Best Spiritual Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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शैतानी घाटी का सफर - 1 By RAAHULL SHARMA

मुंबई का एक मशहूर कॉलेज, कैंटीन की भीड़ और दोस्तों की मस्ती। एग्जाम्स खत्म हो चुके थे और सभी के चेहरों पर छुट्टियों की खुशी थी।राम, विनोद, सृष्टि, अनामिका, सौरभ, मेहुल और मोनिका हम...

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महाभारत की कहानी - भाग 239 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२४३ यादवों का विनाश   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्मपरायणता, विद...

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तू मेरा मैं तेरा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१२) की‌ व्याख्या- “त्वमस्माकं तव स्मसि”ऋगुवेद --८/९२/३२भावार्थ --प्रभु ! तू हमारा है हम‌ तेरे‌ हैं।यह आत्मसमर्पण, आश्रय और दिव्य–संबंध का उद्घोष है।ऋग्वेद ८।९२।३२ का...

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God Wishar - 6 By Ram Make

"अरे वाह!" मेयर साहब ने उत्सुकता से कहा, "कबीर, मुझे नहीं पता था कि तुम्हारे अंदर इतने सारे हुनर छिपे हैं। लगता है आज हमारी किस्मत अच्छी है।"यहाँ तक कि शिवानी ने भी आँखों में थोड़ी...

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ઘોસ્ટ ઓફ કારગિલ - ભાગ 2 By Virrajsinh jadeja

સ્નાઈપર હુમલા પછી બંકરમાં સન્નાટો છવાઈ ગયો. અર્જુન બરફ પરના એ પગલાં સામે જોઈ રહ્યો. એક જોડી પગલાં - બરાબર એના બૂટની સાઈઝના. દરવાજાથી આવ્યા, એ ઉભો હતો ત્યાં સુધી. પણ આગળ ક્યાં ગયા?...

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પુરૂષોત્તમ માસ - સુદ 2 By Aloka Patel

અધ્યાય બીજો નારદજીનો પ્રશ્ન અધ્યાય બીજો ૭ વર વગરની વહુની કથા સૂત પુરાણીનાં આ વચનો સાંભળી બધા તેમને ધન્યવાદ આપવા લાગ્યા . કથા કહેવામાં કુશળ એવા મહાન જ્ઞાની સૂત પુરાણી પાસેથી પોતાને...

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মহাভারতের কাহিনি – পর্ব 240 By Ashoke Ghosh

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-২৪০ পাণ্ডবগণের হস্তিনাপুরে প্রত্যাবর্তন এবং জনমেজয়ের যজ্ঞে পরীক্ষিতের আবির্ভাব   প্রাককথন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন বেদব্যাস মহাভারত নামক মহাগ্রন্থ রচনা করেছিলেন। তিনি...

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মহাভারত অন্তরের যুদ্ধ ( তত্ত্ব মীমাংসা) - 1 By prem chand hembram

মহাভারত অন্তরের যুদ্ধ (তত্ত্ব মীমাংসা) — পর্ব : ০১ মানুষ যুগের পর যুগ ধরে ভগবানকে খুঁজে চলেছে। কখনও মন্দিরে, কখনও তীর্থে, কখনও মূর্তিতে, কখনও শাস্ত্রে। কিন্তু হয়তো সবচেয়ে কঠিন অন...

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નાથુલા નો નાયક “એક અમર દેશભક્તિ” By Virrajsinh jadeja

ભારતીય સેનાના ઇતિહાસમાં શૌર્યની અનેક ગાથાઓ છે, પણ સિક્કિમની બરફીલી પહાડીઓમાં એક એવી કથા આલેખાયેલી છે જ્યાં શ્રદ્ધા અને ફરજ એક થઈ જાય છે. આ છે કેપ્ટન "બાબા" હરભજન સિંહ" ની કથા – એક...

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आत्मा की यात्रा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१३) की व्याख्या अधाम इन्द्र श्रणवो हवेमा — ऋग्वेद ७/२९/३भावार्थ --हे प्रभो ! हमारी पुकार को‌ सुनो।पदच्छेद--अधाम । इन्द्र । श्रणवः । हवेमा ॥शब्दार्थअधाम — हम नीचे (...

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आत्मबोध By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१४) की व्याख्या ऋग्वेद के मंत्र “यस्तन्न वेद किमृचा करिष्यति""… (१.१६४.३९)  भावार्थ --ब्रह्म-तत्त्व को जाने बिना  वेद-मंत्रों का पाठ व्यर्थ है।ऋग्वेद १.१६४.३९ऋचो अ...

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નિલક્રિષ્ના - ભાગ 46 By કૃષ્ણપ્રિયા

પૃથ્વીનાં ગર્ભમાં રહેલ દૈત્ય પુત્રએ દેવી પુત્ર સાથે કટાક્ષો કરી પૃથ્વીનાં ગર્ભમાં જ દબાવી દેવાની કોશિશ શરૂ કરી.દૈત્ય પુત્ર:  "તું શા માટે તારી જાતને છૂપાવે છે? તું તો નિરાકાર છો ?...

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महाभारत भीतर का युद्ध ( तत्व मीमांसा) भाग 1 By prem chand hembram

महाभारत भीतर का युद्ध (तत्व मीमांसा) — भाग : ०१ मनुष्य सदियों से भगवान को खोज रहा है।कभी मंदिरों में,कभी तीर्थों में,कभी मूर्तियों में,कभी ग्रंथों में।पर शायद सबसे कठिन खोज अपने भी...

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બુલેટ બાબા By Virrajsinh jadeja

ભારત દેશ વિવિધતાથી ભરેલો છે. અહીં દરેક ખૂણે કોઈ ને કોઈ લોકકથા, માન્યતા અને ચમત્કાર છુપાયેલા છે. રાજસ્થાનની રેતાળ ધરતી પર આવેલું એક એવું મંદિર છે જ્યાં ભગવાન શિવ, કૃષ્ણ કે દુર્ગા નહ...

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ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरण By Vedanta Life Agyat Agyani

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरणअध्यात्म और जीवन-दर्शन के क्षेत्र में 'ब्रह्मचर्य' शब्द को अक्सर एक कठिन तपस्या, इंद्रिय-दमन और कठोर नियंत्रण के पर्याय के र...

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सच्ची मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ही...

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ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 11 By Amir Ali Daredia

ઈસ્લામિક સ્ટોરી 11    બકરા ઈદ        વાચક મિત્રો.               ૨૮-૫-૨૬ ના બકરી ઈદનો તહેવાર છે.તમારા માંથી ઘણા લોકો આ જાણતા હશે કે બકરી ઈદની શરુઆત કેવી રીતે થઈ. હું અહીં ટુંકમાં બક...

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उदार जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

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રઘુવંશ - ભાગ 5 By Mansi Desai Shastri

"જેના રાજ્યમાં પાપનો પડછાયો પણ પ્રવેશી ન શક્યો અને જેમના તપોબળ આગળ સ્વર્ગ પણ નતમસ્તક થયું, એ સમ્રાટ અનેનાના અપ્રતિમ શાસનની ગાથા રઘુવંશ."#રઘુવંશ  ભાગ. 5. અનેનાનું નિષ્પાપ શાસન અને આ...

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तेरे मेरे दरमियान - 114 By CHIRANJIT TEWARY

दयाल फिर अपनी बात को जारी रखते हूए कहता है:" मालिक ! ये वक्त सौच मे का नही है । हमे जल्दी से अघोरी बाबा के पास जाना चाहिए । और उनसे इन देत्यो से हमेशा की छुटकारा पाने का कोई उपाय प...

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जीवन का रहस्य By Vedanta Life Agyat Agyani

 अध्याय: जीवन का रहस्य जीवन कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान खोजना हो। जीवन स्वयं एक रहस्य है, जिसे जीना है।स्त्री और पुरुष दोनों इस रहस्य के दो अंग हैं। स्त्री प्रकृति है — तरल, प्...

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दान देने से धन नहीं घटता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्त.(१७) की व्याख्या मन्त्र — ऋग्वेद १०/११७/१उतो रयिः पृणतो नो पदस्यति।भावार्थ -दान करने वाले का धन नहीं घटता। पदच्छेद--उत + उ + रयिः + पृणतः + नः + पदस्यति शब्दार्थउत &#6...

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जुआ मत खेलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (18) की व्याख्या "अक्षैर्मा दीव्य: कृषिमित् कृषस्व" 10/34/13भावार्थ --जुआ मत‌ खेलो, खेती करो।ऋग्वेद का यह मन्त्र द्यूत (जुआ) के दुष्परिणामों से सावधान करता है और पर...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 82 By CHIRANJIT TEWARY

अघोरी कहता है"" हम्म्..! ठीक है । दक्ष ये बात मेरे और तुम्हारे बिच ही रहनी चाहिए इस बारे मे चेतन को पता नही चलनी चाहिए ।" दक्षराज हैरानी से कहता है:" पर चेतन तो आपका ...! "इतना बोल...

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जुआरी का पतन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१९) की व्याख्या- “जाया तप्यते कितवस्य हीना” भावार्थ --जुआरी की पत्नी दीन हीन होकर दुख पाती है।ऋग्वेद १०.३४.१० (अक्षसूक्त)यह मंत्र ऋग्वेद १०.३४.१० के “अक्षसूक्त” (जुए...

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बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें? By Nitya Oswal

बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें?वर्तमान समय में बच्चे विकासशील दुनिया और आधुनिक भोजन से प्रभावित हो रहे हैं। वे करी और रोटी के बजाय कोल्ड ड्रिंक्...

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आत्मजागृति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जा...

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Healing Journey - 2 By Ashwini Dhruv Khanna

## **Chapter 2: Your Story Is Not Random**There is a version of your life that you can see—the choices you remember making,the relationships you experienced,the moments that stayed...

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आलस्य मत‌ करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

  ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा...

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મોક્ષ પ્રાપ્તિ માટે શું કરી શકાય? By Dada Bhagwan

મોક્ષપ્રાપ્તિ માટે ખરેખર મોક્ષ એટલે શું તે સમજવું જરૂરી છે. મોક્ષ એ કોઈ વસ્તુ નથી જે આપણને ઉપર બ્રહ્માંડમાં ક્યાંક પ્રાપ્ત થશે. મોક્ષ એટલે દુઃખોથી મુક્તિ અને પરમ સુખનો અનુભવ કરાવતી...

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सत्य का प्रकाश By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(२२) की व्याख्या त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ--ऋगुवेद,--१/११/२२भावार्थ --हे प्रभु!अपने ज्ञान के प्रकाश से हमारे अज्ञान को नष्ट करो। मंत्र —“त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ…”— ऋग...

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ईश्वर की कृपा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२३) की व्याख्या मंत्र — ऋग्वेद १/१०४/९“पितेव नः शृणुहि हूयमानः …”पदच्छेद--पितेव — नः — शृणुहि — हूयमानःशाब्दिक अर्थ--पितेव = पिता के समाननः = हमारीशृणुहि &#...

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शैतानी घाटी का सफर - 1 By RAAHULL SHARMA

मुंबई का एक मशहूर कॉलेज, कैंटीन की भीड़ और दोस्तों की मस्ती। एग्जाम्स खत्म हो चुके थे और सभी के चेहरों पर छुट्टियों की खुशी थी।राम, विनोद, सृष्टि, अनामिका, सौरभ, मेहुल और मोनिका हम...

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महाभारत की कहानी - भाग 239 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२४३ यादवों का विनाश   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी की धर्मपरायणता, विद...

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तू मेरा मैं तेरा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१२) की‌ व्याख्या- “त्वमस्माकं तव स्मसि”ऋगुवेद --८/९२/३२भावार्थ --प्रभु ! तू हमारा है हम‌ तेरे‌ हैं।यह आत्मसमर्पण, आश्रय और दिव्य–संबंध का उद्घोष है।ऋग्वेद ८।९२।३२ का...

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God Wishar - 6 By Ram Make

"अरे वाह!" मेयर साहब ने उत्सुकता से कहा, "कबीर, मुझे नहीं पता था कि तुम्हारे अंदर इतने सारे हुनर छिपे हैं। लगता है आज हमारी किस्मत अच्छी है।"यहाँ तक कि शिवानी ने भी आँखों में थोड़ी...

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ઘોસ્ટ ઓફ કારગિલ - ભાગ 2 By Virrajsinh jadeja

સ્નાઈપર હુમલા પછી બંકરમાં સન્નાટો છવાઈ ગયો. અર્જુન બરફ પરના એ પગલાં સામે જોઈ રહ્યો. એક જોડી પગલાં - બરાબર એના બૂટની સાઈઝના. દરવાજાથી આવ્યા, એ ઉભો હતો ત્યાં સુધી. પણ આગળ ક્યાં ગયા?...

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પુરૂષોત્તમ માસ - સુદ 2 By Aloka Patel

અધ્યાય બીજો નારદજીનો પ્રશ્ન અધ્યાય બીજો ૭ વર વગરની વહુની કથા સૂત પુરાણીનાં આ વચનો સાંભળી બધા તેમને ધન્યવાદ આપવા લાગ્યા . કથા કહેવામાં કુશળ એવા મહાન જ્ઞાની સૂત પુરાણી પાસેથી પોતાને...

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মহাভারতের কাহিনি – পর্ব 240 By Ashoke Ghosh

মহাভারতের কাহিনি – পর্ব-২৪০ পাণ্ডবগণের হস্তিনাপুরে প্রত্যাবর্তন এবং জনমেজয়ের যজ্ঞে পরীক্ষিতের আবির্ভাব   প্রাককথন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন বেদব্যাস মহাভারত নামক মহাগ্রন্থ রচনা করেছিলেন। তিনি...

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মহাভারত অন্তরের যুদ্ধ ( তত্ত্ব মীমাংসা) - 1 By prem chand hembram

মহাভারত অন্তরের যুদ্ধ (তত্ত্ব মীমাংসা) — পর্ব : ০১ মানুষ যুগের পর যুগ ধরে ভগবানকে খুঁজে চলেছে। কখনও মন্দিরে, কখনও তীর্থে, কখনও মূর্তিতে, কখনও শাস্ত্রে। কিন্তু হয়তো সবচেয়ে কঠিন অন...

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નાથુલા નો નાયક “એક અમર દેશભક્તિ” By Virrajsinh jadeja

ભારતીય સેનાના ઇતિહાસમાં શૌર્યની અનેક ગાથાઓ છે, પણ સિક્કિમની બરફીલી પહાડીઓમાં એક એવી કથા આલેખાયેલી છે જ્યાં શ્રદ્ધા અને ફરજ એક થઈ જાય છે. આ છે કેપ્ટન "બાબા" હરભજન સિંહ" ની કથા – એક...

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आत्मा की यात्रा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१३) की व्याख्या अधाम इन्द्र श्रणवो हवेमा — ऋग्वेद ७/२९/३भावार्थ --हे प्रभो ! हमारी पुकार को‌ सुनो।पदच्छेद--अधाम । इन्द्र । श्रणवः । हवेमा ॥शब्दार्थअधाम — हम नीचे (...

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आत्मबोध By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१४) की व्याख्या ऋग्वेद के मंत्र “यस्तन्न वेद किमृचा करिष्यति""… (१.१६४.३९)  भावार्थ --ब्रह्म-तत्त्व को जाने बिना  वेद-मंत्रों का पाठ व्यर्थ है।ऋग्वेद १.१६४.३९ऋचो अ...

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નિલક્રિષ્ના - ભાગ 46 By કૃષ્ણપ્રિયા

પૃથ્વીનાં ગર્ભમાં રહેલ દૈત્ય પુત્રએ દેવી પુત્ર સાથે કટાક્ષો કરી પૃથ્વીનાં ગર્ભમાં જ દબાવી દેવાની કોશિશ શરૂ કરી.દૈત્ય પુત્ર:  "તું શા માટે તારી જાતને છૂપાવે છે? તું તો નિરાકાર છો ?...

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महाभारत भीतर का युद्ध ( तत्व मीमांसा) भाग 1 By prem chand hembram

महाभारत भीतर का युद्ध (तत्व मीमांसा) — भाग : ०१ मनुष्य सदियों से भगवान को खोज रहा है।कभी मंदिरों में,कभी तीर्थों में,कभी मूर्तियों में,कभी ग्रंथों में।पर शायद सबसे कठिन खोज अपने भी...

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બુલેટ બાબા By Virrajsinh jadeja

ભારત દેશ વિવિધતાથી ભરેલો છે. અહીં દરેક ખૂણે કોઈ ને કોઈ લોકકથા, માન્યતા અને ચમત્કાર છુપાયેલા છે. રાજસ્થાનની રેતાળ ધરતી પર આવેલું એક એવું મંદિર છે જ્યાં ભગવાન શિવ, કૃષ્ણ કે દુર્ગા નહ...

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ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरण By Vedanta Life Agyat Agyani

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरणअध्यात्म और जीवन-दर्शन के क्षेत्र में 'ब्रह्मचर्य' शब्द को अक्सर एक कठिन तपस्या, इंद्रिय-दमन और कठोर नियंत्रण के पर्याय के र...

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सच्ची मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ही...

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ઇસ્લામિક સ્ટોરી - 11 By Amir Ali Daredia

ઈસ્લામિક સ્ટોરી 11    બકરા ઈદ        વાચક મિત્રો.               ૨૮-૫-૨૬ ના બકરી ઈદનો તહેવાર છે.તમારા માંથી ઘણા લોકો આ જાણતા હશે કે બકરી ઈદની શરુઆત કેવી રીતે થઈ. હું અહીં ટુંકમાં બક...

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उदार जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

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રઘુવંશ - ભાગ 5 By Mansi Desai Shastri

"જેના રાજ્યમાં પાપનો પડછાયો પણ પ્રવેશી ન શક્યો અને જેમના તપોબળ આગળ સ્વર્ગ પણ નતમસ્તક થયું, એ સમ્રાટ અનેનાના અપ્રતિમ શાસનની ગાથા રઘુવંશ."#રઘુવંશ  ભાગ. 5. અનેનાનું નિષ્પાપ શાસન અને આ...

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तेरे मेरे दरमियान - 114 By CHIRANJIT TEWARY

दयाल फिर अपनी बात को जारी रखते हूए कहता है:" मालिक ! ये वक्त सौच मे का नही है । हमे जल्दी से अघोरी बाबा के पास जाना चाहिए । और उनसे इन देत्यो से हमेशा की छुटकारा पाने का कोई उपाय प...

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जीवन का रहस्य By Vedanta Life Agyat Agyani

 अध्याय: जीवन का रहस्य जीवन कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान खोजना हो। जीवन स्वयं एक रहस्य है, जिसे जीना है।स्त्री और पुरुष दोनों इस रहस्य के दो अंग हैं। स्त्री प्रकृति है — तरल, प्...

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दान देने से धन नहीं घटता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्त.(१७) की व्याख्या मन्त्र — ऋग्वेद १०/११७/१उतो रयिः पृणतो नो पदस्यति।भावार्थ -दान करने वाले का धन नहीं घटता। पदच्छेद--उत + उ + रयिः + पृणतः + नः + पदस्यति शब्दार्थउत &#6...

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जुआ मत खेलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (18) की व्याख्या "अक्षैर्मा दीव्य: कृषिमित् कृषस्व" 10/34/13भावार्थ --जुआ मत‌ खेलो, खेती करो।ऋग्वेद का यह मन्त्र द्यूत (जुआ) के दुष्परिणामों से सावधान करता है और पर...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 82 By CHIRANJIT TEWARY

अघोरी कहता है"" हम्म्..! ठीक है । दक्ष ये बात मेरे और तुम्हारे बिच ही रहनी चाहिए इस बारे मे चेतन को पता नही चलनी चाहिए ।" दक्षराज हैरानी से कहता है:" पर चेतन तो आपका ...! "इतना बोल...

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जुआरी का पतन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१९) की व्याख्या- “जाया तप्यते कितवस्य हीना” भावार्थ --जुआरी की पत्नी दीन हीन होकर दुख पाती है।ऋग्वेद १०.३४.१० (अक्षसूक्त)यह मंत्र ऋग्वेद १०.३४.१० के “अक्षसूक्त” (जुए...

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बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें? By Nitya Oswal

बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें?वर्तमान समय में बच्चे विकासशील दुनिया और आधुनिक भोजन से प्रभावित हो रहे हैं। वे करी और रोटी के बजाय कोल्ड ड्रिंक्...

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आत्मजागृति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जा...

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Healing Journey - 2 By Ashwini Dhruv Khanna

## **Chapter 2: Your Story Is Not Random**There is a version of your life that you can see—the choices you remember making,the relationships you experienced,the moments that stayed...

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आलस्य मत‌ करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

  ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा...

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મોક્ષ પ્રાપ્તિ માટે શું કરી શકાય? By Dada Bhagwan

મોક્ષપ્રાપ્તિ માટે ખરેખર મોક્ષ એટલે શું તે સમજવું જરૂરી છે. મોક્ષ એ કોઈ વસ્તુ નથી જે આપણને ઉપર બ્રહ્માંડમાં ક્યાંક પ્રાપ્ત થશે. મોક્ષ એટલે દુઃખોથી મુક્તિ અને પરમ સુખનો અનુભવ કરાવતી...

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सत्य का प्रकाश By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(२२) की व्याख्या त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ--ऋगुवेद,--१/११/२२भावार्थ --हे प्रभु!अपने ज्ञान के प्रकाश से हमारे अज्ञान को नष्ट करो। मंत्र —“त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ…”— ऋग...

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ईश्वर की कृपा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२३) की व्याख्या मंत्र — ऋग्वेद १/१०४/९“पितेव नः शृणुहि हूयमानः …”पदच्छेद--पितेव — नः — शृणुहि — हूयमानःशाब्दिक अर्थ--पितेव = पिता के समाननः = हमारीशृणुहि &#...

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