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  • अधूरी मोहब्बत: दो दुनिया - भाग 17

    **भाग सत्रह: जंगल की वो खामोश गवाही**सिटी ऑडिटोरियम की उस चकाचौंध और हज़ारों की भ...

  • સંબંધની દોરી

    સંબંધની દોરીજીવનમાં કેટલાક સંબંધો માત્ર લોહીના સંબંધોથી જ બનતા નથી.પ્રેમ, વિશ્વા...

  • अजूबा मिलन - भाग 3

    अभी तक आपने पढ़ा कि रात को डॉक्टर कपिल के घर शरण लेने वाली लड़की गरिमा सुबह जब अप...

  • The Story of Kumbhakarna

    Kumbhakarna is a dominant rakshas and the younger brother of Ravana. Despite his...

  • आरती का कैफे

    आरती का कैफेएक महाविद्यालय के खेल के मैदान में बहुत से छात्र एकत्र थे। मंच पर मा...

  • वास्तविक चाबी

    वास्तविक चाबीरामपुर की पुरानी हवेली में समय जैसे ठहर गया था। मोटी दीवारें, लकड़ी...

  • Devil की दास्तान - 31

    हवेली की दीवारें हिल रही हैं। टुकड़े-टुकड़े काँच फर्श पर बिखरे हैं। बिजली की चमक...

  • ప్రణయ గీతిక - 12

    పప్పు మల్లెపూలు కొనాలని చెప్పడంతో ముందు మల్లెపూలు ఎందుకు అని   ప్రశ్నించిన ప్రభ...

  • अनंत के उस पार - 6

    कागज़ की उम्रसुबह की धुंधली रोशनी जब तीसरी मंज़िल की सीढ़ियों पर फैली, तब मीरा व...

  • અનુશાસન: સપના અને સફળતા વચ્ચેનો પુલ

    અનુશાસન: સપના અને સફળતા વચ્ચેનો પુલમાણસના જીવનની સાચી ઊંચાઈ તે આજે ક્યાં ઊભો છે...

અદ્રશ્ય શત્રુ By Rupen Patel

સાયબર સેલ હેડક્વાર્ટર – સવારનો સમય**(આખા હોલમાં અફરાતફરી મચેલી છે. કીબોર્ડના અવાજો, સતત વાગતી ફોનની ઘંટડીઓ અને ટીવી સ્ક્રીન પર બ્રેકિંગ ન્યૂઝનો ગભરાટે ભરેલો અવાજ માહોલને ગંભીર બનાવ...

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बारह बजे के बाद. By Alok Mishra

अध्याय 1 : बारह बजने से पहले

सर्दियों की उस रात शहर रंग-बिरंगी रोशनियों में नहा रहा था। हर सड़क पर जश्न था। होटल, क्लब और फार्महाउस संगीत की तेज़ धुनों से गूँज रहे थे। हर कोई पु...

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অন্ধকারের সংকেত By Sudip Maity

কলকাতার আকাশটা সেদিন অদ্ভুতভাবে মেঘলা ছিল। দুপুর হলেও চারপাশে একটা গুমোট অন্ধকার নেমে এসেছিল। আমি, রুদ্র, জানালার পাশে দাঁড়িয়ে বাইরে তাকিয়ে ছিলাম। রাস্তার গাড়িগুলো ধীরে ধীরে এগ...

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टाम ज़िंदा हैं By Neeraj Sharma

दुनिया सीधे लोगों की नहीं हैं.... चलाक बनो.. जानकारी उतनी ही इकठी करो जिसको तुम रख सकते हो.. जयादा जानकारी बहुत सेहत के लिए हानिकारक होती हैं.. हाँ मेरी बात अक्सर त्रिपाठी से होती...

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लाल निशान By Pankaj Sharma

रात, जिसने शहर की नींद छीन ली

रात के दो बजकर सत्रह मिनट।

अर्जुनपुर शहर सो रहा था।

सड़कें लगभग खाली थीं। कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी बारिश से भीगी सड़क पर पड़ रही...

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வினையை தேடி ஒரு பயணம்..... By shilpa varatharajulu

சாதாரணமாக கதை கேட்பது என்பது அனைவருக்கும் பிடித்தமான ஒன்று. எனக்கும் கதை கேட்பது என்பது பிடித்தமான ஒன்று . இக்கதை மற்ற கதைகளை போல் இல்லாமல் மிகவும் மாறுபட்ட கதை வடிவத்தை கொண...

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रॉ एजेंट By bhagwat singh naruka

इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इसका किसी जीवित, जंतु, मानव संसाधन से कोई लेना देना नही है अगर ऐसा होता है तो ये मात्र एक सयोग होगा ,,, जय हिन्द,
इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क...

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અંધારી રાતના ઓછાયા. By Nayana Viradiya

આ વાર્તા એક કલ્પના માત્ર છે આ વાર્તા ના પાત્રો,ઘટના કે સ્થળ સાથે કોઈ પણ સંબંધ એ સંયોગ હોય શકે છે તેનો કોઈ પણ વ્યક્તિ ઘટના,કે સ્થળ સાથે સીધો સંબંધ નથી.કોઈપણ ધમૅ,જાતિ કે જ્ઞાતિ સાથે...

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Agent Tara By Pooja Singh

मुंबई कभी नहीं सोती.
रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए की तरह.
आकृति मेहता इन्हीं सायों में खडी थी.
दुनिया की नजरों में वह आज भी वही थी...

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સૂક્ષ્મવેધ By Mansi Desai Shastri

​અમદાવાદની રફ્તાર રાત્રે પણ થંભતી નથી, પણ પાલડી વિસ્તારમાં આવેલું એ જૂનું મ્યુઝિયમ 'ધરોહર' જાણે સમયના પ્રવાહથી અલગ પડી ગયું હતું. તેની પથ્થરની દીવાલોમાં સેંકડો વર્ષોનો ઇતિહ...

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