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कमरे के पुराने शीशे के सामने खड़े नील का जिस्म आग की भट्टी की तरह दहक रहा था। ख...
कठरुद्रोपनिषद कठरुद्रोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध संन्यास-उपनिषद् है। उपलब्...
भाग 13 — आस्था की आखिरी परीक्षासूरज धीरे-धीरे पश्चिम के आकाश में उतर रहा था।आसमा...
भाग २ रात्र संपली होती… पण अंबिकाच्या मनातली अस्वस्थता अजूनही जागी होती.पहाट...
किसी पर किसी का कोई हक़ नहीं होता, ये बात देर से समझ आती है। जिसे अपना कहकर उम्र...
ભાગ ૨૦ : ચૌદ વર્ષ જૂની ફાઇલરાત ઘણી થઈ ગઈ હતી.જૂના કંપની ઓફિસમાંથી મળેલી ફાઇલ ટેબ...
एक क्लिककभी-कभी एक छोटी-सी मदद… किसी की पूरी जिंदगी बदल देती है।️ लेखककान्तिभाई...
रात्रीचे जवळपास साडेअकरा वाजले होते. मुंबईचा पाऊस आणि त्या जोरदार सरी, मुंबईचा प...
गंगा जी ने संयोगिता के माता-पिता से बात की। शुरू में वे बहुत हिचकिचाए। उन्हें लग...
A Bit yours A Bit Ours Sumit and Julia were dee...
મુખ્ય પાત્રો : 1. અર્જુનસિંહ (વિક્રમસિંહનો જુનિયર / મુખ્ય ટ્રેકર): તીક્ષ્ણ બુદ્ધિ ધરાવતો વનરક્ષક જે માણસના મોં પરથી જૂઠ પકડી પાડે છે. ડાયલોગ:"જંગલ ક્યારેય વગર કારણે લોહી નથ...
Suresh was ten years old when the first pair of glasses arrived. His teacher noticed it first. He was squinting at the blackboard. He was holding his textbook close to his face....
शहनाई की गूंज, गेंदे के फूलों की मादक महक और हवन कुंड से उठते पवित्र धुएं ने उस पुरानी हवेली के विशाल प्रांगण को एक जादुई आभामंडल से भर दिया था।हवेली की वह पुरानी छत, जिसकी पारंपरि...
कॉलेज के पहले दिन की वह सुबह हर साल की तरह आम थी, लेकिन रोहन के लिए यह दिन उसकी जिंदगी का सबसे खास मोड़ बनने वाला था। रोहन शहर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में बी.टेक के पहले वर्ष में दाख...
आर्यन जेव्हा आरशात बघायचा तेव्हा त्याला लेखक नाही, एक भिकारी दिसायचा. तीन पुस्तकं. तीनही आपटली होती. शेवटच्या प्रकाशकाने पुस्तक तोंडावर फेकलं नव्हतं, त्याने एक वाक्य फेकलं होतं...
આનંદનગર એ માત્ર ઈંટ-સિમેન્ટથી બનેલી ચાર દીવાલો કે ફ્લેટોનું સરનામું નથી, પણ “મિની ભારત”નું જ્વલંત ઉદાહરણ છે. અહીં હિન્દુ, મુસ્લિમ, જૈન, શીખ, પારસી અને ખ્રિસ્તી પરિવારો છે. ગુજરાતી,...
સવારનો ખુશનુમા સમય હતો. ઘરમાં ગૂંજેલી શરણાઈઓની મધુર સુરાવલી હજુય જાણે હવામાં તરતી હતી, પણ રાતની રોનક અને ચહલપહલ હવે ધીમે ધીમે ઓસરી ચૂકી હતી. દીવાલો પર લટકતી દીવડાઓની લડીઓ ઝાંખી પડી...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
त्या दिवशी सकाळी १० वाजण्याच्या सुमारास सुशीलाने विनायकरावांच्या घराची बेल दाबली. चार वेळा बेल दाबल्यावर सुद्धा आतून काहीच उत्तर आलं नाही, हे बघून तिने घरं भोवती चक्कर मारली. कदाचि...
एक अनजान मुलाकातशहर की भीड़ हमेशा की तरह अपने काम में व्यस्त थी।सड़कों पर गाड़ियों का शोर था। लोग जल्दी-जल्दी अपने ऑफिस जा रहे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई अपने काम के लिए...
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