Best Spiritual Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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মহাভারতের কাহিনি – পর্ব 231 By Ashoke Ghosh

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-২৩১ অর্জুনের নানা দেশে যুদ্ধ এবং বভ্রুবাহন উলূপী ও চিত্রাঙ্গদার কাহিনি   প্রাককথন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন বেদব্যাস মহাভারত নামক মহাগ্রন্থ রচনা করেছিলেন। তিনি এই গ্রন্...

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सच्ची मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ही...

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ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरण By Vedanta Life Agyat Agyani

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरणअध्यात्म और जीवन-दर्शन के क्षेत्र में 'ब्रह्मचर्य' शब्द को अक्सर एक कठिन तपस्या, इंद्रिय-दमन और कठोर नियंत्रण के पर्याय के र...

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ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 11 By Amir Ali Daredia

ઈસ્લામિક સ્ટોરી 11    બકરા ઈદ        વાચક મિત્રો.               ૨૮-૫-૨૬ ના બકરી ઈદનો તહેવાર છે.તમારા માંથી ઘણા લોકો આ જાણતા હશે કે બકરી ઈદની શરુઆત કેવી રીતે થઈ. હું અહીં ટુંકમાં બક...

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નિલક્રિષ્ના - ભાગ 45 By કૃષ્ણપ્રિયા

અસુરરાજ કેતુક : "તું ચિંતા ન કર વૃજા. આપણું મગશદ એક જ થયું. અસુર પુત્ર ને પૃથ્વી ની કોખે જન્મતા કોઈ રોકી નહીં શકે. હવે તો આપણા હાથમાં વિજય જ વિજય છે."વૃજાનાં હોઠો પર એવી ભયંકર સ્મિ...

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महाभारत की कहानी - भाग 237 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२४१ धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती की मृत्यु   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांध...

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उदार जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

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રઘુવંશ - ભાગ 5 By Mansi Desai Shastri

"જેના રાજ્યમાં પાપનો પડછાયો પણ પ્રવેશી ન શક્યો અને જેમના તપોબળ આગળ સ્વર્ગ પણ નતમસ્તક થયું, એ સમ્રાટ અનેનાના અપ્રતિમ શાસનની ગાથા રઘુવંશ."#રઘુવંશ  ભાગ. 5. અનેનાનું નિષ્પાપ શાસન અને આ...

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तेरे मेरे दरमियान - 114 By CHIRANJIT TEWARY

दयाल फिर अपनी बात को जारी रखते हूए कहता है:" मालिक ! ये वक्त सौच मे का नही है । हमे जल्दी से अघोरी बाबा के पास जाना चाहिए । और उनसे इन देत्यो से हमेशा की छुटकारा पाने का कोई उपाय प...

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दान देने से धन नहीं घटता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्त.(१७) की व्याख्या मन्त्र — ऋग्वेद १०/११७/१उतो रयिः पृणतो नो पदस्यति।भावार्थ -दान करने वाले का धन नहीं घटता। पदच्छेद--उत + उ + रयिः + पृणतः + नः + पदस्यति शब्दार्थउत &#6...

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जीवन का रहस्य By Vedanta Life Agyat Agyani

 अध्याय: जीवन का रहस्य जीवन कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान खोजना हो। जीवन स्वयं एक रहस्य है, जिसे जीना है।स्त्री और पुरुष दोनों इस रहस्य के दो अंग हैं। स्त्री प्रकृति है — तरल, प्...

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जुआ मत खेलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (18) की व्याख्या "अक्षैर्मा दीव्य: कृषिमित् कृषस्व" 10/34/13भावार्थ --जुआ मत‌ खेलो, खेती करो।ऋग्वेद का यह मन्त्र द्यूत (जुआ) के दुष्परिणामों से सावधान करता है और पर...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 82 By CHIRANJIT TEWARY

अघोरी कहता है"" हम्म्..! ठीक है । दक्ष ये बात मेरे और तुम्हारे बिच ही रहनी चाहिए इस बारे मे चेतन को पता नही चलनी चाहिए ।" दक्षराज हैरानी से कहता है:" पर चेतन तो आपका ...! "इतना बोल...

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जुआरी का पतन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१९) की व्याख्या- “जाया तप्यते कितवस्य हीना” भावार्थ --जुआरी की पत्नी दीन हीन होकर दुख पाती है।ऋग्वेद १०.३४.१० (अक्षसूक्त)यह मंत्र ऋग्वेद १०.३४.१० के “अक्षसूक्त” (जुए...

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Healing Journey - 2 By Ashwini Dhruv Khanna

## **Chapter 2: Your Story Is Not Random**There is a version of your life that you can see—the choices you remember making,the relationships you experienced,the moments that stayed...

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आत्मजागृति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जा...

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बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें? By Nitya Oswal

बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें?वर्तमान समय में बच्चे विकासशील दुनिया और आधुनिक भोजन से प्रभावित हो रहे हैं। वे करी और रोटी के बजाय कोल्ड ड्रिंक्...

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आलस्य मत‌ करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

  ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा...

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મોક્ષ પ્રાપ્તિ માટે શું કરી શકાય? By Dada Bhagwan

મોક્ષપ્રાપ્તિ માટે ખરેખર મોક્ષ એટલે શું તે સમજવું જરૂરી છે. મોક્ષ એ કોઈ વસ્તુ નથી જે આપણને ઉપર બ્રહ્માંડમાં ક્યાંક પ્રાપ્ત થશે. મોક્ષ એટલે દુઃખોથી મુક્તિ અને પરમ સુખનો અનુભવ કરાવતી...

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सत्य का प्रकाश By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(२२) की व्याख्या त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ--ऋगुवेद,--१/११/२२भावार्थ --हे प्रभु!अपने ज्ञान के प्रकाश से हमारे अज्ञान को नष्ट करो। मंत्र —“त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ…”— ऋग...

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ईश्वर की कृपा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२३) की व्याख्या मंत्र — ऋग्वेद १/१०४/९“पितेव नः शृणुहि हूयमानः …”पदच्छेद--पितेव — नः — शृणुहि — हूयमानःशाब्दिक अर्थ--पितेव = पिता के समाननः = हमारीशृणुहि &#...

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ईश्वर से मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (२४) की व्याख्या “अघृणे न ते सख्याय पह्युवे” — ऋगुवेद _१/१३८/४भावार्थ --हे प्रभु ! मैं ‌तेरी मित्रता से इन्कार नहीं ‌करता।पदच्छेद-- अघृणे — हे प्रकाशस्वरूप, दयालु (...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 10 By Shivraj Bhokare

दोहा:१९कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय।भक्ति करै कोई सूरमा, जाति वरन कुल खोय॥कथा: "शर्तों वाली भक्ति"एक बहुत बड़ा व्यापारी था, जिसका मन हमेशा मुनाफे और वासनाओं में उलझा रहता था।...

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இருளும் ஒளியும் - 2 By Holy spirit

சரியாக அந்த இரட்டைக் கொம்பனின் ஆழ்ந்த மவுன வழிபாட்டிற்கு நேர் முகத்தில் நடந்து சென்றாள் கலிக் தேவதை, கொடூர தீய சக்திக்கும் கலிக் தேவதைக்கும் நடுவே ஒரு சூலம் ஊண்டப்பட்டு இருந்தது, அ...

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भय से मुक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

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भक्त को भय नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

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स्वर्ग का दरवाजा - 4 By Author Pawan Singh

बाक़ी धर्म से कैसे अलग है सनातन?   शैतान सबसे ज़्यादा शैतानी तब करता है जब वह सामाजिक प्रतिष्ठा, नैतिक इज्जत या ईमानदारी के मुखौटो के पीछे छुपा होता है।  ये बात एलिज़ाबेथ बैरेट ने...

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उपकारहीन कृपण By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२६) की व्याख्या मंत्र:अपृणन्तिमभि सं यन्ति शोका:।— ऋग्वेद १.१२५.७भावार्थ --उपकारहीन कृपण को शोक घेर लेता है।पदच्छेद--अपृणन्तिम् + अभि + सं + यन्ति + शोकाःशब्दार्थ--...

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মহাভারতের কাহিনি – পর্ব 231 By Ashoke Ghosh

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-২৩১ অর্জুনের নানা দেশে যুদ্ধ এবং বভ্রুবাহন উলূপী ও চিত্রাঙ্গদার কাহিনি   প্রাককথন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন বেদব্যাস মহাভারত নামক মহাগ্রন্থ রচনা করেছিলেন। তিনি এই গ্রন্...

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सच्ची मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ही...

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ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरण By Vedanta Life Agyat Agyani

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरणअध्यात्म और जीवन-दर्शन के क्षेत्र में 'ब्रह्मचर्य' शब्द को अक्सर एक कठिन तपस्या, इंद्रिय-दमन और कठोर नियंत्रण के पर्याय के र...

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ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 11 By Amir Ali Daredia

ઈસ્લામિક સ્ટોરી 11    બકરા ઈદ        વાચક મિત્રો.               ૨૮-૫-૨૬ ના બકરી ઈદનો તહેવાર છે.તમારા માંથી ઘણા લોકો આ જાણતા હશે કે બકરી ઈદની શરુઆત કેવી રીતે થઈ. હું અહીં ટુંકમાં બક...

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નિલક્રિષ્ના - ભાગ 45 By કૃષ્ણપ્રિયા

અસુરરાજ કેતુક : "તું ચિંતા ન કર વૃજા. આપણું મગશદ એક જ થયું. અસુર પુત્ર ને પૃથ્વી ની કોખે જન્મતા કોઈ રોકી નહીં શકે. હવે તો આપણા હાથમાં વિજય જ વિજય છે."વૃજાનાં હોઠો પર એવી ભયંકર સ્મિ...

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महाभारत की कहानी - भाग 237 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२४१ धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती की मृत्यु   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांध...

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उदार जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

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રઘુવંશ - ભાગ 5 By Mansi Desai Shastri

"જેના રાજ્યમાં પાપનો પડછાયો પણ પ્રવેશી ન શક્યો અને જેમના તપોબળ આગળ સ્વર્ગ પણ નતમસ્તક થયું, એ સમ્રાટ અનેનાના અપ્રતિમ શાસનની ગાથા રઘુવંશ."#રઘુવંશ  ભાગ. 5. અનેનાનું નિષ્પાપ શાસન અને આ...

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तेरे मेरे दरमियान - 114 By CHIRANJIT TEWARY

दयाल फिर अपनी बात को जारी रखते हूए कहता है:" मालिक ! ये वक्त सौच मे का नही है । हमे जल्दी से अघोरी बाबा के पास जाना चाहिए । और उनसे इन देत्यो से हमेशा की छुटकारा पाने का कोई उपाय प...

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दान देने से धन नहीं घटता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्त.(१७) की व्याख्या मन्त्र — ऋग्वेद १०/११७/१उतो रयिः पृणतो नो पदस्यति।भावार्थ -दान करने वाले का धन नहीं घटता। पदच्छेद--उत + उ + रयिः + पृणतः + नः + पदस्यति शब्दार्थउत &#6...

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जीवन का रहस्य By Vedanta Life Agyat Agyani

 अध्याय: जीवन का रहस्य जीवन कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान खोजना हो। जीवन स्वयं एक रहस्य है, जिसे जीना है।स्त्री और पुरुष दोनों इस रहस्य के दो अंग हैं। स्त्री प्रकृति है — तरल, प्...

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जुआ मत खेलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (18) की व्याख्या "अक्षैर्मा दीव्य: कृषिमित् कृषस्व" 10/34/13भावार्थ --जुआ मत‌ खेलो, खेती करो।ऋग्वेद का यह मन्त्र द्यूत (जुआ) के दुष्परिणामों से सावधान करता है और पर...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 82 By CHIRANJIT TEWARY

अघोरी कहता है"" हम्म्..! ठीक है । दक्ष ये बात मेरे और तुम्हारे बिच ही रहनी चाहिए इस बारे मे चेतन को पता नही चलनी चाहिए ।" दक्षराज हैरानी से कहता है:" पर चेतन तो आपका ...! "इतना बोल...

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जुआरी का पतन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१९) की व्याख्या- “जाया तप्यते कितवस्य हीना” भावार्थ --जुआरी की पत्नी दीन हीन होकर दुख पाती है।ऋग्वेद १०.३४.१० (अक्षसूक्त)यह मंत्र ऋग्वेद १०.३४.१० के “अक्षसूक्त” (जुए...

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Healing Journey - 2 By Ashwini Dhruv Khanna

## **Chapter 2: Your Story Is Not Random**There is a version of your life that you can see—the choices you remember making,the relationships you experienced,the moments that stayed...

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आत्मजागृति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जा...

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बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें?वर्तमान समय में बच्चे विकासशील दुनिया और आधुनिक भोजन से प्रभावित हो रहे हैं। वे करी और रोटी के बजाय कोल्ड ड्रिंक्...

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आलस्य मत‌ करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

  ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा...

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મોક્ષ પ્રાપ્તિ માટે શું કરી શકાય? By Dada Bhagwan

મોક્ષપ્રાપ્તિ માટે ખરેખર મોક્ષ એટલે શું તે સમજવું જરૂરી છે. મોક્ષ એ કોઈ વસ્તુ નથી જે આપણને ઉપર બ્રહ્માંડમાં ક્યાંક પ્રાપ્ત થશે. મોક્ષ એટલે દુઃખોથી મુક્તિ અને પરમ સુખનો અનુભવ કરાવતી...

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सत्य का प्रकाश By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(२२) की व्याख्या त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ--ऋगुवेद,--१/११/२२भावार्थ --हे प्रभु!अपने ज्ञान के प्रकाश से हमारे अज्ञान को नष्ट करो। मंत्र —“त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ…”— ऋग...

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ईश्वर की कृपा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२३) की व्याख्या मंत्र — ऋग्वेद १/१०४/९“पितेव नः शृणुहि हूयमानः …”पदच्छेद--पितेव — नः — शृणुहि — हूयमानःशाब्दिक अर्थ--पितेव = पिता के समाननः = हमारीशृणुहि &#...

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ईश्वर से मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (२४) की व्याख्या “अघृणे न ते सख्याय पह्युवे” — ऋगुवेद _१/१३८/४भावार्थ --हे प्रभु ! मैं ‌तेरी मित्रता से इन्कार नहीं ‌करता।पदच्छेद-- अघृणे — हे प्रकाशस्वरूप, दयालु (...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 10 By Shivraj Bhokare

दोहा:१९कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय।भक्ति करै कोई सूरमा, जाति वरन कुल खोय॥कथा: "शर्तों वाली भक्ति"एक बहुत बड़ा व्यापारी था, जिसका मन हमेशा मुनाफे और वासनाओं में उलझा रहता था।...

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இருளும் ஒளியும் - 2 By Holy spirit

சரியாக அந்த இரட்டைக் கொம்பனின் ஆழ்ந்த மவுன வழிபாட்டிற்கு நேர் முகத்தில் நடந்து சென்றாள் கலிக் தேவதை, கொடூர தீய சக்திக்கும் கலிக் தேவதைக்கும் நடுவே ஒரு சூலம் ஊண்டப்பட்டு இருந்தது, அ...

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भय से मुक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

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भक्त को भय नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

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स्वर्ग का दरवाजा - 4 By Author Pawan Singh

बाक़ी धर्म से कैसे अलग है सनातन?   शैतान सबसे ज़्यादा शैतानी तब करता है जब वह सामाजिक प्रतिष्ठा, नैतिक इज्जत या ईमानदारी के मुखौटो के पीछे छुपा होता है।  ये बात एलिज़ाबेथ बैरेट ने...

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उपकारहीन कृपण By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२६) की व्याख्या मंत्र:अपृणन्तिमभि सं यन्ति शोका:।— ऋग्वेद १.१२५.७भावार्थ --उपकारहीन कृपण को शोक घेर लेता है।पदच्छेद--अपृणन्तिम् + अभि + सं + यन्ति + शोकाःशब्दार्थ--...

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