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वह रात जो सुहागरात नहीं, सज़ा की रात बन गई थी, धीरे-धीरे सीख की रात बन गई थी। बा...
রাতের অন্ধকারে কপোতাক্ষ নদী যেন আগুনের সর্পে ভরে উঠল। দূরে একটার পর একটা আগুনের...
झपाटलेला वाडा - भाग 10: देवीच्या वाड्यात नवीन सुरुवातमंदिर बनलं होतं. जिथे शंभर...
तोतया वारसदार पात्र रचना सारंग - वकील, विनायकरावांच्या संपत्तीच्या ट्र...
जैसे ही शैलजा और कैलाश हवेली में पहुँचे… सब कुछ अचानक गायब हो गया। दीवारें, खिड़...
ભાગ 18 : યાદનો દરવાજોસ્ક્રીન પર છેલ્લું વાક્ય હજુ પણ દેખાઈ રહ્યું હતું—THE HOST...
अब उसके पास लोकेशन भी थी और वक्त बहुत कम। उसने बाहर खड़ी कार स्टार्ट की और अलेक्...
NAVORAThe Dream That Refused to DieA Motivational Story of Navaneeth Sabu“Succes...
भाग : 10तापस दा के घर का वातावरण कुछ देर पहले की अपेक्षा अब शांत था।बरामदे में ब...
अध्याय 1: धुंध में लिपटा अतीत"यह उन दिनों की बात है..."जब कसौली के पहाड़ों पर धु...
लखनऊ, नवाबों का शहर। शाम के सात बज रहे थे। हजरतगंज की रौशनी, चौक की चाट की खुशबू और गोमती नगर की ठंडी हवा, सब कुछ रोज की तरह ही था। पर आयशा के लिए आज कुछ भी रोज जैसा नहीं था। आय...
পর্ব ১শ্রাবণের শেষ রাত। আকাশজুড়ে কালো মেঘের আস্তরণ। একের পর এক বজ্রপাত যেন পুরো যশোর রাজ্যকে কাঁপিয়ে দিচ্ছে। কপোতাক্ষ নদীর জল উত্তাল হয়ে আছড়ে পড়ছে ঘাটে বাঁধা নৌকোগুলোর গায়ে। বাতাসে...
आर्यन जेव्हा आरशात बघायचा तेव्हा त्याला लेखक नाही, एक भिकारी दिसायचा. तीन पुस्तकं. तीनही आपटली होती. शेवटच्या प्रकाशकाने पुस्तक तोंडावर फेकलं नव्हतं, त्याने एक वाक्य फेकलं होतं...
त्या दिवशी सकाळी १० वाजण्याच्या सुमारास सुशीलाने विनायकरावांच्या घराची बेल दाबली. चार वेळा बेल दाबल्यावर सुद्धा आतून काहीच उत्तर आलं नाही, हे बघून तिने घरं भोवती चक्कर मारली. कदाचि...
शैलजा सिंह की एंट्री – नया कमरा, नई शुरुआत… या कुछ और?शाम का धुंधलका धीरे-धीरे शहर पर उतर रहा था। आसमान में हल्की बैंगनी छटा थी और हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी।शैलजा सिंह ऑटो स...
કેટલીક યાદો ભૂલાતી નથી—એ માત્ર છુપાઈ જાય છે. આરવના જીવનમાં પાંચ વર્ષ પહેલાં બનેલી એક રહસ્યમય આગ પછી ઘણી યાદો ધૂંધળી થઈ ગઈ હતી. પરંતુ એક અજાણ્યો ફોટોગ્રાફ તેની આખી દુનિયા બદલી નાખે...
काहिरा के रेगिस्तानी इलाके में रात का गहरा सन्नाटा था। बंद पड़ी सीमेंट फैक्ट्री के अंदर पीली बत्तियों की रोशनी में दर्जनों लोग अत्याधुनिक हथियार और हेरोइन के पैकेट बड़े-बड़े कंटेनर...
भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे। देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...
रात के ठीक ग्यारह बज चुके थे। यूपी से बिहार जाने वाली इस एक्सप्रेस ट्रेन का थर्ड एसी कोच लगभग पूरी तरह से शांत हो चुका था। ट्रेन के पहियों की पटरियों से टकराने वाली छुक-छुक की लयबद...
It was seven o'clock in the morning. The city streets were slowly waking up, but Nisha Kumari's night had not ended yet. There was no sleep in her eyes, only exhaustion and...
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