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त्रिशा... By vrinda

यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था।

मेरे पिताज...

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​मेरा प्यार By mamta

दरिया, परिंदे और वो अजनबी

​अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक By jassu

मौत का दस्तक
​बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...

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अनुबंध बंधनाचे.. By prem

नमस्कार माझ्या प्रिय वाचक मित्र आणि मैत्रिणींनो...??
माझे नाव मेघना उर्फ मेघा.... आज मी तुम्हा सर्वांसाठी एक खुप छान अशी प्रेमकथा घेऊन आली आहे....
तसं तर अशा कथा खुप असतात, आणि...

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The Girl Who Came Unwillingly By Kavya Pattar

Hello everyone,

This story is entirely fictional. It has no connection with any real person, place, or incident. Since this is my first story, please forgive any mistakes and su...

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बिल्ली जो इंसान बनती थी By Sonam Brijwasi

Heroine: शानवी सिंह
Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान)

शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था।
बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। By kajal jha

"रात 3:12 बजे की दस्तक"
— इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक
बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी।

एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक
रात का सन्नाटा इतना गह...

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When silence learned my Name By Ashwini Dhruv Khanna

(New York, USA)

The conference center rose from the Manhattan street like a declaration—steel, glass, certainty. Inside, ambition moved with practiced ease. Badges flashed names...

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पर्दे के पीछे By ARTI MEENA

सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...

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કાયામત: અંતિમ આશ્રય By Anghad

તારીખ: ૧૨ ઓગસ્ટ, ૨૦૨X
સ્થળ: હિમાલયની પહાડીઓમાં આવેલી 'આર્યભટ્ટ એસ્ટ્રોનોમિકલ ઓબ્ઝર્વેટરી'

રાતના ત્રણ વાગ્યા હતા. બહાર બરફીલા પવનો ફૂંકાઈ રહ્યા હતા, પણ ઓબ્ઝર્વેટરીની અંદ...

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त्रिशा... By vrinda

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​अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक By jassu

मौत का दस्तक
​बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...

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Heroine: शानवी सिंह
Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान)

शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था।
बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। By kajal jha

"रात 3:12 बजे की दस्तक"
— इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक
बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी।

एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक
रात का सन्नाटा इतना गह...

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When silence learned my Name By Ashwini Dhruv Khanna

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તારીખ: ૧૨ ઓગસ્ટ, ૨૦૨X
સ્થળ: હિમાલયની પહાડીઓમાં આવેલી 'આર્યભટ્ટ એસ્ટ્રોનોમિકલ ઓબ્ઝર્વેટરી'

રાતના ત્રણ વાગ્યા હતા. બહાર બરફીલા પવનો ફૂંકાઈ રહ્યા હતા, પણ ઓબ્ઝર્વેટરીની અંદ...

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