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అరుణ్ ఇంటికి చేరుకోగానే హాల్లో టీవీ చూస్తూ కనపడ్డారు సంధ్యా గారు.అరుణ్ నేరుగా వె...
ભાગ ૫: અશ્વત્થામાનો નાઈટ સાયબર અટેક અને ગાંધારીનો કોર્પોરેટ શ્રાપકુરુક્ષેત્ર સ્ટ...
ભાગ ૧૪ — જે સત્ય છુપાયું હતુંરવિના હાથમાં કાગળ હતો.પણ તેની નજર માત્ર એક જ નામ પર...
સમાજ અને સંસ્કૃતિમાં ગરબાનું મહત્વ ખૂબ જ ઊંડું છે, કારણ કે તે માત્ર એક નૃત્ય કે...
️ हुक्म और हसरत ️#Arsiaएपिसोड 29 — पहला फैसलासुबह की हल्की धूप राजमहल की खिड़किय...
भाग : 09धर्म किसका है?सिनाराम मुर्मू कुछ क्षण तक बिल्कुल मौन खड़े रहे।बरामदे में...
The Legacy of Values: A Tradition That Changed a FamilyChapter 1 — The House Whe...
आखिर वह दिन आ गया जब इस कहानी का आखिरी पड़ाव हम सब का इंतज़ार कर रहा था । यह अम...
कैमरा दिखाता है — सीया बाथरूम से बाहर आती है। चेहरा पीला, हाथों में हल्की कांप।...
दरवाज़े का पुराना, जंग लगा हुआ भारी लॉक मेरे पीछे एक ज़ोरदार 'धड़ाम' की...
ભાગ ૧ — પહેલો પગાર, પહેલું રોકાણ સવારના સાત વાગ્યા હતા. અમદાવાદની એક નાની સોસાયટીમાં રમેશભાઈ પોતાના ઘરની બાલ્કનીમાં ઊભા રહીને ચા પી રહ્યા હતા. સામેના રસ્તા પર લોકો પોતપોતાના...
हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।" "प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...
भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे। देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...
करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ................... शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना घटी। हुआ यूँ कि आखिरी दिन बाबा बटेश्वर की नज़र गेरुआ धोती में लिपटी...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
रात के ठीक ग्यारह बज चुके थे। यूपी से बिहार जाने वाली इस एक्सप्रेस ट्रेन का थर्ड एसी कोच लगभग पूरी तरह से शांत हो चुका था। ट्रेन के पहियों की पटरियों से टकराने वाली छुक-छुक की लयबद...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
भाग १: फाईल क्रमांक BT-001 मुंबई. रात्रीचे १०:४५. दक्षिण मुंबईतील एका भव्य सरकारी इमारतीचा पाचवा मजला पूर्णपणे शांततेत बुडाला होता. दिवसभर अधिकारी, कंत्राटदार आणि फाईल्सच्या ढिगा...
मेरा नाम अनन्या है। 27 साल की उम्र में मैंने जिंदगी का सबसे कड़वा सच देखा। जब सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं रहता। पिछले महीने तक मेरे पास सब था। एक अच्छी नौकरी, एक शादी जिसे मैंने...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
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