एक मासूम चेहरे पे फिदा दिल in Hindi Moral Stories by AbhiNisha books and stories PDF | एक मासूम चेहरे पे फिदा दिल

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एक मासूम चेहरे पे फिदा दिल

इक मासूम चेहरे पे फिदा दिल


यह एसी कहानी जो रोमन और दर्द से भरा हुआ है 

यह कहानी है एक लड़की की 
और दो लड़के की 
जिसके किरदार को देखकर यह समझ में आता है 
 कि प्यार हो ना प्यार नहीं होता 
नहीं प्यार से बातें करना प्यार होता है 
जहां प्यार तो हर कोई है 
 और उनके दिल में भी प्यार है 
पर हर प्यार एक जैसा नहीं होता

मैं आपकी प्रिय लेखक अभी निशा ❤️🦋💯

मैं सिन वाई सिन कहानी लिखती हूं 
और इसीलिए मेरी कहानी लंबी होंगे 
मैं कहानी को सुनती नहीं बताते नहीं 
दिखती हूं और दर्शाती हूं 


और अगर आप कहानियों को सुनना 
और जाने से ज्यादा देखना और महसूस करना पसंद करते हैं 
बने रहिए हमारी कहानी में


 हां अगर आप मेरी कहानियों के दर्शक बने रहें तो 
मैं कहानियों को दर्शाऊंगी 
और मुझे हद से ज्यादा अच्छा लगेगा 
 अपनी ही कहानी के दर्शनकार बनने में










एक पहाड़ी इलाका एक खूबसूरत सी गांव 


जहां एक लड़की कि घर है
 एक बरा भारत नहीं पर छोटा प्यारा सा घर 
सुबह होते ही वह लड़की उठकर आंगन में आती है 
और अपने सर को हल्के ऊपर करते हुए 
और अपने हाथ हवा में लहराते हुए
 एक लंबी सी सांस लेकर अंगड़ाई लेती है 




लड़की का नाम सोना है 


वही सुबह-सुबह उस लड़की की छोटे भाई घर में खेल रहा है 


और दूसरी तरफ उसके पिता लड़कियों से दीवार बना रहा है 




और वहीं उसकी मां आंगन में चापाकल के पास से 
बर्तन धोकर बर्तन को उठाकर 
और चलते हुएजाकर घर रसोई में ले जा रही है 



और वह सुबह सब कुछ शांत है 
हल्की मध्य हवा और शांति भारी मोहन 
और अब धीरे-धीरे आसमान लाल होते चला है 
और धीरे-धीरे सूरज निकल रही है 




और वही कुछ देर बाद भी 
  सोना अपने आंगन में खड़ी खड़ी 
हाथों को हवा में लहराते हुए 
और बॉडी को लेफ्ट राइट राउंड करते हुए  
मस्ती करने लगी है

और मस्ती करते हुए अचानक वो मुस्कुराने लगती है 
और हल्के माध्यम से आंखें बंद करते हुए 
किसी ख्यालों में गुम हो जाती है 
किसी ऐसी ख्यालो में जो उसकी कल्पनाओं में है 
उसमें को कल्पन की रहा मे बहुत ही ज्यादा रोमांचक है 

और फिर अपनी आंखें खोलते हुए 
और वह अपने आस पास आंगन में इधर-उधर उछलने लगते हैं 
और बेवजह की हंसने लगते हैं 
जैसे मानो की कुछ बहुत ही कीमती चीज पा लिया हो 
या कुछ जीत लिया हो



और वही उसके भाई आंगन से घर की तरफ जा रहा होता है 


और तभी सोना अपने भाई को देखते हुए 
 उसके सामने मस्ती करते हुए आते हुए 
और हल्की सी आगे कीतरफ झुक कर 
अपने भाई की तरफ हाथ बढ़ाते हुए 
 और भी ज्यादा मस्ती करती है मुस्कुराते हुए 




और तभी अचानक उसके भाई हॉकी भोऐ चढ़ाते हुए 
और उसे देखते हुए
अपने हाथ बढ़ाकर 
अपने हाथों से अपनी बहन के बाजू पकड़ कर थोड़ी साइड है 
धकेलते हुए बड़ी मासूमियत 
 और उतरी हुई चेहरे के साथ कहता है 


क्या कर रही हो दीदी हटो सामने से



और वही सोना अपने भाई को ऐसा करते देख 
झुकते हुए सीधे खड़ी हो जाती है 
कुछ सेकेंड तक वही रहती है






और उसका भाई अपनी कदम बढ़ाते हैं घर चला जाता है 






और वही हम दूसरी तरफ देखते हैं
कुछ देर के बाद
 एक लड़का जिसका नाम अभी है
 वह सोना की पड़ोसी है 




और वह सोना के घर से कुछ दूर सामने वाले घर के छत पर खड़ा है
 और अपने हाथों से लकड़ी की दातुन लेकर 
दांत घिस रहा है 
और खड़े होकर सोना की तरफ देख रहा है 
और हल्के मुस्कुरा रहा है 





और तभी सोने की मां थोड़ी ऊंची आवाज में किचन से सोना को आवाज देती है


 सोना सोना 


और फिर सोना हल्के सर घूमा कर 
घर की तरफ देखते हुए 
 ओके ऊंची आवाज में कहती है 


हां 



और फिर सोना यह कहते ही कुछ सेकंड शांत रहती है 
और फिर आंगन से पलट कर
 अपनी कदम जल्दी-जल्दी बड़ाते हुए
 घर की तरफ चली गई