Best Spiritual Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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गीता आज के इंसान के लिए – (अंतिम अध्याय ) By Shivraj Bhokare

------------------------------अध्याय 10: निष्कर्ष (चक्रव्यूह से बाहर का रास्ता: बौद्धिक विलासिता या चेतना का वास्तविक रूपांतरण?)------------------------------  भाग 1: ज्ञान का नया...

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SPRITUAL PHILOSOPHY - 2 - What is Prana Pratistha? By Janshi Saroha

In the previous chapter, we understood the true meaning of Sanatan. We also explored the spiritual significance of idol worship and learned about the concept of Prana Pratishtha (t...

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कालू की पहाड़ी - 10 By RAAHULL SHARMA

खंडहरों की ओर बढ़ते कार्तिक के कदम एक बार फिर ठिठक गए। इस बार जो आवाज़ आई, वह रूही की नहीं बल्कि उनके ग्रुप की सबसे ग्लैमरस और मॉडर्न लड़की, मलाइका की थी।मलाइका की आवाज़ में एक अजी...

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शिथिलता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा &...

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आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 8 - शिवलिंग पर अर्पित सामग्री का आध्यात्मिक रहस्य? By Janshi Saroha

भगवान शिव के स्वरूप को तो हमने समझ लिया... परंतु अब प्रश्न यह आता है कि हम शिवलिंग पर दूध,दही,शहद,अक्षत अर्पित क्यो करते है? क्या यह चीजें चढ़ाने के पीछे भी कोई आध्यामिक अर्थ है? ई...

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संकीर्णता से मुक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 11 By Janshi Saroha

कमरे मे आकर  सीता आंटी ने श्री को समझाने का निर्णय लिया सीता आंटी ने कहा श्री मुझे तुमसे कुछ बात करनी है बेटा श्री:- जी आंटी कहिए आपको क्या बात करनी है हमसे सीता आंटी:- देखो श्री म...

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લાલો 2 - પ્રકરણ 2 By Kamejaliya Dipak

એક દિવસ… શ્યામ પોતાની રિક્ષા લઈને દ્વારિકાની ગલીઓમાં ફરી રહ્યો હતો.સવારથી જ તેનો મૂડ ખરાબ હતો.ઘરેથી નીકળતા પહેલાં પણ તેની પોતાની માતા સાથે ભારે ઝઘડો થયો હતો.“આખી જિંદગી બસ પપ્પાની...

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त्रिपिंड चित्त-दर्शन By Vedanta Life Agyat Agyani

त्रिपिंड चित्त-दर्शन(The Tri-Pinda Consciousness Model)प्रस्तावना: मानव और ब्रह्मांड का त्रि-खेलमानव को मैं तीन मुख्य भागों में देखता हूँ: मन, ऊर्जा (प्राण) और शरीर। इन्हें मैं ब्र...

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शिव By Kapil Tiwari

मैं वो हूँ जो नहीं है ,जो नहीं है वो मैं हूँ।जो अस्तित्व के परे है वो मैं हूँ।जो दृष्टिगोचर हैं वो सृष्टि है, जो सृष्टि के परे हैं वो मैं हूँ।जो श्रव्य हैं वो शब्द है , जो शब्द अती...

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प्रियं ब्रूयात By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (58) की व्याख्या प्रियं वद्।ऋगुवेद --8/89/3अर्थ--प्रिय बोलो। ऋग्वेद 8.89.3 का पूरा मंत्र इन्द्र स्तुति से संबंधित है। ऋग्वेद 8.89.3 मूल मंत्र“प्रियं वदन्निन्द्र मृळ...

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मन का पर्दा और प्रत्यक्षता की त्रासदी By Vedanta Life Agyat Agyani

 मन का पर्दा और प्रत्यक्षता की त्रासदी — Vedanta 2.0 @import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=EB+Garamond:ital,wght@0,400;0,600;0,700;1,400&family=Noto+Sans+Devan...

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डिप्रेशन By Kapil Tiwari

आपने कभी सोचा है,आज से पचास-साठ साल पहले एक मानसिक रोगी को जितनी एंग्ज़ायटी महसूस होती थी, उतनी आज एक सामान्य युवा को महसूस होती है। अगर भविष्य में हम इस समस्या का हल नहीं निकाल पा...

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शैतानी घाटी का सफर - 8 By RAAHULL SHARMA

अब मुझे यकीन हो गया है कि अगला नंबर हम दोनों का ही है। शायद हम इस घाटी से कभी बाहर नहीं निकलेंगे।"सृष्टि: (धीमी आवाज़ में) "पता है राम, अब मुझे डर नहीं लग रहा। डर तब लगता है जब कुछ...

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ईश्वर एक है By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (57) की व्याख्या एकं सद्विप्रा; बहुधा वदन्ति।ऋगुवेद --1/164/46अर्थ --ईश्वर एक है, ज्ञानी उसे अनेक नामों से पुकारते हैं।यह मंत्र ऋग्वेद (1.164.46) का अत्यंत प्रसिद्ध...

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ડિજિટલ યુગના દેશી સાધુ By Munavvar Ali

ગઈકાલે રાતે જમ્યા પછી હું એકલો લટાર મારવા નીકળ્યો હતો. શહેરની બધી હલચલ શમી ગઈ હતી. નદી કિનારે એકલદોકલ પીપળો હતો. એની નીચે એક સાધુ આસન વાળીને બેઠા હતા. ચંદ્રનો પ્રકાશ તેમના સફેદ વાળ...

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अविचारित जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 6 By Nitya Oswal

“विद्येविना मती गेली, मतीविना नीती गेली।नीतीविना गती गेली, गतीविना वित्त गेले।वित्ताविना शूद्र खचले, इतके अनर्थ एका अविद्याने केले।।”ज्योतिबा फुले जी कहते हैं कि शिक्षा (ज्ञान) के...

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स्वर्ग का दरवाजा - 7 By Author Pawan Singh

एपिसोड - 7 तंत्र, मंत्र और यंत्र का ज्ञान “किसी भी देवता को मारने का सबसे अच्छा तरीका है कि उस पर विश्वास करना बंद कर दो” ये लाइन मैं क्यों कह रहा हूँ? क्योंकि आज मैं उस ज्ञान के प...

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नव्यो नव्य: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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The Success Story of Amul By Annesha Banerjee

Currently, the advertiser Sylvester da Cunha, the gifted manager behind the legendary Amul girl, has passed away. His easy and powerful style had echoed in India’s core, producing...

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कामवासना By Kapil Tiwari

जन्म से ही हमारे भीतर कामवासना नाम की एक वृत्ति या प्रवृत्ति मौजूद रहती है। यह प्रकृति की अपनी व्यवस्था है कि जैसे-जैसे मनुष्य उम्र में आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे यह प्रवृत्ति भी सक्र...

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नवीन भवति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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નિલક્રિષ્ના - ભાગ 63 By કૃષ્ણપ્રિયા

આ તરફ પૃથ્વી પર લાખો લોકોના આંસુઓથી સમુદ્રનું પાણી કંપી ઉઠ્યું હતું. એ જ સમયે દૈત્યરાજ કેતુક મહાદેવની સામે ઉભા હતાં. એની આંખોમાં અહંકાર અને ક્રોધ બંને પ્રગટ થઈ રહ્યા હતાં.દૈત્યરાજ...

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આપણે ભગવાન પાસે શું માંગવું જોઈએ? By Dada Bhagwan

આપણે ભગવાન પાસેથી કંઈક ને કંઈક માંગતા હોઈએ છીએ, ભગવાનની ભજના કોઈ ને કોઈ હેતુથી કરતા હોઈએ છીએ. ભગવાન પાસેથી આપણે શું માંગીએ છીએ તેના આધારે ભક્તોના ચાર પ્રકાર પડે છે.એક છે આર્તભક્ત,...

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वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

: वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोजआधुनिक युग ने मनुष्य को वह सब दिया है जिसकी कभी कल्पना भी कठिन थी। आकाश में उड़ने वाले विमान, हाथ में समाई हुई पूरी दुनिया, क्षणों में होने वाला...

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ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 16 By Amir Ali Daredia

               ઈસ્લામિક સ્ટોરી 16     રાતા સમુદ્રના કિનારા પાસે હઝરત મુસા(av)અને બની ઇસરાઈલીઓ પહોંચવા આવ્યા હતા.અને ત્યારે એમને પોતાની પાછળની દિશામા ધૂળની ડમરીઓ ઉડાડતુ પોતાની દિશામ...

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मॉडर्न साधु - 2 By nirala ji

अमन को अपने दोस्तों के साथ खेलना और उनके साथ स्कूल जाना अच्छा लगता था। अमन,विक्रम,अब्दुल और मीरा चारों में अच्छी मित्रता थी। उस जगह के लोग भी एकता और भाईचारे के साथ रहना पसंद करते...

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सत्य पथी By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

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अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच By Kapil Tiwari

अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच: एक आध्यात्मिक व पर्यावरणवादी दृष्टिकोण ~जब हम जीवन के सत्यों को गहराई से समझने का प्रयास करते हैं, तो सबसे पहला प्रश्न यही उठता है कि हमारी...

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शून्य से नौ तक:अस्तित्ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदांत 2.0 का 0–9 मॉडल एक ऐसा संरचनात्मक ढाँचा प्रस्तुत करता है जो साधारण दशमलव संख्या‑पद्धति को अस्तित्व की दस मूल अवस्थाओं के रूप में पुनर्पाठित करता है। इस दृष्टि में 0 से 9 तक...

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गुरु महिमा नहीं- गुरु मैत्री By Vedanta Life Agyat Agyani

  "स्त्री का प्रेम और गुरु-भक्ति की मूर्खता"वेदांत 2.0 के लिए एक नया दृष्टिकोणप्रस्तावना: दो तरह का प्रेमदुनिया में प्रेम के दो रूप सबसे ज़्यादा दिखाई देते हैं। एक पत्नी का प्रेम औ...

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गीता आज के इंसान के लिए – (अंतिम अध्याय ) By Shivraj Bhokare

------------------------------अध्याय 10: निष्कर्ष (चक्रव्यूह से बाहर का रास्ता: बौद्धिक विलासिता या चेतना का वास्तविक रूपांतरण?)------------------------------  भाग 1: ज्ञान का नया...

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SPRITUAL PHILOSOPHY - 2 - What is Prana Pratistha? By Janshi Saroha

In the previous chapter, we understood the true meaning of Sanatan. We also explored the spiritual significance of idol worship and learned about the concept of Prana Pratishtha (t...

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कालू की पहाड़ी - 10 By RAAHULL SHARMA

खंडहरों की ओर बढ़ते कार्तिक के कदम एक बार फिर ठिठक गए। इस बार जो आवाज़ आई, वह रूही की नहीं बल्कि उनके ग्रुप की सबसे ग्लैमरस और मॉडर्न लड़की, मलाइका की थी।मलाइका की आवाज़ में एक अजी...

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शिथिलता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा &...

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आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 8 - शिवलिंग पर अर्पित सामग्री का आध्यात्मिक रहस्य? By Janshi Saroha

भगवान शिव के स्वरूप को तो हमने समझ लिया... परंतु अब प्रश्न यह आता है कि हम शिवलिंग पर दूध,दही,शहद,अक्षत अर्पित क्यो करते है? क्या यह चीजें चढ़ाने के पीछे भी कोई आध्यामिक अर्थ है? ई...

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संकीर्णता से मुक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 11 By Janshi Saroha

कमरे मे आकर  सीता आंटी ने श्री को समझाने का निर्णय लिया सीता आंटी ने कहा श्री मुझे तुमसे कुछ बात करनी है बेटा श्री:- जी आंटी कहिए आपको क्या बात करनी है हमसे सीता आंटी:- देखो श्री म...

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લાલો 2 - પ્રકરણ 2 By Kamejaliya Dipak

એક દિવસ… શ્યામ પોતાની રિક્ષા લઈને દ્વારિકાની ગલીઓમાં ફરી રહ્યો હતો.સવારથી જ તેનો મૂડ ખરાબ હતો.ઘરેથી નીકળતા પહેલાં પણ તેની પોતાની માતા સાથે ભારે ઝઘડો થયો હતો.“આખી જિંદગી બસ પપ્પાની...

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त्रिपिंड चित्त-दर्शन By Vedanta Life Agyat Agyani

त्रिपिंड चित्त-दर्शन(The Tri-Pinda Consciousness Model)प्रस्तावना: मानव और ब्रह्मांड का त्रि-खेलमानव को मैं तीन मुख्य भागों में देखता हूँ: मन, ऊर्जा (प्राण) और शरीर। इन्हें मैं ब्र...

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शिव By Kapil Tiwari

मैं वो हूँ जो नहीं है ,जो नहीं है वो मैं हूँ।जो अस्तित्व के परे है वो मैं हूँ।जो दृष्टिगोचर हैं वो सृष्टि है, जो सृष्टि के परे हैं वो मैं हूँ।जो श्रव्य हैं वो शब्द है , जो शब्द अती...

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प्रियं ब्रूयात By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (58) की व्याख्या प्रियं वद्।ऋगुवेद --8/89/3अर्थ--प्रिय बोलो। ऋग्वेद 8.89.3 का पूरा मंत्र इन्द्र स्तुति से संबंधित है। ऋग्वेद 8.89.3 मूल मंत्र“प्रियं वदन्निन्द्र मृळ...

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मन का पर्दा और प्रत्यक्षता की त्रासदी By Vedanta Life Agyat Agyani

 मन का पर्दा और प्रत्यक्षता की त्रासदी — Vedanta 2.0 @import url('https://fonts.googleapis.com/css2?family=EB+Garamond:ital,wght@0,400;0,600;0,700;1,400&family=Noto+Sans+Devan...

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डिप्रेशन By Kapil Tiwari

आपने कभी सोचा है,आज से पचास-साठ साल पहले एक मानसिक रोगी को जितनी एंग्ज़ायटी महसूस होती थी, उतनी आज एक सामान्य युवा को महसूस होती है। अगर भविष्य में हम इस समस्या का हल नहीं निकाल पा...

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शैतानी घाटी का सफर - 8 By RAAHULL SHARMA

अब मुझे यकीन हो गया है कि अगला नंबर हम दोनों का ही है। शायद हम इस घाटी से कभी बाहर नहीं निकलेंगे।"सृष्टि: (धीमी आवाज़ में) "पता है राम, अब मुझे डर नहीं लग रहा। डर तब लगता है जब कुछ...

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ईश्वर एक है By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (57) की व्याख्या एकं सद्विप्रा; बहुधा वदन्ति।ऋगुवेद --1/164/46अर्थ --ईश्वर एक है, ज्ञानी उसे अनेक नामों से पुकारते हैं।यह मंत्र ऋग्वेद (1.164.46) का अत्यंत प्रसिद्ध...

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ડિજિટલ યુગના દેશી સાધુ By Munavvar Ali

ગઈકાલે રાતે જમ્યા પછી હું એકલો લટાર મારવા નીકળ્યો હતો. શહેરની બધી હલચલ શમી ગઈ હતી. નદી કિનારે એકલદોકલ પીપળો હતો. એની નીચે એક સાધુ આસન વાળીને બેઠા હતા. ચંદ્રનો પ્રકાશ તેમના સફેદ વાળ...

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अविचारित जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 6 By Nitya Oswal

“विद्येविना मती गेली, मतीविना नीती गेली।नीतीविना गती गेली, गतीविना वित्त गेले।वित्ताविना शूद्र खचले, इतके अनर्थ एका अविद्याने केले।।”ज्योतिबा फुले जी कहते हैं कि शिक्षा (ज्ञान) के...

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स्वर्ग का दरवाजा - 7 By Author Pawan Singh

एपिसोड - 7 तंत्र, मंत्र और यंत्र का ज्ञान “किसी भी देवता को मारने का सबसे अच्छा तरीका है कि उस पर विश्वास करना बंद कर दो” ये लाइन मैं क्यों कह रहा हूँ? क्योंकि आज मैं उस ज्ञान के प...

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नव्यो नव्य: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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The Success Story of Amul By Annesha Banerjee

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कामवासना By Kapil Tiwari

जन्म से ही हमारे भीतर कामवासना नाम की एक वृत्ति या प्रवृत्ति मौजूद रहती है। यह प्रकृति की अपनी व्यवस्था है कि जैसे-जैसे मनुष्य उम्र में आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे यह प्रवृत्ति भी सक्र...

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नवीन भवति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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નિલક્રિષ્ના - ભાગ 63 By કૃષ્ણપ્રિયા

આ તરફ પૃથ્વી પર લાખો લોકોના આંસુઓથી સમુદ્રનું પાણી કંપી ઉઠ્યું હતું. એ જ સમયે દૈત્યરાજ કેતુક મહાદેવની સામે ઉભા હતાં. એની આંખોમાં અહંકાર અને ક્રોધ બંને પ્રગટ થઈ રહ્યા હતાં.દૈત્યરાજ...

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આપણે ભગવાન પાસે શું માંગવું જોઈએ? By Dada Bhagwan

આપણે ભગવાન પાસેથી કંઈક ને કંઈક માંગતા હોઈએ છીએ, ભગવાનની ભજના કોઈ ને કોઈ હેતુથી કરતા હોઈએ છીએ. ભગવાન પાસેથી આપણે શું માંગીએ છીએ તેના આધારે ભક્તોના ચાર પ્રકાર પડે છે.એક છે આર્તભક્ત,...

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वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

: वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोजआधुनिक युग ने मनुष्य को वह सब दिया है जिसकी कभी कल्पना भी कठिन थी। आकाश में उड़ने वाले विमान, हाथ में समाई हुई पूरी दुनिया, क्षणों में होने वाला...

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ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 16 By Amir Ali Daredia

               ઈસ્લામિક સ્ટોરી 16     રાતા સમુદ્રના કિનારા પાસે હઝરત મુસા(av)અને બની ઇસરાઈલીઓ પહોંચવા આવ્યા હતા.અને ત્યારે એમને પોતાની પાછળની દિશામા ધૂળની ડમરીઓ ઉડાડતુ પોતાની દિશામ...

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मॉडर्न साधु - 2 By nirala ji

अमन को अपने दोस्तों के साथ खेलना और उनके साथ स्कूल जाना अच्छा लगता था। अमन,विक्रम,अब्दुल और मीरा चारों में अच्छी मित्रता थी। उस जगह के लोग भी एकता और भाईचारे के साथ रहना पसंद करते...

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सत्य पथी By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

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अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच By Kapil Tiwari

अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच: एक आध्यात्मिक व पर्यावरणवादी दृष्टिकोण ~जब हम जीवन के सत्यों को गहराई से समझने का प्रयास करते हैं, तो सबसे पहला प्रश्न यही उठता है कि हमारी...

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शून्य से नौ तक:अस्तित्ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदांत 2.0 का 0–9 मॉडल एक ऐसा संरचनात्मक ढाँचा प्रस्तुत करता है जो साधारण दशमलव संख्या‑पद्धति को अस्तित्व की दस मूल अवस्थाओं के रूप में पुनर्पाठित करता है। इस दृष्टि में 0 से 9 तक...

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गुरु महिमा नहीं- गुरु मैत्री By Vedanta Life Agyat Agyani

  "स्त्री का प्रेम और गुरु-भक्ति की मूर्खता"वेदांत 2.0 के लिए एक नया दृष्टिकोणप्रस्तावना: दो तरह का प्रेमदुनिया में प्रेम के दो रूप सबसे ज़्यादा दिखाई देते हैं। एक पत्नी का प्रेम औ...

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