूढ...

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वेदान्त 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

1. प्रारंभिक स्वरूप
परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है।
यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है,
मंत्रोच्चार औ...

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संगम By Saroj Verma

ये किसे ले आया अपने साथ?मास्टर किशनलाल ने अपने नौकर दीनू से पूछा।
मालिक,हैजे से पत्नि चल बसी,ये अकेली जान कैसे रहता गांव में, कोई रिश्तेदार भी तो ऐसा भरोसेमंद नहीं है, जिसके पास इ...

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एक-रात एक-राज़ By silent Shivani

खिड़की से ठंडी हवा और बारिश की बूंदें,, आरोही के मुंह छू कर जा रही थी,, गुमसुम खडी आरोही,,, मन में क ई सवाल लिए चुपचाप बारिश को देखे जा रही थी,,

आरोही तुम्हें सर्दी लग जायेगी,,...

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मार्क्स - Season-1 By ARUANDHATEE GARG मीठी

मैथ्स टीचर एक स्टूडेंट को पूरी क्लास के सामने बुरी तरह से डांटते हुए ।

सोहन सर ( मैथ्स टीचर ) - ये क्या है नादिर.....???? तुम्हें समझ नहीं आता, कि ये क्लास 12th है । अभी तक तुमन...

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हम कैसे आगे बढे By Rajesh Maheshwari

यह घटना मगध की है। मगध के एक छोटे से राज्य के राजा की कोई सन्तान नहीं थी। जब वे वृद्धावस्था के करीब पहुँचे तथा उन्हें लगा कि उनके जीवन का सूर्य अब अस्ताचल के करीब जा रहा है और सन्त...

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टॉम काका की कुटिया By Harriet Beecher Stowe

माघ का महीना है। दिन ढल चुका है। केंटाकी प्रदेश के किसी नगर के एक मकान में भोजन के उपरांत दो भलेमानस पास-पास बैठे हुए किसी वाद-विवाद में लीन हो रहे थे।

कहने को दोनों ही भलेमानस...

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लबसना वाला प्यार By Manisha Agarwal

अंशिका के घर का सीन इतनी चिंता क्यों कर रही हो जो भी होगा अच्छा ही होगा मुझे पूरी उम्मीद है कि तुम्हारा बेस्ट रिजल्ट आएगा। मां लगातार बोले जा रही है, पर अंशिका की नजर अपने लैपटॉप...

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बिटिया के नाम पाती... By Dr. Vandana Gupta

प्यारी बिटियाढेर सारा प्यार मेरा पत्र पाकर तुम आश्चर्यचकित होंगी कि अभी तो मिलकर गयीं हैं मम्मा और रोज तो मोबाइल पर बात होती है, फिर पत्र क्यों?? बेटा! रोज बात करने के बाद भ...

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इश्क फरामोश By Pritpal Kaur

आसिफ बड़ी देर से बेचैनी के साथ ऑपरेशन थिएटर के बाहर चहल कदमी कर रहा था. अब तक तो खबर मिल जानी चाहिए थी. देर क्यूँ हो रही है? कही कोई गड़बड़ तो नहीं? ये हस्पताल बहुत बेकार है. इतना तो...

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कर्मा By Sushma Tiwari

देश का दिल दिल्ली, कई सपनों का रंग महल.. सत्ता के गलियारों से लेकर तंग गलियों तक.. कई जिन्दगियों की गवाह दिल्ली, आज भीड़ वाली सड़क पर एम्बुलेंस पूरी तेजी में साइरन बजाते दौड़ी चली...

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एक मुट्ठी इश़्क By Saroj Verma

एक मुट्ठी इश्क़...!!--भाग(१) सरकारी अस्पताल का कमरा,कमरे मे पडे़,सफ़ेद रंग के आठ दस बिस्तर और उन्हीं बिस्तरों में से एक बिस्तर जीनत का भी हैं, महीनों से बिस्तर पर लेटे लेटे ऊब चुकी...

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आधार By Krishna Kant Srivastava

आचरण व संस्कार मानवीय नैतिक मूल्यों की दो ऐसी अनमोल निधियाँ हैं, जिनके बिना मानव के सामाजिक जीवन का अस्तित्व खतरे में जान पड़ता है। मानवीय नैतिक मूल्यों का अनुकरण न करना मनुष्य के...

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सर्कस By Madhavi Marathe

हम लोग हमेशा सर्कस से जुडे हुए लोगों के जीवन के बारे में, जानने के लिए बहुत उत्सुक रहते है। उनका खानाबदोशजीवन, मंच पर अभिनय, साहसिक खेल, जानवरों की दुनिया, रोज की तालियाँ, लेकिन जि...

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सावन का फोड़ By नंदलाल मणि त्रिपाठी

तपती गर्मी लोग परेशान चारो तरफ हाहाकार जेठ कि भयंकर गर्मी भुवन भास्कर का कहर जैसे आग उगल रहे हो पृथ्वी के जल स्रोत सूखते जा रहे थे नगरों एव गांवों की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था चरमरा...

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आजाद-कथा - खंड 1 By Munshi Premchand

मियाँ आजाद के बारे में, हम इतना ही जानते हैं कि वह आजाद थे। उनके खानदान का पता नहीं, गाँव-घर का पता नहीं खयाल आजाद, रंग-ढंग आजाद, लिबास आजाद दिल आजाद और मजहब भी आजाद। दिन भर जमीन...

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कांट्रैक्टर By Arpan Kumar

सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी करने आए थे। सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी किए जा रहे थे। अगर देखा जाए तो आख़िरकार कोई ऑफिस भला क्या होता है! राजनीति और कार्यनीति का अखाड़ा ही तो। एन.आई.सी....

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बन्धन By Saroj Verma

आइए ठाकुर साहब!! पधारिए, कहिए क्या लेना चाहते हैं? दुकान के मालिक सेठ मगनलाल ने ठाकुर राघव प्रताप सिंह से पूछा!! बस,सेठ जी कुछ कम्बल खरीदने है, गरीबों में बांटने के लिए,सर्...

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आरुषि By Ashish Jain

पहला इश्क़ आपको प्यार में पड़ना सिखाता है, दूसरा इश्क़ प्यार करना सिखाता है। पहला इश्क़ उस आदमी की मेहनत कि तरह है जो एक बीज को उगाने के लिए करता है और दूसरा इश्क़ उस पौधे की तरह जो उस...

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जादू जैसा तेरा प्यार By anirudh Singh

रात के आठ बजे भी गोवा के सेंट मरियम ऑडिटोरियम में आज जबरदस्त चहल पहल थी,आखिर हो भी क्यों न...दौर था यूथ्स 'आइकॉन ऑफ इंडिया' अवार्ड्स प्रोग्राम का....देश भर के सैकड़ो युवा उध...

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दूरी न रहे कोई By Kishanlal Sharma

"क्या लेंगे आप?"तुम कौन हो?" दरमियाने कद की युवती को अपने साामने खड़ा देखकर राजन बोला था।"मैं इस बार मे नौकरी करती हूँ"वह औरत बोली,"वेटर हूँ।"औरत होकर...

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दिल से दिल तक By Sonali Rawat

‘‘हर्ष,अब क्या होगा?’’ आभा ने कराहते हुए पूछा. उस की आंखों में भय साफसाफ देखा जा सकता था. उसे अपनी चोट से ज्यादा आने वाली परिस्थिति को ले कर घबराहट हो रही थी.

‘‘कुछ नहीं होगा… म...

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थाई निरेमित यानि थाईलैंड का जादू By Neelam Kulshreshtha

अहमदाबाद से दिल्ली, दिल्ली से बैंकॉक यात्रा समाप्ति पर है, नीचे ज़मीन पर दिखायी दे रहा हैं पीली रोशनियों के बीच रेगती लाल बत्तियां. -एक के पीछे एक. बस लग रहा है कि केलिडो स्कोप की त...

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विविधा By Yashvant Kothari

बात होली की हो और कविता, शेरो-शायरी की चर्चा न हो, यह कैसे संभव हैं ? होली का अपना अंदाज है, और कवियों ने उसे अपने रंग में ढाला है। जाने माने शायर नजीर अकबराबादी कहते हैं:

जब...

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उत्कर्ष-अभिलाषा By शिखा श्रीवास्तव

इंसान या यूँ कहिये इस ब्रह्मांड का कोई भी जीव चाहे लाख कोशिश क्यों ना कर ले, प्रकृति ने, ईश्वरीय सत्ता ने उसके भाग्य में जो लिख दिया है, उसकी हथेली की रेखाओं में जो दायित्व उसे सौं...

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यह कैसी विडम्बना है By Ratna Pandey

जगमगाती हुई बल्बों की सीरीज, आसमान पर चमकते पटाखों की सुंदर रौशनी, घोड़े पर सवार वह शख़्स जो आज रात संध्या का जीवन साथी बन जाएगा। घर में ख़ुशियों का माहौल, इन सबके बीच धड़कता संध्या...

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हीर रांझा. By puja

चेनाब नदी के किनारे एक खूबसूरत जगह है- तख़्त हजारा। यहाँ बहने वाले दरिया की लहरें और बगीचे की खुशबू की वजह से इसे पूरब का स्वर्ग कहा जाता है। यही रांझाओं की धरती है जो मस्ती से यहा...

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मौत का छलावा By Raj Roshan Dash

सूर्यवंशी नाम है तेरा न बहुत सुना है मैने तुझे तेरी ताकत पर बहुत अंहकार है न, देख महाबली! तू और तेरी यह ताकत दोनों मेरे आगे विवश हो गये है। लगा अपनी ताकत और सिद्ध कर जी लोगों से कह...

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मेरी जिंदगी है तु By Ziya Bagde

एक बहुत बड़ा बेंकबेट हॉल जो बहुत ही बड़ा और भव्य था , जहा पर एक बहुत ही बड़ी और आलीशान पार्टी हो रही थी , इस पार्टी मे शहर के सभी रहीस फेमिली आई हुयी थी , और सभी अपने आप मे तो कुछ...

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क्लीनचिट By Vijay Raval

अंक- प्रथमपांच जून सेटरडे की नाईट थी. वक़्त होगा तकरीबन रात के १:३० के करीब.शहर से बारह किलोमीटर दूर बर्थ डे बॉय आलोक अपने जिगरजान दोस्त शेखर के फार्म हाउस पर अपने सब दोस्तों के साथ...

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कशिश. By Ashish Bagerwal

हर कोई उसके बारे में जानना चाहता था जो खुद से ही अंजान थी ...
उसका नाम तो उसी की तरह अनसुलझी सी एक पहेली बन चुका था , कोई उसे पगली तो कोई उसे निकम्मी आदि नामों से संबोधित करता था।...

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बजरंग बत्तीसी – समीक्षा व छंद By Ram Bharose Mishra

बजरंग बत्तीसी के रचनाकार हैं महंत जानकी दास जी । “वह काव्य शक्ति में भी सिद्ध थे। उनकी अन्य काव्य कृतियां हैं जैसे राम रसायन, काव्य सुधाकर,ऋतु तरंग,विरह दिवाकर, रस कौमुदी, सुमति पच...

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तर्ज़नी से अनामिका तक By Rajesh Maheshwari

उपरोक्त स्वरचित कविताएँ मेरे जीवन का आधार हैं और इनकी भावनाएँ मेरे लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। मानव अपने जीवन की पहली श्वांस से मृत्यु की अंतिम श्वांस तक संघर्षरत् रहकर अपनी कल्पनाओं...

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रेत होते रिश्ते By Prabodh Kumar Govil

एकरात के दो बजे थे, लेकिन कमरे की बत्ती जली हुई थी। मँुह से चादर हटाकर मैंने देखा तो अवाक् रह गया। शाबान रो रहा था। मैंने उठकर घड़ी एक बार फिर देखी और उसके नजदीक पहुँच गया। वह मेरी...

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बाजार By Neeraj Sharma

ये उपन्यास एक धांसू किरदार की सत्य कहानी पे लिखना उतना ही कठिन हैं जितना बम्बे की हीरो मोपड कपनी से निकलना कठिन होता हैं, यातायात ही इतना की पूछो मत। ये किरदार फिल्मो तक का सफर कैस...

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बेशक इश्क By Vandana thakur

" यह जो हल्का हल्का सुरूर है,, मेरा इश्क , मेरा फितूर है,,, यह जो हल्का,,,!!!! कहते हुए वो लडका अचानक रूक गया । उसकी आंखो से बेतहांशा,,, दर्द के साथ एक नमी उभर आयी । वो लडका एक...

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जुगनू - The world of fireflies By शक्ति

वो एक दो मंजिला मकान था, जिसके भीतर से लड़ने की आवाज़ें आ रही थीं जिसे मेन गेट पर खड़ा लगभग पच्चीस वर्षीय व्यक्ति बड़ी आसानी से सुन पा रहा था पर कुछ साफ़ साफ़ समझ न आया।

वह मेन गेट खो...

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मृत्यु का मध्यांतर By Vijay Raval

अंक - पहला/१'अरे.. यार, नो.. नो.. नो कार तो बिलकुल भी नहीं, जायेंगे तो बाइक पर ही। प्लीज़ अजीत। कल हमारे साथ का लास्ट सन्डे मुझे तुम्हारे साथ दिल खोलकर जीना है, बस।' इशिता...

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कोरोना से सामना By Kishanlal Sharma

गत वर्ष कोरोना कहर बनकर बरपा था।इसलिए नववर्ष यानी 2021 के आगमन पर सरकार के साथ हमने भी मान लिया था कि हमने जंग जीत ली है।कोरोना को हरा दिया है।देश से दूर भगा दिया है।लेकिन यह मुंग...

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प्यार की निशानी By Saroj Prajapati

मंगला जैसे ही सुबह स्कूल पहुंची उसे स्टाफ रूम में एक महिला बैठी हुई दिखाई दी। ध्यान से देखने पर वह उसे पहचानते हुए बोली “तुम तो मंजू हो ना!”
उसने भी हैरानी से मंगला की ओर देखते हु...

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काव्यजीत By Kavya Soni

खबर नहीं शायद तुम्हे
तेरे मेरे प्यार के पल वो अहसास गुजर रहे
खबर नहीं तुम्हे शायद मगर ख्वाब प्यार के
बिखर रहे है
तुम्हे अहसास नहीं बहुत कुछ बदल रहा है
रहते थे जिस अंदाज हम पहल...

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एक और दमयन्ती By ramgopal bhavuk

एक और दमयन्ती ही क्यों?

राजा नल और रानी दमयन्ती की संघर्ष -गाथा पौराणिक आख्यानों में है। इस क्षेत्र के ऐतिहासकि नरवर के किले से ही उनका सम्बन्ध रहा है।

इसके साथ ही पंचम...

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स्टेट बंक ऑफ़ इंडिया socialem (the socialization) By Nirav Vanshavalya

यूरो डॉलर का 300 नोट वाला भारी भरकम बंडल कॉन्फ्रेंस टेबल पर जाकर गिरिता है. इसके दूसरे ही क्षण 25महान अर्थशास्त्री कॉन्फ्रेंस में बैठे हुए दिखाई देते है.
एक अर्थशास्त्री मिस्...

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OUT OF CONTROL By Raaj

आज भी रोज की तरह रात के 1 बजे रोबर्ट दरवाजा खटखटा रहा था। उतने मैं घरके अंदर टोबी के भोकने की आवाज़ आने लगी ।टोबी ने जेरी की थोडी फटी हुई पेंट को मुह में रखकर खिंच र...

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प्लेटफार्म पर खड़ी औरत By Kishanlal Sharma

वह साहित्य का शौकीन कभी नही रहा।उपन्यास और मैगज़ीन को वह छूता तक नही था।कभी कभी समाचारों के लिए अखबार पर सरसरी नज़र जरूर डाल लेता था।
साहित्य से चाहे उसे एलर्जी हो पर एक साहित्यकार...

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क्या तुमने By Ratna Pandey

बसंती अपने माता पिता और बड़ी बहन जयंती के साथ झोपड़ पट्टी की एक खोली में रहती थी। उसकी उम्र अभी 15 साल ही थी। बसंती के पूरे परिवार में उसे छोड़कर बाक़ी सभी श्याम रंग के थे लेकिन वह...

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मेरी लेखन यात्रा By Kishanlal Sharma

मेरा जन्म कृषक परिवार में हुआ था।पुश्तेनी पेशा खेती था।लेकिन बाद में सर्विस में भी आने लगे थे।मेरे बड़े ताऊजी रेलवे में ड्राइवर थे।उनसे छोटे खेती सम्हालते थे।उनसे छोटे हेड मास्टर...

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जय हिन्द की सेना By Mahendra Bhishma

जय हिन्द की सेना महेन्द्र भीष्म एक सुबह मुँह अंधेरे अटल दा ने मुझे झकझोर कर जगा दिया। घर के सभी लोग अस्त—व्यस्त से कहीं जाने की तैयारी में लगे थे। कल देर रात तक हम सभी रहमान चाचा क...

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