Best Spiritual Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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  • व्रत और उपवास

    “व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते...

अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 3 By Shivraj Bhokare

दोहा: ५कबीर माया पापिणी, हरि सूँ करे हराम।मुखि कस्तूरी महमही, कुबधि कुहाड़ा काम॥कथा: "कस्तूरी का लालच"एक बार एक राहगीर जंगल से गुज़र रहा था। उसे अचानक कहीं से बहुत ही दिव्य और भीनी-...

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सर्वभूतहितेरत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत / नहींनः = हमारीप्रजा = सन्तान, ल...

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महाभारत की कहानी - भाग 226 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२३० यज्ञ के घोड़े के साथ अर्जुन की यात्रा   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधार...

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মহাভারতের কাহিনি – পর্ব 227 By Ashoke Ghosh

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-২২৭ বৈশম্পায়ন বর্ণিত উতঙ্কের কাহিনি   প্রাককথন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন বেদব্যাস মহাভারত নামক মহাগ্রন্থ রচনা করেছিলেন। তিনি এই গ্রন্থে কুরুবংশের বিস্তার, গান্ধারীর ধর...

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सत्य की खोज By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या "सत्या मनसो मे अस्तु"ऋगुवेद--१०/१२८/४भाव--मेरे‌‌ मन के भाव सच्चे हों।"सत्या मनसो मे अस्ति"पदच्छेद--सत्या । मनसः । मे । अस्ति ।शब्दार्थ--सत्या — सत्य...

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પ્રભુ શ્રી રામ જન્મથી જન્મભૂમિ સુધી By Dave Tejas B.

શ્રી રામ રહસ્યએવી વાત જે કદાચ આપે ક્યારેય સાંભળી કે વાંચી નહીં હોય, પ્રભુના જન્મથી રામ જન્મભૂમિનો ઇતિહાસ તથ્યો સાથેરામ નામ એ હિંદુ સંસ્કારોમાં જન્મ થી મૃત્યુ સુધી કોઈ ના કોઈ રીતે જ...

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व्रत और उपवास By Kapil Tiwari

“व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते है? व्रत का अर्थ है “संकल्प ” जो हमेशा मन से निकलता है। और मन क्या है ?अभी अहम का घर है आज कल के लो...

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शत्रु हृदय में भय By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (३८) की व्याख्या --"भियं दधाना हृदयेषु शत्रुव:"ऋगुवेद--१०/८४/७भाव--शत्रु के हृदय में भय उत्पन्न कर दो।भियं दधाना हृदयेषु शत्रूणाम्।शाब्दिक अर्थ--भियम् — भयदधाना — ध...

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નિલક્રિષ્ના - ભાગ 41 By કૃષ્ણપ્રિયા

સમુદ્રક : "હે, દૃષ્ટ અસુરો! પહેલાં તમારા કષ્ટો શું ‌છે એ તો કહો!  એનું નિવારણ મારાથી થશે, એવું કંઈ યોજના ઘડીને આપ સૌ કહી રહ્યા છો?"  અસુરરાજ: "પૃથ્વી સાથે તમારું મિલન! અને એ મિલનમા...

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साहस मत छोड़ो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-- (39) की न धृष्णुं त्यजेत--९/९७/७ऋगुवेदभावार्थ --साहस मत छोड़ो।पूरा मूल मंत्र --यहाँ दिया गया संदर्भ ऋग्वेद 9.97.7 से जुड़ा है, जो ऋगुवेद के सोम मण्डल (नवम मण्डल) का...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 76 By CHIRANJIT TEWARY

सत्यजीत अपनी एक भोंहे उपर करते कहता है। > गए थे ..! गए थे का क्या मतलब मिरा। मैं तो वही था। और तुम मुझे दैखकर ऐसी भागी जैसे मैं तुम्हारा पति नही बल्की मैं कोई भूत हूँ। और फिर तुम व...

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उसके समान कोई नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४०) की व्याख्यान त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता --ऋगुवेद--१/८४/१९भावार्थ --हे मघवन(ईश्वर) ! आपके सिवा  दूसरा सुख देने वाला कोई नहीं है।“न त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता”पद...

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THE CHURCH - 6 By Prisca Alpha

LAST CONFESSIONMatthias did not follow the Pope.Instead, he stood in the chamber long after Adrian’s footsteps vanished, listening to the silence settle like dust after a storm. Th...

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રઘુવંશ પ્રસ્તાવના By Mansi Desai Shastri

પ્રસ્તાવના: રઘુવંશ – એક શાશ્વત વિરાસત"રઘુકુલ રીતિ સદા ચલિ આઈ, પ્રાણ જાયુ બરુ બચનુ ન જાઈ..."આ પંક્તિઓ આપણે વર્ષોથી સાંભળતા આવ્યા છીએ, પણ શું આપણે ખરેખર એ 'રઘુકુળ'ના મૂળ સુધી...

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परम ज्योति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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આપણા શક્તિપીઠ - 38 - ભ્રામરી શક્તિપીઠ મહારાષ્ટ્ર નાસિક By Jaypandya Pandyajay

નાસિકમાં ભ્રામરી શક્તિપીઠ એક એવું સ્થળ છે જે દેવી સતીનો ડાબો હાથ માનવામાં આવે છે અને તેથી જે લોકો પરિસ્થિતિ પ્રતિકૂળ હોય ત્યારે વસ્તુઓને પોતાના નિયંત્રણમાં રાખવાનું પસંદ કરે છે તેઓ...

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ವ್ಯೋಮ - 2 By S Pr

ಜನಗಳು ಓಡಾಡೋ ಹೆಜ್ಜೆಗಳ ಸದ್ದು, ಜೊತೆಗೆ ಮಾತಿನ ಸದ್ದು, ಇದು ಸಾಲದು ಅಂತ ವಾಹನಗಳ ಶಬ್ದ,  ಇಂತ ಶಬ್ದ ದಲ್ಲೂ ಒಬ್ಬ ವ್ಯಕ್ತಿ ಆರಾಮಾಗಿ ಬಸ್ ಅಲ್ಲಿ ನಿದ್ದೆ ಮಾಡ್ತಾ ಇರ್ತಾನೆ...ಬಸ್ ಕಂಡಕ್ಟರ್ ಮಲಗಿರೋ ವ್ಯಕ್ತಿ ನಾ ನೋಡ...

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ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 7 By Amir Ali Daredia

ઇસ્લામિક સ્ટોરી                            7   મુસાએ થોડુ ખાવાનુ અને પાણી સાથે લઈને પોતાની મદિયન તરફની સફર શરૂ કરી.મદિયન જવા માટે સહુથી પહેલા તો એક મોટુ રેગિસ્તાન પસાર કરવુ પડે. મુ...

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श्रैष्ठ मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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પાપ-પુણ્ય શું છે? By Dada Bhagwan

સામાન્ય રીતે આપણે જીવનમાં દાન-ધર્મ કરીએ, તીર્થયાત્રામાં જઈએ, ધર્મસ્થાનકોએ જઈને દર્શન કરીએ, ગંગા જેવી પવિત્ર નદીઓમાં સ્નાન કરીએ, શુભકાર્ય કે સત્કાર્ય કરીએ તેનાથી પુણ્ય બંધાય એમ કહેવ...

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Advaita Philosophy By Vedanta Life Agyat Agyani

Advaita Philosophy:Suffering, Ego, and Liberation The Eradication of the Illusion of Duality: An In-Depth Analysis of the Synthesis of Ego, Wave-Ocean Ontology, and Bhoga-YogaConte...

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पीड़ितों की मदद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है। मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने...

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भक्त प्रह्लाद - 20 By Siya Kashyap

इंद्र को दिया चारित्र्य दानअत्याचारी हिरण्यकशिपु के अंत के पश्चात् प्रह्लाद को राजसिंहासन प्राप्त हुआ। वे तीनों लोकों में अपने सद्गुणों एवं उज्ज्वल चारित्र्य के कारण प्रसिद्ध हो गए...

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मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

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प्रात जागरण का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (43) की व्याख्या "प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा  दधाति"ऋगुवेद-- 1/125/1भावार्थ--प्रात: जागने वाला प्रातकाल का ऐश्वर्य पाता है।मंत्र दिया है—“प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा दधा...

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विचारों का संग्राम By prem chand hembram

विचारों का संग्राम(उपशीर्षक: क्या मैं आस्तिक हूँ?)प्रातःकाल का समय था।पूरा नगर अभी नींद की गोद में था, पर पंडित सम्पूर्ण झा के आँगन से संस्कृत श्लोकों की मधुर, स्पष्ट ध्वनि उठ रही...

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प्रकाश की ओर बढ़ो। By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(45)की व्याख्या उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्तउत्तरे।ऋग्वेद- 1/115/1भाव--अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो।यहाँ जो मन्त्र उद्धृत किया है, वह वास्तव में अत्यन्त...

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जल-छाया By Makvana Bhavek

जल-छायाहिमालय की गोद में बसा कुमाऊँ का छोटा सा गाँव धारकोट, जहाँ सुबह की हवा में देवदार की खुशबू घुली रहती थी और शाम ढलते ही पहाड़ों पर एक अजीब सा सन्नाटा उतर आता था। यहाँ के लोग म...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 3 By Shivraj Bhokare

दोहा: ५कबीर माया पापिणी, हरि सूँ करे हराम।मुखि कस्तूरी महमही, कुबधि कुहाड़ा काम॥कथा: "कस्तूरी का लालच"एक बार एक राहगीर जंगल से गुज़र रहा था। उसे अचानक कहीं से बहुत ही दिव्य और भीनी-...

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सर्वभूतहितेरत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत / नहींनः = हमारीप्रजा = सन्तान, ल...

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महाभारत की कहानी - भाग 226 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२३० यज्ञ के घोड़े के साथ अर्जुन की यात्रा   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधार...

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মহাভারতের কাহিনি – পর্ব 227 By Ashoke Ghosh

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-২২৭ বৈশম্পায়ন বর্ণিত উতঙ্কের কাহিনি   প্রাককথন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন বেদব্যাস মহাভারত নামক মহাগ্রন্থ রচনা করেছিলেন। তিনি এই গ্রন্থে কুরুবংশের বিস্তার, গান্ধারীর ধর...

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सत्य की खोज By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या "सत्या मनसो मे अस्तु"ऋगुवेद--१०/१२८/४भाव--मेरे‌‌ मन के भाव सच्चे हों।"सत्या मनसो मे अस्ति"पदच्छेद--सत्या । मनसः । मे । अस्ति ।शब्दार्थ--सत्या — सत्य...

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પ્રભુ શ્રી રામ જન્મથી જન્મભૂમિ સુધી By Dave Tejas B.

શ્રી રામ રહસ્યએવી વાત જે કદાચ આપે ક્યારેય સાંભળી કે વાંચી નહીં હોય, પ્રભુના જન્મથી રામ જન્મભૂમિનો ઇતિહાસ તથ્યો સાથેરામ નામ એ હિંદુ સંસ્કારોમાં જન્મ થી મૃત્યુ સુધી કોઈ ના કોઈ રીતે જ...

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व्रत और उपवास By Kapil Tiwari

“व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते है? व्रत का अर्थ है “संकल्प ” जो हमेशा मन से निकलता है। और मन क्या है ?अभी अहम का घर है आज कल के लो...

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शत्रु हृदय में भय By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (३८) की व्याख्या --"भियं दधाना हृदयेषु शत्रुव:"ऋगुवेद--१०/८४/७भाव--शत्रु के हृदय में भय उत्पन्न कर दो।भियं दधाना हृदयेषु शत्रूणाम्।शाब्दिक अर्थ--भियम् — भयदधाना — ध...

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નિલક્રિષ્ના - ભાગ 41 By કૃષ્ણપ્રિયા

સમુદ્રક : "હે, દૃષ્ટ અસુરો! પહેલાં તમારા કષ્ટો શું ‌છે એ તો કહો!  એનું નિવારણ મારાથી થશે, એવું કંઈ યોજના ઘડીને આપ સૌ કહી રહ્યા છો?"  અસુરરાજ: "પૃથ્વી સાથે તમારું મિલન! અને એ મિલનમા...

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साहस मत छोड़ो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-- (39) की न धृष्णुं त्यजेत--९/९७/७ऋगुवेदभावार्थ --साहस मत छोड़ो।पूरा मूल मंत्र --यहाँ दिया गया संदर्भ ऋग्वेद 9.97.7 से जुड़ा है, जो ऋगुवेद के सोम मण्डल (नवम मण्डल) का...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 76 By CHIRANJIT TEWARY

सत्यजीत अपनी एक भोंहे उपर करते कहता है। > गए थे ..! गए थे का क्या मतलब मिरा। मैं तो वही था। और तुम मुझे दैखकर ऐसी भागी जैसे मैं तुम्हारा पति नही बल्की मैं कोई भूत हूँ। और फिर तुम व...

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उसके समान कोई नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४०) की व्याख्यान त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता --ऋगुवेद--१/८४/१९भावार्थ --हे मघवन(ईश्वर) ! आपके सिवा  दूसरा सुख देने वाला कोई नहीं है।“न त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता”पद...

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THE CHURCH - 6 By Prisca Alpha

LAST CONFESSIONMatthias did not follow the Pope.Instead, he stood in the chamber long after Adrian’s footsteps vanished, listening to the silence settle like dust after a storm. Th...

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રઘુવંશ પ્રસ્તાવના By Mansi Desai Shastri

પ્રસ્તાવના: રઘુવંશ – એક શાશ્વત વિરાસત"રઘુકુલ રીતિ સદા ચલિ આઈ, પ્રાણ જાયુ બરુ બચનુ ન જાઈ..."આ પંક્તિઓ આપણે વર્ષોથી સાંભળતા આવ્યા છીએ, પણ શું આપણે ખરેખર એ 'રઘુકુળ'ના મૂળ સુધી...

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परम ज्योति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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આપણા શક્તિપીઠ - 38 - ભ્રામરી શક્તિપીઠ મહારાષ્ટ્ર નાસિક By Jaypandya Pandyajay

નાસિકમાં ભ્રામરી શક્તિપીઠ એક એવું સ્થળ છે જે દેવી સતીનો ડાબો હાથ માનવામાં આવે છે અને તેથી જે લોકો પરિસ્થિતિ પ્રતિકૂળ હોય ત્યારે વસ્તુઓને પોતાના નિયંત્રણમાં રાખવાનું પસંદ કરે છે તેઓ...

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ವ್ಯೋಮ - 2 By S Pr

ಜನಗಳು ಓಡಾಡೋ ಹೆಜ್ಜೆಗಳ ಸದ್ದು, ಜೊತೆಗೆ ಮಾತಿನ ಸದ್ದು, ಇದು ಸಾಲದು ಅಂತ ವಾಹನಗಳ ಶಬ್ದ,  ಇಂತ ಶಬ್ದ ದಲ್ಲೂ ಒಬ್ಬ ವ್ಯಕ್ತಿ ಆರಾಮಾಗಿ ಬಸ್ ಅಲ್ಲಿ ನಿದ್ದೆ ಮಾಡ್ತಾ ಇರ್ತಾನೆ...ಬಸ್ ಕಂಡಕ್ಟರ್ ಮಲಗಿರೋ ವ್ಯಕ್ತಿ ನಾ ನೋಡ...

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ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 7 By Amir Ali Daredia

ઇસ્લામિક સ્ટોરી                            7   મુસાએ થોડુ ખાવાનુ અને પાણી સાથે લઈને પોતાની મદિયન તરફની સફર શરૂ કરી.મદિયન જવા માટે સહુથી પહેલા તો એક મોટુ રેગિસ્તાન પસાર કરવુ પડે. મુ...

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ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है। मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने...

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भक्त प्रह्लाद - 20 By Siya Kashyap

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मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

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ऋगुवेद सूक्ति--(45)की व्याख्या उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्तउत्तरे।ऋग्वेद- 1/115/1भाव--अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो।यहाँ जो मन्त्र उद्धृत किया है, वह वास्तव में अत्यन्त...

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जल-छाया By Makvana Bhavek

जल-छायाहिमालय की गोद में बसा कुमाऊँ का छोटा सा गाँव धारकोट, जहाँ सुबह की हवा में देवदार की खुशबू घुली रहती थी और शाम ढलते ही पहाड़ों पर एक अजीब सा सन्नाटा उतर आता था। यहाँ के लोग म...

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